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Jammu News: कूड़ेदान होने के बाद भी जीठयार मंदिर को जाने वाली सड़क पर प्लास्टिक कचरा बिखरा पड़ा

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जीठियार मंदिर वाली सड़क पर प्लास्टिक। संवाद
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अमर उजाला ब्यूरो
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श्रीनगर। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के गुप्कार इलाके में स्थित प्रतिष्ठित जीठयार मंदिर की ओर जाने वाली सड़क प्लास्टिक की बोतलों और अन्य कचरे से भरी पड़ी है जिसकी स्थानीय लोगों और मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं ने तीखी आलोचना की है।
यह तब हो रहा है जब श्रीनगर नगर निगम (एसएमसी) ने स्वच्छता बनाए रखने के लिए इस मार्ग पर कई कूड़ेदान लगाए हैं। एक स्थानीय व्यक्ति मेहराज दीन ने कहा कि एसएमसी द्वारा नियमित अंतराल पर कूड़ेदान रखे गए हैं फिर भी लोग सड़क किनारे प्लास्टिक की बोतलें और रैपर फेंकते रहते हैं। इससे न केवल इलाके की सुंदरता खराब होती है बल्कि नागरिक भावना की कमी भी दिखाई देती है।
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एक अन्य स्थानीय ने नाम न जाहिर करने की इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि हम रोजाना यहां ड्यूटी पर आते हैं लेकिन यहां प्लास्टिक की बोतलें और अन्य कचरा देख दिल दुखी होता है। हरे भरे घने जंगल में कचरा आंखों को चुबता है और दुख होता है। लोगों को एहसास नहीं है। एसएमसी ने अगर डस्टबिन लगाए हैं तो यह हम सभी का फर्ज बनता है उसका इस्तेमाल करें लेकिन ऐसा नहीं करते। हम लोग केवल कर्मचारियों और अधिकारियों को दोषी ठहराते हैं।
गौरतलब है कि जबरवन पहाड़ियों की दामन में स्थित ज़ीठयारमंदिर में प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु और आगंतुक आते हैं। हालांकि अनियंत्रित कूड़े-कचरे ने इस इलाके की छवि खराब की है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि प्लास्टिक के जमाव से आस-पास की नालियां जाम हो सकती हैं और आसपास की हरियाली को नुकसान पहुंच सकता है।
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एक स्थानीय पर्यावरण समूह से जुड़े एक कार्यकर्ता मुजफ्फर अहमद ने कहा कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों को स्वच्छता का उदाहरण स्थापित करना चाहिए। इस तरह के व्यवहार को रोकने के लिए एसएमसी को नियमित अभियान चलाना चाहिए और उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाना चाहिए लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सबसे बड़ी हमारी जिम्मेदारी बनती है अपने आसपास के माहौल को साफ रखना।
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