जम्मू। घरों में अकेले रह रहे और बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों को अब घर पर ही पेशेवर नर्सिंग केयर मिल सकेगी। बुजुर्गों की बड़ी जरूरत को पूरा करने के लिए युवाओं और युवतियों को केयरगिवर (देखभाल करने वाला) बनाने की योजना तैयार की गई है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की पहल पर शुरू हो रहे पायलट प्रोजेक्ट के तहत 450 घंटे की विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।
जम्मू और श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के हाईटेक क्लास रूम में चिकित्सा और मनोविज्ञान क्षेत्र के विशेषज्ञ युवाओं को प्रशिक्षित करेंगे। थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल नॉलेज पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाएगा ताकि युवा बुजुर्गों की शारीरिक और भावनात्मक जरूरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
योजना का दोहरा लाभ होगा। एक तरफ जहां बुजुर्गों को घर बैठे ही बेहतर स्वास्थ्य और नर्सिंग सुविधाएं मिलेंगी, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए और सम्मानजनक अवसर पैदा होंगे। 450 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग के बाद तैयार होने वाले केयरगिवर बुजुर्गों की शारीरिक देखभाल के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जरूरतों को संभालने में पूरी तरह सक्षम होंगे। प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाएगा कि युवा बुजुर्गों के साथ संवेदनशील व्यवहार करें, जिससे उनका अकेलापन दूर हो सके।
पहले चरण में तैयार होगा 40 युवाओं का बैच
शुरुआती चरण में प्रत्येक क्लासरूम में 40 युवाओं के बैच को एक साथ ट्रेनिंग दी जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद प्रोग्राम का दायरा बढ़ाकर अन्य युवाओं को भी मुहिम से जोड़ा जाएगा। पाठ्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से बांटा गया है। 200 घंटे में क्लिनिकल नर्सिंग की जानकारी दी जाएगी। बुजुर्गों के वाइटल्स (ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल आदि) की नियमित जांच करना, इंसुलिन और दवा की सही डोज देना, लंबे समय तक बेड पर रहने वाले मरीजों को बेड सोर्स (जख्म) से बचाना और व्हीलचेयर व वॉकर का सही इस्तेमाल कराना सिखाया जाएगा। 100 घंटे में इमर्जेंसी रिस्पॉन्स के टिप्स मिलेंगे। यदि घर पर बुजुर्ग को अचानक दिल का दौरा, स्ट्रोक या सांस लेने में तकलीफ हो तो डॉक्टर के आने से पहले कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देने और लाइफ सपोर्टिंग तरीके अपनाने का प्रशिक्षण मिलेगा। 100 घंटे जेरियाट्रिक साइकोलॉजी और न्यूट्रिशन को समर्पित होंगे। बुजुर्गों में डिमेंशिया (भूलने की बीमारी), अल्जाइमर और डिप्रेशन (अवसाद) जैसी मानसिक स्थितियों को समझने और उम्र व बीमारी के हिसाब से डाइट चार्ट तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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जुलाई से काम शुरू होने की उम्मीद, पहले बनेगी कमेटी
महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने से पहले विशेष कमेटी का गठन किया जाएगा। कमेटी में मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के डीन की ओर से कमेटी को बनाने की औपचारिक स्वीकृति दी जा चुकी है। माना जा रहा है कि पूरे प्रोजेक्ट पर जुलाई से काम शुरू हो जाएगा।