गुरुदत्त भारद्वाज
पुन्हाना। पब्लिक हेल्थ डिविजन पुन्हाना में फर्जी बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की शिकायत पर बुधवार को सीएम फ्लाइंग की टीम ने जांच शुरू कर दी। टीम ने जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय पहुंचकर रिकॉर्ड की जांच की। सीएम फलाइंग रेवाडी के डीएसपी साकिर हुसैन स्वंय टीम के साथ कार्यालय पंहुचे और दस्तावेजों को खंगालना शुरू किया। सुबह करीब साढ़े नौ बजे पहुंची टीम देर शाम तक कार्यालय में डटी रही और अधिकारियों से दस्तावेज जुटाती रही। कार्रवाई के दौरान विभाग में दिनभर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
जानकारी के अनुसार बीसरू गांव निवासी पूर्व जिला पार्षद पति मुफीद पुत्र इकबाल ने मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजकर पब्लिक हेल्थ डिविजन पुन्हाना में ठेकेदारों द्वारा फर्जी बिल और बोगस दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये की राशि निकालने के आरोप लगाए थे। शिकायत में वर्ष 2024 और 2026 में हुए कार्यों, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान में अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी।
सीएम फ्लाइंग के इंस्पेक्टर सत्येंद्र और राजेश कुमार ने बताया कि अनुपस्थित कर्मचारी और अधिकारी की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। रिपोर्ट को संबंधित विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा। टीम ने शहर स्थित सब डिविजन कार्यालय का भी निरीक्षण किया। दोनों जगह सिर्फ सफाई कर्मचारी मौजूद थे।
30 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ ठेकेदारों ने मिलीभगत कर फर्जी हस्ताक्षर, दस्तावेज और बिल तैयार कर विभाग से भुगतान कराया। शिकायतकर्ता ने करीब 30 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाते हुए 2024 में हुए कार्यों और इसके बाद करीब 22 करोड़ रुपये के ऑनलाइन टेंडर तथा अन्य योजनाओं की भी जांच कराने की मांग की है।
सीएम फ्लाइंग की टीम ने शिकायत के आधार पर गुरुवार को कार्यालय पहुंचकर संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए। टीम ने पिछले पांच वर्षों में हुए कार्यों, टेंडर प्रक्रिया, बिलों, भुगतान संबंधी दस्तावेजों और अधिकारियों के हस्ताक्षरों से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं। टीम द्वारा रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है।
शिकायत में कई ठेकेदारों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ ठेकेदारों ने विभाग में प्रभाव बनाकर फर्जी तरीके से भुगतान निकलवाए। साथ ही कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए जांच की मांग की गई है।
ठेकेदार लगाते रहे कार्यालय के बाहर चक्कर
बताया जा रहा है कि जांच टीम ने विभाग के अधिकारियों से आवश्यक जानकारी ली और पुराने रिकॉर्ड को खंगालना शुरू कर दिया है। सीएम फ्लाइंग की कार्रवाई के चलते कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों में दिनभर हलचल रही। कई कर्मचारी रिकॉर्ड जुटाने में लगे रहे तो शिकायत में नाम आने पर कई ठेकेदार कार्यालय के बाहर चक्कर लगाते रहे और कार्यवाही की पल-पल की जानकारी जुटाते रहे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पहले भी कुछ मामलों में जांच हुई, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। अब शिकायत के बाद सीएम फ्लाइंग द्वारा शुरू की गई जांच से मामले में नए सिरे से कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
वहीं, सीएम फ्लाइंग अधिकारियों ने जांच को लेकर अभी कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कई अधिकारी बने करोड़पति
इलाके के लोगों की प्यास बुझाने के लिए प्रदेश सरकार ने शुरू की रेनीवेल परियोजना व जल जीवन मिशन योजना के बाद भी यहां वर्षों से पेयजल की समस्या बनी हुई है। करोडों रुपये पानी पर खर्च तो हुए, लेकिन कागजों में। विभाग में फैले भ्रष्टाचार का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि छोटे से कार्यकाल में विभाग के कई अधिकारियों ने करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी एकत्रित की हुई है। करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी सहित दर्जनों एकड़ कृषि योग्य भूमि को लेकर पिछले कुछ वर्षों से एक अधिकारी चर्चा में बना हुआ है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि ऐसे अधिकारियों पर आज तक ना तो एंटी करप्शन ब्यूरो की नजर पड़ी और ना सरकार की।