गगरेट (ऊना)। प्रदेश की कीमती वन संपदा शिवालिक रेंज की पहाड़ियों से होते हुए पंजाब के विभिन्न स्थानों तक पहुंच रही है। प्रतिदिन वैध व अवैध लकड़ी से भरी गाड़ियां सुबह-सुबह दनदनाती हुई पंजाब का रुख करती नजर आती हैं। यह रूट वन माफिया के लिए किसी सिल्क रूट की तरह साबित हो रहा है। शिवालिक की गोद जहां प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग कि अनुभूति का एहसास दिलाती हैं, वहीं वन माफिया के लिए पनाहगार साबित हो रही है।
पहले बालन जैसी लकड़ी का ही अवैध कटान होता था। अब कीमती लकड़ी खैर की तस्करी कर लोग चांदी कूट रहे हैं। पिछले दिनों से वन विभाग ने वन माफिया पर शिकंजा कसा है। वन माफिया अभी भी बेलगाम होकर वन संपदा का नाश करने पर तुला हुआ है।
मौसम में बदलाव व ग्लोबल वार्मिंग का वन काटुओं को कोई मतलब नहीं, उन्हें तो बस अपनी जेब गर्म करने से मतलब है। यही नहीं, तस्कर निजी वाहनों जैसे कार में भी खैर के मोछे ढोकर अपनी दिहाड़ी बनाने लग गए हैं। वन विभाग ने ऐसे जुगाडू तस्करों पर भी लगाम लगाई है। वन माफिया के साथ-साथ क्षेत्र में खनन माफिया भी खासा सक्रिय है। नियमों को ताक में रखकर खनन भी हो रहा है।
पिछले लगभग दो माह में वन विभाग व पुलिस के सयुंक्त प्रयासों से गगरेट में 20 से अधिक गाड़ियां जो अवैध रूप से बालन पंजाब के होशियारपुर ले जा रही थी, उन्हें पकड़ा है। जिनमें से दो-तीन पर एफआईआर भी दर्ज हुई है। वहीं निजी वाहनों में खैर ले जाने वाले शातिरों पर भी करवाई की गई है। वन विभाग पूरी तरह से वन काटुओं पर नजर बनाए हुए है।
-राहुल ठाकुर, रेंज ऑफिसर वन विभाग
कुछ लोग प्राकृतिक संपदा को अंधाधुंध काट कर न केवल पर्यावरण का नुकसान कर रहे हैं बल्कि हिमाचल जैसे शांत क्षेत्र को बदनाम कर माहौल भी खराब कर रहे हैं। वन माफिया पर कार्रवाई जरूरी है।
- मनु ठाकुर, अध्यक्ष शहीद भगत सिंह क्लब
वन विभाग व पुलिस की कठोर कार्रवाई के बावजूद वन माफिया अपने काम को अंजाम तक पहुंचा रहा है। सरकार वन संपदा के अवैध कटान पर लगाम लगाने के लिए नियम और कठोर करे।
- अरविंद चक्रवर्ती, व्यापार मंडल गगरेट
प्रदेश की लाखों रुपये की वन संपदा को प्रतिदिन माफिया विभिन्न रूटों से पंजाब में बेच रहे हैं। जिससे पर्यावरण को भी खासा नुकसान पहुंच रहा है। सरकार इस तरह की गतिविधियों पर तुरंत प्रभाव से लगाम लगाए।
- सुरिंद्र कुमार, पूर्व अध्यक्ष नगर पंचायत गगरेट