केवल FASTag से होगी सेस कटौती
ग्रीन सेस की वसूली सिर्फ FASTag (फास्टैग) के जरिए की जाएगी। अगर फास्टैग में बैलेंस कम हुआ, तो ड्राइवर को चालान भी मिल सकता है।
इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए परिवहन विभाग ने हरिद्वार के प्रमुख बॉर्डर पॉइंट्स, जैसे भगवानपुर, नारसन और चिडियापुर, पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगा दिए हैं।
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कैमरे खुद नंबर पढ़कर FASTag से राशि काटेंगे
ये कैमरे वाहन के नंबर को अपने-आप स्कैन करेंगे और फास्टैग से ग्रीन सेस कट जाएगा। कैमरों को सॉफ्टवेयर सिस्टम से जोड़ने का काम चल रहा है। पूरी तरह एक्टिव होने के बाद यह सिस्टम गाड़ियों को बिना रुके आगे बढ़ने देगा, जिससे यात्रा और तेज तथा आरामदायक हो जाएगी।
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हर दिन 80,000 से 1 लाख वाहन करते हैं उत्तराखंड में प्रवेश
बहादराबाद टोल के आंकड़ों के अनुसार, यात्रा सीजन के दौरान 80,000 से 1 लाख वाहन रोजाना उत्तराखंड में प्रवेश करते हैं। इनमें से लगभग 30,000 गाड़ियां चिडियापुर बॉर्डर से ही गुजरती हैं। ग्रीन सेस लागू होने से अब उतनी गाड़ियां पर्यावरण संरक्षण के लिए अतिरिक्त शुल्क देंगी।
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सभी बॉर्डर पॉइंट्स पर तैयारियां पूरी
हरिद्वार परिवहन विभाग ने नए सिस्टम के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा ने बताया कि सभी प्रवेश बिंदुओं पर ANPR कैमरे लगा दिए गए हैं और कोशिश है कि यात्रियों को सेस भुगतान में कोई दिक्कत न आए।
ग्रीन सेस शुल्क
- कारें: ₹80
- बसें: ₹140
- डिलीवरी वैन: ₹250
- ट्रक: ₹120 से ₹700 (आकार के अनुसार)
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राजस्व बढ़ेगा, प्रदूषण भी कम होगा
ग्रीन सेस से राज्य में अच्छा राजस्व मिलने की उम्मीद है। साथ ही बड़ी संख्या में आने वाली गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलेगी।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि फास्टैग पहले से रिचार्ज रखें, ताकि कोई चालान या देरी न हो। सरकार का लक्ष्य है कि यह सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक और परेशानी-रहित रहे, जिससे पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आसानी हो और पर्यावरण को भी फायदा मिले।
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