शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने आत्महत्या से पहले चार पन्नों का मार्मिक सुसाइड नोट लिखकर पूरे घटनाक्रम का जिक्र किया है। यह पत्र उन्होंने मुख्यमंत्री योगी को संबोधित लिखा है। पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि देवरिया के बीएसए कार्यालय के बाबू और अन्य अधिकारियों ने उनसे और दो अन्य शिक्षकों से कुल 48 लाख रुपये लिए। इसके बाद भी न तो उन्हें नौकरी मिली और न ही उनके रुपये वापस किए गए। उनका अपमान किया जाता रहा।
सुसाइड नोट के अनुसार, कृष्ण मोहन सिंह अपने दो अन्य साथियों के साथ कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में कार्यरत थे। वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद सात शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद से वे लोग इलाहाबाद हाईकोर्ट में केस लड़ रहे थे।
कृष्ण मोहन ने लिखा कि जब वर्तमान बीएसए कार्यालय में संपर्क किया गया तो तीनों से 20-20 लाख रुपये की मांग की गई। बाद में पूर्व प्रधानाध्यापक के माध्यम से 16-16 लाख रुपये में मामला सेट करने की बात तय हुई। विज्ञापन निकलवाने के नाम पर भी 50 हजार रुपये अलग से लिए गए।
पत्र में उल्लेख है कि 27 जुलाई को पहली किस्त के रूप में 7-7 लाख रुपये बीएसए कार्यालय के पास पौधशाला के सामने दिए गए। बाद में अगस्त में फिर एक-एक लाख रुपये और मांगे गए।
रकम जुटाने के लिए एक शिक्षक ने अपनी जमीन रेहन रखी, बाद में उन्हें पत्नी के गहने गिरवी रखने पड़े। कृष्ण मोहन ने भी 17 नवंबर को एसबीआई पादरी बाजार शाखा में पत्नी के गहने गिरवी रखकर 4.24 लाख रुपये जुटाए और रिश्तेदारों से उधार लेकर सात लाख रुपये दिए।
उन्होंने लिखा कि शिक्षा विभाग में तैनात बाबू केवल रविवार को ही पैसे लेते थे ताकि पकड़े न जाएं। बाद में उन्हें पता चला कि विद्यालय में पद ही नहीं है और वे लोग ठगी का शिकार हो चुके हैं। कर्ज का बोझ बढ़ता गया और अपमान झेलना पड़ा।
मैं मरना नहीं चाहता, लेकिन मुझे मजबूर किया गया
सुसाइड नोट में कृष्ण मोहन ने लिखा- मैं कर्ज के बोझ से दब चुका हूं। मेरे बच्चों और पत्नी का क्या होगा, यह सोचकर रूह कांप जाती है। मैं मरना नहीं चाहता, लेकिन मुझे मजबूर किया गया। उन्होंने अपनी मौत के लिए बीएसए कार्यालय के बाबू और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया तथा पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की।
उन्होंने यह भी लिखा कि उनकी बेटी आस्था के नाम सुकन्या खाते में चार लाख रुपये हैं और परिवार को परेशान न किया जाए। अंत में पत्नी और बच्चों से माफी मांगते हुए लिखा-मैं सबसे बड़ा गुनहगार हूं, आप लोग मुझे माफ कर दीजिए।