अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि दुष्कर्म के हर मामले में केवल पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी को सजा नहीं दी जा सकती। अगर मेडिकल रिपोर्ट और दूसरे साक्ष्य पीड़िता के बयान से मेल नहीं खाते हैं तो अदालत को पूरे मामले की गहराई से जांच करनी होगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि कई मामलों में केवल पीड़िता की गवाही के आधार पर भी सजा दी जा सकती है, लेकिन ऐसा तभी होगा जब उसकी गवाही पूरी तरह भरोसेमंद हो और अदालत का विश्वास जीतती हो।
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी 2016 के एक दुष्कर्म मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि यह आरोप बेहद गंभीर होता है और ऐसे मामलों की सुनवाई पूरी संवेदनशीलता के साथ होनी चाहिए। उतना ही जरूरी यह भी है कि आरोपी के साथ निष्पक्ष सुनवाई हो और फैसला केवल भरोसेमंद साक्ष्यों के आधार पर दिया जाए। अदालत का दायित्व है कि वह पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और मामले से जुड़े सभी तथ्यों को साथ रखकर निष्पक्ष फैसला करे।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यौन अपराध के मामलों में पीड़िता के बयान में ऐसे विरोधाभास या बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें, जो मामले की जड़ पर असर नहीं डालतीं, केवल उनके आधार पर पूरी गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत को यह देखना होगा कि क्या ऐसे विरोधाभास इतने गंभीर हैं कि पूरी कहानी पर संदेह पैदा हो। यदि ऐसा नहीं है तो केवल इन्हीं कारणों से पूरा मामला खारिज नहीं किया जा सकता। इन्हीं सिद्धांतों को लागू करते हुए हाईकोर्ट ने इस मामले के साक्ष्यों की दोबारा जांच की।