चार्जशीट के मुताबिक, फर्जी वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़े आईपी एड्रेस को ट्रैक कर सीधे गौरव, सुभाष और उसके नेटवर्क से जोड़ा गया था। जिन कंप्यूटरों से गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन की गई, उनकी डिजिटल लोकेशन और लॉग्स के जरिये यह साबित हुआ कि यह काम सिस्टम के भीतर बैठकर ही किया जा रहा था। जांच में 44 गाड़ियों का फर्जी रजिस्ट्रेशन सीधे सुभाष से जुड़ा पाया है। दूसरे आरोपी, गौरव के नाम पर 45 गाड़ियों का रिकॉर्ड सामने आया है। बताया जा रहा है कि इन गाड़ियों का आंकड़ा 1,000 के पार है। सुभाष के कार्यकाल के दौरान किए गए 357 गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की जांच की गई, जिनमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं।
गौरव से जुड़े मामलों में फर्जीवाड़े का दायरा और भी बड़ा बताया जा रहा है। फिलहाल इन मामलों की जांच जारी है और कई नई कड़ियां सामने आ रही हैं। फर्जी रजिस्ट्रेशन और गाड़ियों की खरीद-फरोख्त के जरिये करीब 30 करोड़ रुपये के लेनदेन का अंदाजा लगाया जा रहा है। लोगों को आरएलए की असली दिखने वाली आरसी दिखाकर गाड़ियां बेची जाती थीं, लेकिन बाद में वे वाहन चोरी के या फर्जी दस्तावेजों वाले निकलते थे।
पुलिस को मिली शिकायत पर बिलासपुर में रविवार को पहला केस दर्ज किया गया है। वाहन रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, दस्तावेज, बैंक लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - संदीप धवल, एसपी बिलासपुर