20जेएनडी22:शहर के एक अल्ट्रासाउंड केंद्र पर जांच करते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद
जींद। जिले के लिंगानुपात को प्रदेश में फिर से अव्वल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अब निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। भ्रूण लिंग जांच पर पूरी तरह रोक लगाने और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वीरवार को स्वास्थ्य विभाग की 13 टीमें एक साथ फील्ड में उतरीं।
टीमों ने जिले के अलग-अलग अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर पहुंचकर रिकॉर्ड, जांच से संबंधित दस्तावेज और अन्य जरूरी कागजात खंगाले। विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि नियमों की अनदेखी करने वाले केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली के नेतृत्व में चल रहे अभियान का उद्देश्य केवल अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच करना नहीं, बल्कि जिले में भ्रूण लिंग जांच जैसी सामाजिक बुराई पर पूरी तरह अंकुश लगाना है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें केंद्रों पर रिकॉर्ड की जांच के साथ यह भी देख रही हैं कि वहां निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन हो रहा है या नहीं।
टीम ने पांच अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण किया
डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला और एलएमओ डॉ. वंदना की टीम ने पांच अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण किया। टीमों ने केंद्रों पर उपलब्ध रिकॉर्ड, मरीजों से संबंधित दस्तावेज और अल्ट्रासाउंड जांच से जुड़े रजिस्टरों की पड़ताल की। विभाग की ओर से समय-समय पर ऐसे निरीक्षण किए जा रहे हैं, ताकि नियमों की आड़ में किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि को जगह न मिल सके।
बाक्स
लिंगानुपात सुधारने के लिए समाज की सोच बदलना जरूरी है। बेटा और बेटी में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियां आज शिक्षा, खेल, चिकित्सा, प्रशासन, विज्ञान समेत हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने आमजन से भ्रूण लिंग जांच जैसी कुरीति को खत्म करने में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करने की अपील की।
-डॉ. सुमन कोहली, सिविल सर्जन जींद।