दरअसल संगठन तमाम पदाधिकारी पिछले एक दशक से कब्जा जमाए हुए हैं और कई पदाधिकारियों की छवि को लेकर गंभीर सवाल भी उठते रहे हैं। इसे देखते हुए प्रदेश नेतृत्व ऐसे सभी पुराने पदाधिकारियों को बदलने का फैसला किया है, लेकिन कई बड़े नेता अपने-अपने चहेतों को दोबारा संगठन में बनाए रखने और पदोन्नति दिलाने को लेकर जोर लगाए हुए हैं, इस वजह से सहमति नहीं बन रही है।
सूत्रों का कहना है कि कई नेताओं ने अपने चहेतों के बारे में गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से सिफारिश करा रहे हैं। जबकि प्रदेश नेतृत्व उन नामों पर सहमत नहीं है, इस वजह से अंतिम निर्णय नहीं हो पा रहा है। प्रदेश के अलावा खासतौर से क्षेत्रीय अध्यक्षों और मोर्चों के पदाधिकारियों को लेकर अभी पेंच फंसा हुआ है।
संगठन के मुख्य पदाधिकारियों के अधिकांश नामों पर तो सहमति बन गई है, कुछ नामों पर जिद कायम है। ऐसे ही क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदलने और उनको समायोजित करने को लेकर भी सहमति नहीं बन पाई है। जबकि केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश नेतृत्व से विभिन्न अनुषांगिक मोर्चों के अध्यक्षों के नाम भी मांगे हैं। इन पदों पर भी दावेदारों की भारी भीड़ ने मामला उलझा दिया है। सूत्रों का कहना है कि रविवार या सोमवार तक सभी अनुषांगिक संगठनों के अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों की सूची को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।