पुलिस ने मौके से 22 जुआरियों को पकड़ा
सूचना पर निरीक्षक गौरव चौधरी के नेतृत्व में टीम ने छापा मारकर मौके से 22 जुआरियों को पकड़ा। उनके पास से 6.29 लाख रुपये बरामद हुए और गिराेह के बारे में पता चला।नेटवर्क में अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थी। कोई डेटा एंट्री करता था तो कोई पैसों का हिसाब और लेन-देन संभालता था। कुछ आरोपी सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने, कलेक्शन और व्हाट्सएप के जरिए सट्टे की जानकारी आगे पहुंचाने का काम करते थे।
मास्टरमाइंड और अड्डे का संचालक गिरफ्तार
पुलिस ने 12 अगस्त को मुख्य संचालक रंजीत और परिसर मुहैया कराने वाले रमेश कुमार को गिरफ्तार किया। इसके बाद 18 अगस्त को चार अन्य आरोपियों डेटा एंट्री ऑपरेटर प्रमोद कुमार, फंड हैंडलर विपिन कुमार जैन, सॉफ्टवेयर डिप्लॉयर खेमचंद उर्फ मोनू और जंत्री सट्टा सॉफ्टवेयर बनाने वाला राहुल दिलवालिया को गिरफ्तार किया। इनके कब्जे से पांच लैपटॉप और पांच स्मार्टफोन बरामद हुए।
गली दिसावर से दिल्ली बाजार तक कनेक्शन
पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच में पता चला कि सट्टा नेटवर्क के तार गली दिसावर, फरीदाबाद, गाजियाबाद और दिल्ली बाजार से जुड़े हुए हैं। 20 अगस्त को पुलिस ने अमित, राहुल कुमार और नानक साहू को पकड़ा। नानक साहू के ठिकाने से पुलिस ने 2.62 लाख रुपये, एक लैपटॉप, तीन महंगे फोन और स्कूटी बरामद की।