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Exclusive: 'अंदाजा नहीं था कि ‘एसके सर’ इतना बड़ा चेहरा बनेगा', ‘एस्पिरेंट्स’ की सफलता पर बोले अभिलाष थपलियाल

सार

Abhilash Thapliyal Exclusive Interview: हाल ही में वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ का तीसरा सीजन रिलीज हुआ है। इसमें एसके सर की भूमिका अदा करने वाले एक्टर अभिलाष थपलियाल ने कई दिलचल्प बातें साझा की हैं। पढ़िए कुछ अंश
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अभिलाष थपलियाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लॉकडाउन के दौरान आई सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ ने पहले ही सीजन से ऑडियंस के बीच जबरदस्त पहचान बना ली थी। ‘एसके सर’ का किरदार आज भी लोगों के बीच काफी पॉपुलर है। ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में ‘श्वेतकेतु’ यानी अभिलाष थपलियाल ने बताया कि ‘एस्पिरेंट्स’ की सफलता के बाद अब कलाकारों की अपनी-अपनी वैनिटी वैन हो गई है। बातचीत में उन्होंने तापसी पन्नू, अनुराग कश्यप, रेडियो और अपने सफर को लेकर भी कई दिलचस्प बातें साझा कीं। पढ़िए बातचीत के कुछ प्रमुख अंश:

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‘एस्पिरेंट्स’ - फोटो : इंस्टाग्राम
‘मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि ‘एसके सर’ इतना बड़ा हो जाएगा’
जब हम एस्पिरेंट्स का पहला सीजन कर रहे थे, तब मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि ‘एसके सर’ इतना बड़ा चेहरा बन जाएगा। बस इतना पता था कि कहानी बहुत अच्छी है और UPSC की दुनिया पर आधारित है। उस समय यह बिल्कुल नहीं लगा था कि यह सीरीज लोगों के बीच इतनी गहराई से जुड़ जाएगी। हमें तो यह भी नहीं पता था कि शो किस प्लेटफॉर्म पर आएगा। बाद में यह यूट्यूब पर रिलीज हुआ और लॉकडाउन के दौरान लोगों ने इसे खूब देखा। शायद यही वजह रही कि एस्पिरेंट्स धीरे-धीरे लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गया। आज भी एयरपोर्ट, कॉलेज या कहीं भी जाऊं, लोग मुझे ‘एसके सर’ कहकर बुलाते हैं।

‘मैं जमीन पर नागिन डांस कर रहा था... और एक सेकंड को लगा कि मैं फिट नहीं हूं’
पहले दिन सेट पर माहौल बहुत हल्का-फुल्का था। मैं तो मस्ती में जमीन पर नागिन डांस कर रहा था और सब हंस रहे थे। लेकिन उसी बीच एक ऐसा मजेदार और थोड़ा टफ मोमेंट भी आया, जो आज भी याद है। नवीन (को स्टार नवीन कस्तूरिया) ने मजाक-मजाक में डायरेक्टर से कहा, 'ये एसके लग नहीं रहा, किसी और को ट्राय करो।' अब वो मजाक था, लेकिन एक पल के लिए मुझे सच में लगा कि यार, कहीं मैं फिट तो नहीं बैठ रहा? ऐसे मोमेंट्स आपको और मेहनत करने के लिए धक्का देते हैं। बाद में वही किरदार लोगों को इतना पसंद आया कि आज सब मुझे ‘एसके सर’ के नाम से जानते हैं। मेरे लिए सबसे बड़ा चैलेंज था अपनी भाषा और लहजे पर काम करना। मुझे एक ऐसे लड़के को निभाना था जो बिहार से है, लेकिन दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहा है। उसमें बैलेंस बनाना था कि वो पूरी तरह देहाती भी न लगे और पूरी तरह शहरी भी नहीं। हमने इस पर काफी मेहनत की।

अभिलाष थपलियाल - फोटो : इंस्टाग्राम
‘करण जौहर ने ‘must watch’ कहा, आयुष्मान खुराणा का मैसेज आया… तब लगा कुछ बड़ा हुआ है’
जब लोग कहते हैं कि कोई शो फट गया, तो एस्पिरेंट्स के साथ सच में वैसा ही हुआ था। सीरीज 1 के वक्त ..हर हफ्ते नया एपिसोड आता था और उसके साथ इसके नंबर भी बढ़ते जाते थे। लोग इसे देख रहे थे, शेयर कर रहे थे और इसकी खूब चर्चा हो रही थी। वहीं से हमें भी लगने लगा था कि कुछ बड़ा हो रहा है। धीरे-धीरे इंडस्ट्री से भी रिएक्शन आने शुरू हुए। मेरे पास कई लोगों के मैसेज और कॉल्स आए। मुकेश छाबड़ा, अभिषेक बनर्जी जैसे कास्टिंग डायरेक्टर्स ने फोन करके बधाई दी और कहा कि काम बहुत अच्छा लगा। 
मुझे एक बात बहुत अच्छे से याद है। सीरीज रिलीज से पहले ही तापसी पन्नू ने उसका पहला प्रोमो सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया था। वह शायद पहली कलाकारों में थीं, जिन्हें लगा था कि शो में कुछ बात है। शो रिलीज होने के बाद आयुष्मान खुराना समेत कई लोगों ने काम की तारीफ की। करण जौहर ने भी सोशल मीडिया पर पोस्टर शेयर करते हुए इसे ‘must watch’ कहा। तभी पहली बार लगा कि ये अब सिर्फ वेब सीरीज नहीं रही, इंडस्ट्री भी उसे गंभीरता से लेने लगी है।

अभिलाष थपलियाल - फोटो : इंस्टाग्राम
‘सबसे बड़ा बदलाव बस इतना आया कि अब सबकी अपनी-अपनी वैनिटी वैन है’
एस्पिरेंट्स की कामयाबी के बाद अगर कोई सबसे बड़ा बदलाव आया, तो वह यही था कि अब सबकी अपनी-अपनी वैनिटी वैन हो गई है। पहले ऐसा नहीं था। पहले हम तीनों एक ही वैनिटी शेयर करते थे। दरअसल, वह एक बस जैसी होती थी, जिसमें छोटे-छोटे तीन कंपार्टमेंट होते थे। लेकिन हम लोग अपने-अपने दरवाजे खोलकर उसे पूरी तरह अपना अड्डा बना लेते थे। वहीं बैठना, बातें करना, हंसी-मजाक, सब कुछ वहीं होता था। अब सुविधा बढ़ गई है और सबके पास अपनी-अपनी वैनिटी है, तो यह एक बड़ा बदलाव जरूर है। लेकिन जहां तक काम और आपसी रिश्तों की बात है, वहां कुछ नहीं बदला। आज भी हम लोग उसी प्यार, उसी पैशन और उसी जोश के साथ काम करते हैं।

अभिलाष थपलियाल-तापसी पन्नू व अन्य - फोटो : इंस्टाग्राम
तापसी बहुत पुरानी दोस्त है… लेकिन ..'
तापसी का सपोर्ट मेरे लिए अलग इसलिए था, क्योंकि वो मेरी बहुत पुरानी दोस्त है। हम दोनों जब मुंबई में नए थे, तब से एक-दूसरे को जानते हैं। लेकिन दोस्ती से हटकर भी, एक कलाकार के तौर पर मैं उन्हें बहुत मानता हूं। उन्होंने हमेशा अलग और दमदार काम चुना है। ऑफ स्क्रीन भी वो वैसी ही हैं। बहुत साफ, बहुत सीधी। इंडस्ट्री में अगर मेरे करीबी दोस्तों की बात होगी, तो तापसी उनमें जरूर होंगी। मुझे पता है कि अगर मैं कभी उलझूं, तो वो मुझे घुमा-फिराकर नहीं, सीधी बात ही कहेंगी।

अभिलाष थपलियाल-तापसी पन्नू व अन्य - फोटो : इंस्टाग्राम
‘पहली मुलाकात में ही मैंने कह दिया था कि मैं फिल्म छोड़ देता हूं’
तापसी पन्नू के साथ मेरी पहली ठीक-ठाक मुलाकात भी किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी। यह 'दिल जंगली' की शूटिंग के दौरान हुआ, जब हम लंदन में थे। उस वक्त मैं नया था, छोटे-छोटे काम कर रहा था, रेडियो और स्केचेज की दुनिया से आ रहा था। तापसी उस फिल्म में भी अपने किरदार को लेकर बहुत सीरियस थीं। वह उन एक्टर्स में से हैं जो अपने रोल के लिए जो भी करना पड़े, वह करती हैं। उस फिल्म के लिए उन्होंने अपने लंबे बाल कटवा लिए थे। अब हुआ ये कि एक दिन वह सामने आईं और अचानक मुझसे पूछने लगीं, ‘तुमने देखा? मैंने बाल कटवा लिए, कुछ बोलोगे नहीं?’ और फिर न जाने कैसे बात मजाक से बहस में बदल गई। वह मुझे डांटने लगीं, मैं भी पलटकर जवाब देने लगा। कुछ ही देर में हम दोनों एक-दूसरे पर ऊंची आवाज में बात कर रहे थे।
मैं भी उस समय नया था और थोड़ा अक्खड़पन भी था, तो मैंने भी गुस्से में कह दिया, ‘मैं फिल्म छोड़ देता हूं, मैं ये सब नहीं सुनूंगा।’ हालांकि 2-3 दिन बाद सब ठीक हो गया। अब सोचता हूं तो हंसी आती है कि पहली मुलाकात में ही माहौल इतना गरम हो गया था। आज हालत ये है कि इंडस्ट्री में अगर मेरी सबसे करीबी दोस्तों में किसी का नाम लेना हो, तो तापसी उनमें जरूर होंगी।

अभिलाष थपलियाल - फोटो : इंस्टाग्राम
‘फौज में जाना था, पहला फॉर्म ही रिजेक्ट हो गया’
मुझे तो फौज में जाना था। लेकिन नेशनल डिफेंस एकेडमी का जो पहला फॉर्म था, वही रिजेक्ट हो गया। अब जब पहला सपना ही टूट गया, तो फिर सोचना पड़ा कि अब क्या किया जाए। उसी दौरान रेडियो का एक ऑप्शन सामने आया और मैंने रेडियो करना शुरू कर दिया।
लेकिन मेरे पापा हमेशा बहुत सपोर्टिव रहे। मुझे लगता है कि अगर मां-बाप आपको बस यह करने दें कि जो आप करना चाहते हैं, वो कर लो, तो उससे खूबसूरत चीज कुछ नहीं हो सकती। अगर पैरेंट्स का सपोर्ट मिल जाए, तो जिंदगी बहुत आसान हो जाती है।
हम लोग दिल्ली में बहुत छोटे से घर में रहते थे। वहीं से मुझे डेढ़-दो घंटे दूर रेडियो सिटी जाना होता था। उससे पहले मैं हिसार भी रेडियो करने जाया करता था। फौजी बैकग्राउंड होने की वजह से डिसिप्लिन और डेडिकेशन मेरे अंदर पहले से था, तो उस सफर में उसने बहुत मदद की। फिर शादी हुई, मुंबई आए, एक्टिंग शुरू हुई, लेकिन हर जगह घरवालों का रवैया यही रहा कि जो कर रहा है, ठीक से कर, लेकिन कर वही जो करना चाहता है।

‘मुझे भी लंबे समय तक ‘हीरो के दोस्त’ वाले रोल मिलते रहे’
हमारी इंडस्ट्री की एक दिक्कत ये है कि वो बहुत जल्दी आपको एक खाने में डाल देती है। ये हीरो है, ये हीरो का दोस्त है, ये विलेन है, ये अमीर है, ये गरीब है… बस फिर उसी हिसाब से रोल आने लगते हैं। मेरे साथ भी ऐसा हुआ। शुरुआत में मुझे भी अक्सर ‘हीरो के दोस्त’ वाले रोल मिलते थे। दिक्कत रोल से नहीं होती, दिक्कत तब होती है जब लोग मान लेते हैं कि तुम बस इतना ही कर सकते हो। फिर धीरे-धीरे आपको खुद ही समझाना पड़ता है कि नहीं, मैं इससे ज्यादा भी कर सकता हूं। असली लड़ाई वहीं से शुरू होती है। क्योंकि लोग आपको जिस नजर से देखते हैं, जरूरी नहीं कि आप सच में वही हो। हम एक्टर्स को भी तारीफ अच्छी लगती है। किसी ने कह दिया अच्छा काम किया, अवॉर्ड मिल गया, तो अच्छा लगता है। लेकिन एक समय के बाद आपको खुद समझ आ जाता है कि आपकी असली ताकत क्या है… और वहीं से चीजें बदलनी शुरू होती हैं।
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अभिलाष थपलियाल - फोटो : इंस्टाग्राम
'कैनेडी पूरी तरह अनुराग कश्यप की फिल्म है’
कान फिल्म फेस्टिवल से रिलीज तक पहुंचने में करीब तीन साल लग गए। बीच में तो मुझे खुद लगने लगा था कि पता नहीं ये फिल्म आएगी भी या नहीं। लोग पूछते रहते थे, ‘क्या हो रहा है कैनेडी का?’ और मेरे पास भी कोई साफ जवाब नहीं होता था। लेकिन कान का वो पल आज भी याद है। रेड कार्पेट, फिल्म की स्क्रीनिंग और उसके बाद साढ़े सात मिनट तक तालियां… वो सब किसी सपने जैसा था। मुझे हमेशा लगा कि 'कैनेडी' पूरी तरह अनुराग कश्यप की फिल्म है। जिस तरह का उनका अपने सिनेमा पर भरोसा है, जिस तरह वो अपनी फिल्म के साथ खड़े रहते हैं, वो इस पूरी यात्रा में साफ दिखा। उन्होंने इसे बनाया, दुनिया के सामने ले गए और आखिर तक इसके साथ डटे रहे। बीच में मुझे भी लगा था कि शायद फिल्म नहीं आएगी। लेकिन अब जब रिलीज हुई, तो बस यही लगा, देर से आई, लेकिन दुरुस्त आई।
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