‘जैसे किसी पुराने किरदार में दोबारा जाना’
रसिका कहती हैं, ‘मेरे लिए बीना में वापस जाना ऐसा था जैसे किसी ऐसे व्यक्ति के दिमाग में दोबारा जाना, जिसके साथ मैं कई वर्षों से रह रही हूं। आप किसी किरदार के साथ इतने लंबे समय तक रहते हैं तो उसके बारे में बहुत कुछ आपके भीतर जमा हो जाता है। लेकिन फिर भी जब आप उसे दोबारा निभाते हैं तो उसके कुछ नए पहलू सामने आते हैं। इस बार भी मेरे लिए ऐसा ही था।’
बीना की ताकत उसके अधिकार हैं
बीना को लेकर वह कहती हैं, ‘वह हमेशा से समझती रही है कि ताकत सिर्फ शारीरिक शक्ति या अधिकार से नहीं आती। धैर्य, समझदारी, सही समय का इंतजार करने की क्षमता भी ताकत है। सबसे जरूरी बात यह है कि वह जानती है कि उसे खुद को कैसे बचाए रखना है। ये चीजें उसके व्यक्तित्व का हिस्सा हैं।’
'फिल्म में दांव पहले से बड़े हैं’
फिल्म में कहानी के साथ किरदारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर रसिका कहती हैं, ‘फिल्म में दांव पहले से बड़े हैं। हर किरदार को ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जिनके नतीजे भी पहले से कहीं ज्यादा दूर तक जाते हैं। इस दुनिया की खास बात यह है कि बड़े पैमाने पर होने के बावजूद यह अपने किरदारों के इमोशंस से जुड़ी रहती है। मुझे लगता है कि मेरा किरदार ही इस पूरी कहानी को और दिलचस्प बनाता है।’
‘सिर्फ एक्शन नहीं, ड्रामा भी गहरा’
‘मिर्जापुर’ के सीरीज से फिल्म तक जाने के सफर पर पर रसिका कहती हैं, ‘सिनेमा में चीजों को और आगे ले जाने की गुंजाइश होती है। इस फिल्म में एक्शन बड़ा है, लेकिन मेरे लिए सिर्फ एक्शन का बड़ा होना ही महत्वपूर्ण नहीं है। ड्रामा ज्यादा तीखा है, किरदारों के बीच के टकराव ज्यादा गहरे हैं और बदले की भावना भी कहानी में एक अलग स्तर पर पहुंचती है। जब आप इन किरदारों को बड़े पर्दे पर देखते हैं तो हर चीज ज्यादा करीब और ज्यादा प्रभावशाली महसूस होती है।’
‘थिएटर में हर ट्विस्ट का असर अलग होता है’
ओटीटी और थिएटर के अनुभव में फर्क बताते हुए रसिका कहती हैं, ‘हम इतने वर्षों से इन किरदारों के साथ एक इमोशनल रिश्ता बना चुके हैं। अब वही भावनाएं बड़े पर्दे पर सामने आएंगी। जब आप थिएटर में किसी किरदार को देखते हैं और आपके आसपास बैठे लोग भी उसी पल को महसूस कर रहे होते हैं, तो उसका अनुभव अलग होता है। स्ट्रीमिंग पर दर्शक अपने तरीके से कहानी के साथ जुड़ते हैं, लेकिन थिएटर में आप वही अनुभव बहुत सारे लोगों के साथ साझा करते हैं।’