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Exclusive: अमर उजाला से बोले अनिल कपूर, जो कलाकार होते हैं वे आधे पागल होते हैं

Fri, 15 Nov 2019 11:12 PM IST
Mishra Mishra मुंबई ब्यूरो, अमर उजाला
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Anil Kapoor - फोटो : Social Media
चार दशकों से कैमरे के आगे अपनी अनोखी ऊर्जा के साथ सक्रिय अनिल कपूर अगले महीने 63 साल के हो जाएंगे। उनसे मिलना हमेशा सिनेमा को समझने जैसा होता है। हिंदी सिनेमा में उनके निभाए लखन, मुन्ना, शिवाजी राव और प्रेम प्रताप पटियाले वाले जैसे किरदार मसाला फिल्मों का अध्ययन करने वालों के लिए दिलचस्प विषय रहे हैं। अनिल कपूर से एक खास मुलाकात।

देश की राजनीति में जब भी उथल-पुथल होती है, शिवाजी राव को जरूर याद किया जाता है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया होती है?
मैं अपने आपको खुशनसीब समझता हूं कि मुझे ऐसे किरदार मिले जो आज भी लोगों के दिलों में हैं। मुन्ना, लखन, मजनू और नायक के शिवाजी राव से लेकर नो एंट्री के किशन तक, सभी किरदारों को दर्शकों से खूब प्यार मिला है। सिर्फ हिट फिल्मों के किरदार ही नहीं बल्कि जो फिल्में नहीं चली हैं उसके किरदार भी लोगों के दिलों में ताजा रहते हैं।
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Anil Kapoor - फोटो : social media
आप अपने सुपरस्टार के तमगे का क्रेडिट किन लेखकों के साथ बांटना चाहेंगे?
जावेद (अख्तर) साहब और के भाग्यराज मेरे करियर के वे लेखक हैं जिन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुंचाने में बहुत ही बड़ा योगदान दिया है। बिना लेखक के किरदार में जान नहीं आती है और जब तक फिल्म का हीरो जानदार नहीं होता, लोगों को फिल्म पसंद नहीं आती। तो एक मजबूत किरदार के लिए मैं हमेशा फिल्म के लेखक को तवज्जो देता हूं और उसकी इज्जत भी करता हूं।
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Anil Kapoor, Sunita Kapoor - फोटो : social media
लोगों का सुझाव है कि फिल्म कारोबार के आंकड़ों की ऑडिट किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए, आपका क्या मत है?
इन सब चीजों पर मैं इतना ध्यान नहीं देता। यह सब निर्माता, वितरक और स्टूडियो के मतलब की बात है। मैंने जब से करियर शुरू किया है तब से मैंने सिर्फ अपने काम पर ही ध्यान दिया है। मेरा ध्यान  हमेशा इस बात पर रहता है कि अपने किरदार को कैसे बेहतर बनाना है। मैंने कभी कॉमर्स को नहीं बल्कि कॉमर्स ने मुझे फॉलो किया है।

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anil kapoor, sanjay kapoor - फोटो : social media
पहले के जमाने में फिल्म प्रमोशन के समय अगर सोशल मीडिया होता तो क्या फायदा और नुकसान हो सकता था?
अगर पहले के समय में भी आज जैसे ही प्रमोशन के तरीके होते तो उसका फायदा और नुकसान दोनों ही हो सकता था। नुकसान यह होता कि जब तक दुनिया को कुछ पता चलता कि फिल्म कैसी है तब तक वह फिल्म पैसे कमा कर निकल जाती। वहीं फायदा यह होता कि उस समय की ऐसी फिल्में रहीं जो सिर्फ शहरों तक ही सीमित रहीं, उन्हें दूर दराज के इलाकों तक पहुंचाया जा सकता था। मेरी ही तमाम फिल्में ऐसी हैं जिन्हें अगर दर्शकों का विस्तार मिलता तो उनकी पहुंच और उनका असर दूर तक हो सकता था। इन फिल्मों में
जैसे वो सात दिन, साहेब और लम्हे। अगर इन फिल्मों के समय सोशल मीडिया होता तो यह फिल्में दूर दराज इलाकों में अधिक मात्रा में पहुंचती और अधिक सफल होती। 
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anil kapoor
आपके करियर में गेंम चेंजर फिल्म कौन सी रही है?
वो सात दिन मेरी जिंदगी में एक ऐसी फिल्म रही जिसने मुझे सिनेमा जगत के सभी फिल्मकारों की नजरों में पहुंचाया।

आपने अपनी जिंदगी में सबसे अधिक पागलपंती का कौन सा काम किया है?
कुछ ना कुछ तो मैं रोज कर ही देता हूं। दरअसल जो कलाकार होते हैं वे आधे पागल होते हैं। तो वह कुछ ना कुछ पागलपंती करते ही रहते हैं। अगर हम आधे पागल ना हों तो सालों तक इस तरह से काम नहीं कर सकते हैं।  
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anil kapoor
जॉन अब्राहम और अनीस बज्मी के साथ आप ढेरों फिल्मों में काम कर चुके हैं। दोनों के साथ आपकी कैसी केमिस्ट्री है?
जॉन के साथ यह मेरी पांचवी फिल्म है तो वहीं अनीस के साथ मैं करीब दर्जन भर फिल्में कर चुका हूं। हमारी केमिस्ट्री और हिस्ट्री दोनों ही अच्छे हैं इसलिए हम इतने लंबे समय से काम कर रहे हैं। हिस्ट्री इसलिए क्योंकि हमारी फिल्में कामयाब रही हैं और केमिस्ट्री इसलिए क्योंकि हमारे बीच रिश्ता अच्छा रहा है। दोनों के ही अंदर अपने काम को लेकर काफी उत्साह है जो मुझे हमेशा ही सकारात्मक उर्जा प्रदान करता है।

लोग कहते रहते हैं कि अगर अनिल कपूर की जिंदगी पर बायोपिक बने तो वह काफी दिलचस्प होगी, कौन कर सकता है इस फिल्म में आपका रोल?
वैसे तो ये काम कास्टिंग डायरेक्टर और स्क्रिप्ट पर निर्भर होता है। लेकिन इसके लिए मैं खुद भी कोशिश करता चाहूंगा। अगर सबसे अच्छा ऑडिशन  मैंने दिया तो फिर मेरी जगह कोई और क्यों हो?
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