वीरवार सुबह करीब 8:00 बजे सुल्तानपुर में भगवान रघुनाथ मंदिर में देवताओं के पहुंचने का सिलसिला आरंभ हुआ। देवता बिजली महादेव एक दिन पूर्व ही मंदिर के समीप डेरा लगाए थे। करीब 9:30 बजे माता रूपासना और जोड़ा नारायण ने भगवान रघुनाथ से देव मिलन किया। ऊझी घाटी, पार्वती घाटी, गड़सा, बंजार, आनी और सैंज घाटी के देवता भी बारी-बारी से पहुंचते रहे। दोपहर बाद करीब 2:00 बजे बंजार के देवता बड़ा छमाहूं यहां पहुंचे। माता भागासिद्ध, माता दशमी वारदा, जुआणी महादेव सहित 300 से अधिक देवताओं ने भगवान रघुनाथ से देव मिलन किया। इससे पहले माता हिडिंबा लाव-लश्कर के साथ राजमहल पहुंचीं। इसके बाद भगवान रघुनाथ के ढालपुर के आने की तैयारियां शुरू हो गईं। 3:00 बजे भगवान रघुनाथ देवता बिजली महादेव सहित अन्य देवताओं के साथ ढालपुर के लिए रवाना हो गए। सुल्तानपुर से लेकर ढालपुर तक माहौल जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा।
दशहरा उत्सव का आगाज हो गया है। दशहरा में पहले दिन देव परंपरा का निर्वहन करने के देवता अपने अस्थायी शिविरों में विराजमान हो गए हैं। देवलू भी सात दिनों तक अपने देवी-देवताओं संग डेरा डाले रहेंगे। - दोत राम ठाकुर, अध्यक्ष, जिला देवी-देवता कारदार संघ