कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। परिजनों की तहरीर पर संबंधित थाने में नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
डीएम दिव्या मित्तल के निर्देश पर सीडीओ की अध्यक्षता में एसडीएम सदर एवं डीआईओएस को शामिल करते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। टीम पूरे मामले की बिंदुवार जांच कर निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आरोपित पटल सहायक संजीव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
मैं मरना नहीं चाहता, लेकिन मुझे मजबूर किया गया
सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन ने लिखा- मैं कर्ज के बोझ से दब चुका हूं। मेरे बच्चों और पत्नी का क्या होगा, यह सोचकर रूह कांप जाती है। मैं मरना नहीं चाहता, लेकिन मुझे मजबूर किया गया। उन्होंने अपनी मौत के लिए बीएसए कार्यालय के बाबू और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया तथा पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
उन्होंने यह भी लिखा कि उनकी बेटी आस्था के नाम सुकन्या खाते में चार लाख रुपये हैं और परिवार को परेशान न किया जाए। अंत में पत्नी और बच्चों से माफी मांगते हुए लिखा-मैं सबसे बड़ा गुनहगार हूं, आप लोग मुझे माफ कर दीजिए।