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मरजावां की 'आरजू' ने अमर उजाला से साझा किए कामयाबी के राज, मां को लेकर कही बड़ी बात

Thu, 21 Nov 2019 12:58 AM IST
Mishra Mishra मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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Rakul Preet Singh - फोटो : amar ujala, mumbai
फिल्म मरजावां की रिलीज के साथ ही अभिनेत्री रकुलप्रीत सिंह ने अपनी अगली फिल्म की शूटिंग अर्जुन कपूर के साथ शुरू कर दी है। दक्षिण भारतीय सिनेमा में बड़ा नाम कमा चुकीं रकुलप्रीत बता रही हैं अपने हिंदी सिनेमा के सफर के बारे में।

आपका जन्म दिल्ली में हुआ। वहीं आप पली बढ़ीं और पढ़ाई भी की। अभिनय की शुरुआत कन्नड़ सिनेमा से कैसे हुई? 
मैंने 12वीं के बाद मॉडलिंग करना शुरू किया। मॉडलिंग के बीच में ही मुझे कन्नड़ फिल्म का ऑफर मिला। पहले तो मैंने मना कर दिया क्योंकि मुझे पता ही नहीं था कि दक्षिण भारत में भी अलग फिल्म इंडस्ट्री है। फिल्म बनाने वालों ने इसके बाद मेरे पिताजी से बात की और उनकी सलाह पर अनुभव हासिल करने और पॉकेट मनी के लिए मैंने इस फिल्म के लिए हां कर दी। मैंने फिल्म की तो मुझे बहुत मजा आया। इसके बाद ही मैंने अभिनेत्री बनने का फैसला किया। लेकिन, मैंने फिर भी कॉलेज नहीं छोड़ा।
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Rakul Preet Singh - फोटो : amar ujala, mumbai
और, फिर वहीं रम गईं?
नहीं, ऐसा कुछ नहीं कि मुझे साउथ में ही जमना है। मैंने पहली फिल्म के साथ साथ अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की ताकि कभी जरूरत पड़े तो अभिनय के अलावा भी कुछ काम मिल सके। कन्नड़ फिल्म के बाद ही मैं मुंबई आ गई थी। यहीं आकर मुझे हिंदी की पहली फ़िल्म 'यारियां' मिली। 'यारियां' की शूटिंग खत्म होने के दो दिन पहले ही मेरी एक तेलुगु फिल्म रिलीज हो गई और बहुत बड़ी हिट हो गई। इसी वजह से मैंने तीन-चार फिल्में साइन कर लीं और मैं दक्षिण भारतीय सिनेमा में व्यस्त हो गई।
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Rakul Preet Singh - फोटो : Instagram
तेलंगाना सरकार ने आपको 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान का दूत नियुक्त किया है। तो, आपने अब तक इसके लिए क्या-क्या काम किए?
जब हमने इस अभियान की शुरुआत की तो हमने बहुत से विज्ञापन बनाए जो स्थानीय चैनल्स पर आते हैं। छोटे-छोटे गांवों और शहरों में हमने इसका प्रचार किया। लोगों को सरकार द्वारा चलाई गईं योजनाओं के बारे में जागरूक किया। देश में सबसे बड़ी समस्या है कि लोगों को सरकार की योजनाओं के बारे में पता नहीं होता है। हम सिर्फ शहरों में लोगों को बताएं तो उसका कोई फायदा नहीं है। जिनके यहां टीवी नहीं है, उन्हें भी बताना जरूरी है कि लड़का और लड़की में अंतर मत करो। यही जागरूकता फैलाना हमारा मकसद था।

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Rakul Preet Singh - फोटो : Instagram
आमतौर पर लड़कियों को अभिनेत्री बनने के लिए घरवालों का समर्थन नहीं मिलता, लेकिन आपके साथ तो उल्टा हुआ है?
जी हां, असलियत यही है कि मेरे घरवालों ने ही मुझे एक्टर बनाया. मेरी मां ने भी मेरा पूरा साथ दिया। जब मैं छोटी थी तो पापा से बहुत सी चीजें मांगा करती थी। फिर मेरा छोटा भाई आ गया। लोगों का ध्यान उसकी तरफ हो गया तो मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था। मैं अपने भाई को बहुत परेशान करती थी। मेरी मां ही थीं जिन्होंने मुझे एक्टिंग करने के लिए प्रेरित किया। पहले तो मुझे मेरी मां की बात का भरोसा नहीं होता था। मैं सोचती थी कि ऐसे ही बोल रही हैं।
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Rakul Preet Singh - फोटो : Instagram
'मरजावां' में आरजू का किरदार स्वीकार करने के पीछे क्या सोच रही?
मैं 'दे दे प्यार दे' की शूटिंग कर रही थी, तब मरजावां के निर्देशक मिलाप झावेरी ने मुझे इस किरदार के बारे में बताया। मुझे इस किरदार की खास बात ये लगी कि पिछले कुछ समय में ऐसा किरदार लिखा नहीं गया। हम ऐसे चरित्र देख देखकर बड़े हुए हैं जैसे जीत और चांदनी बार में तब्बू के किरदार। मैंने सोचा कि लोगों को दिखाने के लिए और मेरे लिए यह कुछ अलग काम हो जाएगा तो बस कर ली। धन्यवाद उन सभी लोगों का जिन्हें ये किरदार पसंद आ रहा है।

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