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DK Shivkumar: सिद्धारमैया से मिलने के बाद वराह स्वामी मंदिर पहुंचे डीके शिवकुमार, कहा- जब तिहाड़ में था तो...

Sat, 29 Nov 2025 10:50 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मांड्या के भू वराह स्वामी मंदिर में दर्शन किए और राज्य की भलाई के लिए प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि तिहाड़ जेल में रहने के दौरान उनके ससुराल पक्ष यहां कई बार प्रार्थना करने आए थे। शिवकुमार ने कहा कि मंदिर में सभी धर्मों के लोग आते हैं और इसके निर्माण में मुस्लिम कारीगर भी शामिल हैं।
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कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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कर्नाटक की राजनीति में लगातार खींचतान मची हुई है। इसी बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने रविवार सुबह मांड्या स्थित भू वराह स्वामी मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिर में उनकी पत्नी उषा शिवकुमार भी मौजूद रहीं। मंदिर दर्शन के बाद शिवकुमार ने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक स्थल केवल धार्मिक जगह नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का उदाहरण है।

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मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने बताया कि जब वह तिहाड़ जेल में थे, उस दौरान उनकी सास और ससुर चार बार इस मंदिर में प्रार्थना करने आए थे। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से एक अन्य पार्टी के उनके मित्र लगातार उन्हें यहां आने की सलाह दे रहे थे। शिवकुमार ने कहा कि मंदिर में प्रवेश करते ही उन्हें अध्यात्मिक ऊर्जा और गौरव का एहसास हुआ। उन्होंने कहा कि भू वराह स्वामी मंदिर का इतिहास गहरा है और इसकी शांत, पवित्रता से भरी ऊर्जा मन को विशेष रूप से आकर्षित करती है।



जहां धर्म और जाति की दीवारें नहीं
शिवकुमार ने मंदिर के बारे में बताया कि यहां केवल हिंदू ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लोग दर्शन करने आते हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मंदिर निर्माण और रखरखाव के कई कार्य मुस्लिम कारीगरों द्वारा किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, यह इस बात का सशक्त संदेश है कि आस्था के स्थान केवल पूजा के लिए नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में बांधने का काम भी करते हैं। शिवकुमार ने कहा कि यह मंदिर कर्नाटक की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है।
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राज्य की भलाई के लिए प्रार्थना
शिवकुमार ने कहा कि उनका यह दौरा अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि ईश्वर की प्रेरणा था। उन्होंने राज्य के कल्याण, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि सुबह-सुबह मंदिर आगमन तय हुआ और वे यह जानने के लिए पुजारी से पूछने लगे कि क्या उन्हें पूजा के लिए कुछ साथ लाना चाहिए। पुजारी ने कहा कि केवल आकर दर्शन करना ही पर्याप्त है। शिवकुमार ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि पुजारी ने उनके लिए किसी ‘होम’ या विशेष अनुष्ठान का आयोजन किया था या नहीं। लेकिन मंदिर में मिली सकारात्मक ऊर्जा उन्हें विशेष प्रेरणा देने वाली रही।

आस्था और राजनीति के बीच शिवकुमार की स्पष्टता
शिवकुमार ने बातचीत के दौरान यह भी कहा कि मंदिर आने का उद्देश्य पूरी तरह आध्यात्मिक था, और इससे किसी राजनीतिक संदेश को जोड़ना गलत होगा। उन्होंने कहा कि सभी वरिष्ठ लोग और देवता उन पर अपना स्नेह बनाए हुए हैं, और इसी भाव ने उन्हें यहां आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मंदिर के भीतर स्थित मूर्ति अत्यंत सुंदर है और उसमें दिव्यता स्पष्ट महसूस होती है।
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भविष्य की जिम्मेदारियों के संकेत?
शिवकुमार के इस मंदिर दर्शन को लेकर कर्नाटक की राजनीति में अनेक तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि उनकी प्रार्थना केवल राज्य के कल्याण के लिए थी। लेकिन मंदिर में उन्होंने जिस तरह कहा कि “पता नहीं पुजारी ने मुझे ऊंचा पद दिलाने के लिए कोई होम किया या नहीं”, उससे यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या वे आने वाले समय में और बड़ी भूमिका की उम्मीद रख रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी राजनीतिक भविष्य या पद को लेकर कोई दावा नहीं किया। उनके अनुसार, मंदिर से मिला आशीर्वाद उनके लिए आध्यात्मिक शक्ति और सार्वजनिक जिम्मेदारियों के निर्वहन का संबल है।

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