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आरबीएसई: अब साल में दो बार होगी राजस्थान बोर्ड 10वीं की परीक्षा; लागू होगा बेस्ट ऑफ टू नियम, जानें पूरा विवरण

Thu, 08 Oct 2026 08:28 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

राजस्थान बोर्ड 10वीं की परीक्षा अब साल में दो बार आयोजित करेगा। सत्र 2026-27 से सप्लीमेंट्री परीक्षा खत्म होगी। मई-जून की दूसरी परीक्षा में छात्र अधिकतम 3 विषयों में अंक सुधार या पास होने का मौका पा सकेंगे।
 
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RBSE Class 10 Exams Twice a Year - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स (Adobe Stock)
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विस्तार
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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) ने कक्षा 10वीं की परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब 10वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी। बोर्ड सचिव की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का तनाव कम करना और उन्हें अंक सुधारने के साथ उसी शैक्षणिक सत्र में अपनी कक्षा बचाने का अतिरिक्त मौका देना है।

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पहली और दूसरी परीक्षा कब होगी?

नई व्यवस्था के तहत 10वीं की दोनों परीक्षाओं का आयोजन अलग-अलग समय पर किया जाएगा।
  • पहली मुख्य परीक्षा: फरवरी-मार्च
  • दूसरी परीक्षा: मई-जून

पहली मुख्य परीक्षा में सभी पंजीकृत नियमित और निजी विद्यार्थियों को शामिल होना अनिवार्य होगा। यह परीक्षा पूरे 100 प्रतिशत पाठ्यक्रम के आधार पर होगी।

दूसरी परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए अवसर होगी, जो पहली परीक्षा के परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं या नियमों के तहत किसी विषय में असफल हुए हैं।

क्या अब सप्लीमेंट्री परीक्षा नहीं होगी?

  • सत्र 2026-27 से राजस्थान बोर्ड ने सप्लीमेंट्री परीक्षा की व्यवस्था खत्म कर दी है।
  • अब सप्लीमेंट्री परीक्षा की जगह मई-जून में दूसरी परीक्षा आयोजित की जाएगी।
  • इसी परीक्षा के जरिए पात्र विद्यार्थियों को अंक सुधारने और कुछ परिस्थितियों में उसी सत्र में उत्तीर्ण होने का अवसर मिलेगा।

कितने विषयों में अंक सुधार सकते हैं?

मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थी अधिकतम 3 विषयों में अंक सुधार के लिए दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अंक सुधार के लिए उपलब्ध विषयों में हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, व्यावसायिक शिक्षा और संस्कृत/तीसरी भाषा शामिल हैं। हालांकि, विद्यार्थी दूसरी परीक्षा में विषय बदल नहीं सकेंगे।

अंतिम अंक किस परीक्षा के आधार पर तय होंगे?

नई व्यवस्था में दोनों परीक्षाओं में से जिस परीक्षा में ज्यादा अंक मिलेंगे, वही अंक अंतिम अंकतालिका में शामिल किए जाएंगे। इसका मतलब है कि अगर किसी विद्यार्थी के दूसरी परीक्षा में अंक पहली परीक्षा से ज्यादा आते हैं, तो बेहतर अंक को अंतिम परिणाम में लिया जाएगा। वहीं, अगर पहली परीक्षा के अंक ज्यादा हैं, तो उन्हीं अंकों को बरकरार रखा जाएगा।

दो विषयों में फेल होने वाले छात्रों को क्या मौका मिलेगा?

आधिकारिक आदेश के अनुसार, मुख्य परीक्षा में अधिकतम दो विषयों में 33 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले या एक विषय में अनुपस्थित और एक विषय में 33 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को उन विषयों में मई में होने वाली सुधारात्मक परीक्षा में प्रवेश लेना अनिवार्य होगा। इसे ईआई यानी आवश्यक सुधार के रूप में चिह्नित किया जाएगा।

तीन या उससे ज्यादा विषयों में फेल होने पर क्या होगा?

अगर कोई विद्यार्थी 3 या उससे अधिक विषयों में असफल या अनुपस्थित रहता है, तो उसे दूसरी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलेगी। ऐसे विद्यार्थियों को अगले वर्ष सभी विषयों की परीक्षा दोबारा देनी होगी।
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बेस्ट ऑफ टू नियम कैसे काम करेगा?

नई व्यवस्था को आसान भाषा में समझें तो विद्यार्थी को दो परीक्षा अवसरों में बेहतर प्रदर्शन का लाभ मिलेगा। अगर कोई विद्यार्थी पहली मुख्य परीक्षा में पास है, लेकिन अपने अंकों से संतुष्ट नहीं है, तो वह अधिकतम 3 विषयों में दूसरी परीक्षा देकर अंक सुधार सकता है। दोनों परीक्षाओं में जिस प्रयास में ज्यादा अंक होंगे, उन्हें अंतिम अंकतालिका में शामिल किया जाएगा।

वहीं, नियमों के तहत मुख्य परीक्षा में असफल होने वाले विद्यार्थियों को दूसरी परीक्षा के जरिए उसी सत्र में पास होने का मौका मिलेगा। हालांकि, दूसरी परीक्षा में भी सफल नहीं होने पर उन्हें अगले शैक्षणिक वर्ष में दोबारा परीक्षा देनी होगी।
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