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हिमाचल: ग्रामीण क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण पर लगेगी रोक, कैबिनेट सब कमेटी में एक माह में देगी रिपोर्ट

Tue, 11 Nov 2025 04:00 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश में निर्माण गतिविधियों को सुव्यवस्थित करने और अनियंत्रित निर्माण पर नियंत्रण के उद्देश्य से मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया है। यह समिति ग्रामीण क्षेत्र विकास दिशा-निर्देशों की समीक्षा करेगी। अधिसूचना के अनुसार समिति की अध्यक्षता राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी करेंगे। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश सरकार। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को सुव्यवस्थित करने और अनियंत्रित निर्माण पर नियंत्रण के उद्देश्य से मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग ने अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि यह समिति ग्रामीण क्षेत्र विकास दिशा-निर्देशों की समीक्षा करेगी। साथ ही आवश्यक सुधारात्मक सुझाव प्रस्तुत करेगी। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने इस बाबत अधिसूचना जारी की है।

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अधिसूचना के अनुसार समिति की अध्यक्षता राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी करेंगे, जबकि ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी समिति के सदस्य होंगे। ग्रामीण विकास विभाग के सचिव को समिति का सदस्य सचिव नामित किया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करे। प्रदेश सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब हाल के वर्षों में राज्य ने बरसात के मौसम में भारी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। इस वर्ष के मानसून में कई जिलों में भूस्खलन, मलबा गिरने और भवनों के ध्वस्त होने जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे जन-धन की भारी क्षति हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियोजित निर्माण गतिविधियों विशेषकर संवेदनशील क्षेत्रों में इन आपदाओं के प्रभाव को और बढ़ा दिया है। सरकार चाहती है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को न्यूनतम किया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण पूरी तरह वैज्ञानिक व पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित हो।

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समिति विभिन्न विभागों और हितधारकों से परामर्श लेकर व्यावहारिक दिशा-निर्देश तैयार करेगी। इसमें यह देखा जाएगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण की अनुमति, भवन की ऊंचाई, भूमि उपयोग, जल निकासी और पर्यावरणीय प्रभाव जैसे पहलुओं को किस प्रकार संतुलित किया जा सकता है। साथ ही भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के लिए विशेष मानक अपनाने पर भी विचार किया जाएगा।सरकार का मानना है कि प्रदेश के गांवों में सुनियोजित, सुरक्षित और स्थायी विकास की दिशा में नई पहल होगी। यह न केवल अवैध निर्माण पर रोक लगाएगी, बल्कि ग्रामीण स्तर पर रोजगार सृजन, पर्यटन संवर्धन और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी सहायक सिद्ध होगी।
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