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Sreesanth: 27 दिन तिहाड़ में...देशभर में बदनामी; आखिर कैसे संभले एस श्रीसंत? कहा- भुवनेश्वरी ने बचाई मेरी जान

Fri, 19 Jun 2026 02:11 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दो विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे एस. श्रीसंत ने अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर को याद करते हुए बड़ा खुलासा किया है। 2013 के स्पॉट फिक्सिंग मामले में गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में बिताए 27 दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी भुवनेश्वरी देवी ही वह वजह थीं, जिनकी वजह से उन्होंने हार नहीं मानी। श्रीसंत ने बताया कि उस दौर में पूरा देश उन्हें खलनायक की तरह देख रहा था, लेकिन पत्नी और परिवार उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे।
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श्रीसंत और युवराज सिंह - फोटो : Social Media
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विस्तार
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भारत को 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप जिताने वाली टीम का हिस्सा रहे पूर्व तेज गेंदबाज एस श्रीसंत ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को लेकर भावुक खुलासा किया है। 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में गिरफ्तारी और तिहाड़ जेल में बिताए दिनों को याद करते हुए श्रीसंत ने कहा कि उनकी पत्नी भुवनेश्वरी देवी ने उन्हें मानसिक रूप से टूटने से बचाया।
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2013 का वह विवाद जिसने बदल दी जिंदगी
आईपीएल 2013 में स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों के बाद श्रीसंत को राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ियों अजीत चांडीला और अंकित चव्हाण के साथ गिरफ्तार किया गया था। उन्हें दिल्ली पुलिस की हिरासत और फिर तिहाड़ जेल में रहना पड़ा। हालांकि 2015 में अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन उससे पहले उनका जीवन पूरी तरह बदल चुका था।

'अगर वह नहीं होतीं तो शायद मैं जिंदा नहीं रहता'
एक इंटरव्यू में श्रीसंत ने अपनी पत्नी भुवनेश्वरी देवी के बारे में बात करते हुए बेहद भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा, 'जब मैं उस दौर से गुजर रहा था, तब मेरे खुद को खत्म न करने की सबसे बड़ी वजह वही थीं। मैंने उनसे 2010 में वादा किया था कि अगर हम 2011 विश्व कप जीतेंगे तो मैं उनसे शादी करूंगा। 2007 में जब वह 10वीं कक्षा में थीं, तभी हमारी मुलाकात हुई थी और 2013 तक हम लगातार संपर्क में रहे। वही सबसे बड़ी वजह थीं कि मुझे जमानत मिली और मैं मजबूत बना रहा।'

कैसे शुरू हुई प्रेम कहानी?
श्रीसंत ने बताया कि उनकी और भुवनेश्वरी की पहली मुलाकात 2007 में एक स्कूल कार्यक्रम के दौरान हुई थी। इसके बाद अलग-अलग मौकों पर मुलाकातें होती रहीं और दोनों के बीच रिश्ता मजबूत होता गया। आखिरकार 2013 में जमानत मिलने के बाद दोनों ने सगाई की और उसी साल शादी भी कर ली।

'27 दिन तिहाड़ में रहकर जिंदगी को नए नजरिए से देखा'
पूर्व भारतीय गेंदबाज ने बताया कि जेल के दिनों ने उन्हें जिंदगी की असली कठिनाइयों का एहसास कराया।उन्होंने कहा, 'दिल्ली पुलिस की हिरासत में बिताए 12 दिन और तिहाड़ जेल के 27 दिन ने मुझे यह समझाया कि आम जिंदगी में आने वाली परेशानियां कुछ भी नहीं हैं। वहां मैंने देखा कि लोग वर्षों तक मुकदमों का इंतजार करते रहते हैं। उस घटना ने मुझे मानसिक रूप से और मजबूत बनाया।'

परिवार भी था चिंता की वजह
श्रीसंत ने बताया कि उस समय उन्हें अपने माता-पिता और परिवार की सबसे ज्यादा चिंता थी। मीडिया में लगातार नाम आने से परिवार पर भी भारी दबाव था। उन्होंने कहा, 'उस समय मैं अपनी मां, पिता, भतीजे और भतीजी के बारे में सोचता रहता था। मैंने उन्हें स्कूल तक नहीं जाने दिया था। लगभग एक महीने तक पूरे देश का ध्यान सिर्फ मुझ पर था।'
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खलनायक बना दिया गया था
श्रीसंत के मुताबिक, उस दौर में उन्हें देशभर में खलनायक की तरह पेश किया जा रहा था। लेकिन उनकी पत्नी और ससुराल वालों ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा। यही समर्थन उन्हें मुश्किल हालात से बाहर निकालने में सबसे बड़ी ताकत बना। विश्व कप विजेता खिलाड़ी की यह कहानी बताती है कि मैदान पर सफलता हासिल करने वाले खिलाड़ी भी निजी जिंदगी में कितने बड़े संघर्षों से गुजरते हैं और कई बार परिवार का साथ ही उन्हें टूटने से बचाता है।
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