संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से चार सालों से चावल मिल मालिकों को सूखा भत्ता न मिलने से ज्यादातर मिल बंदी की कगार पर हैं। मिल मालिकों का कहना है कि बासमती का अधिक देर तक भंडारण करने से उसकी नमी कम हो जाती है। इससे वजन कम हो जाता है जिसकी भरपाई हमेशा से एफसीआई करता आया है लेकिन तीन वर्षों से यह भत्ता न दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, जम्मू संभाग में 100 से ज्यादा चावल मिले हैं। मिल मालिकों का कहना है कि एपसीआई अस्थायी तौर पर अनाज मंडी स्थापित कर हर वर्ष हर जिले में मोटे धान की खरीदरी करती है जबकि विभिन्न किस्मों की बासमती एफसीआई सीधे तौर पर नहीं खरीदती है। यह सीधे मिलों से की जाती है। इसकी एवज में सरकार एफसीआई के माध्यम से सूखा भत्ता देती है जिसका भुगतान नहीं हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल्द भत्ता जारी किया जाए। अन्यथा जम्मू संभाग की 70 फीसदी चावल मिलें बंद हो जाएंगी।
उपराज्यपाल से भत्ता जारी करने की मांग
राइस मिल्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर भत्ता जारी करने की मांग की है। अध्यक्ष अजीत बावा ने बताया कि भत्ता जारी न होने से मिल मालिकों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने उपराज्यपाल से अनुरोध किया कि वे मामले में हस्तक्षेप कर लंबित भत्ता शीघ्र दिलवाएं। इस मौके पर महासचिव बलविंद्र सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बंसी लाल, उपाध्यक्ष अभिषेक चाढ़क और सचिव साहिल गुप्ता मौजूद रहे।