कौन होगा अगला सर्वोच्च नेता?: खामेनेई की मौत के बाद अब किसके हाथ में होगी ईरान की कमान? ये हैं पांच दावेदार
अमेरिका और इस्राइल के हवाई हमलों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई है। इस हमले ने ईरान में राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक तनाव बढ़ा दिया है। अब दुनिया की नजर ईरान के अगले नेतृत्व पर है।
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विस्तार
अमेरिका और इस्राइल की ईरान के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो चुकी है। ऐसे में एक नया सवाल खड़ा हो गया है कि ईरान का अगला सुप्रीम लीडर कौन होगा? हमलों के तुरंत बाद वैश्विक ध्यान ईरान के अंदरूनी शक्ति संतुलन और उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया की ओर मुड़ गया है।
ईरान में सुप्रीम लीडर की चुनने की प्रक्रिया
ईरान के 80-सदस्यीय विशेषज्ञों की सभा (Assembly of Experts) नए सुप्रीम लीडर का चयन करती है। इस परिषद के पास किसी सुप्रीम लीडर को हटाने का अधिकार भी है, हालांकि अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ। यह परिषद पूरी तरह से शिया धर्मगुरुओं से बनी होती है, जिन्हें हर आठ साल में आम चुनाव के जरिए चुना जाता है और उनके नामांकन को गार्डियन काउंसिल (Guardian Council) द्वारा अनुमोदित किया जाता है। गार्डियन काउंसिल अक्सर उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित कर देती है।
अस्थायी नेतृत्व परिषद अस्थायी रूप से संभाल सकती है जिम्मेदारी
ईरानी कानून के अनुसार, विशेषज्ञों की सभा को जितनी जल्दी संभव हो नया सुप्रीम लीडर चुनना चाहिए। लेकिन अगर इसमें देरी होती है, तो अस्थायी नेतृत्व परिषद सभी नेतृत्व कार्यों को संभाल सकती है। यह परिषद ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और गार्डियन काउंसिल के एक सदस्य से बनी होती है, जिसे एक्सपेडियेंसी काउंसिल (Expediency Council) चुनती है। अगर ऐसा अब होता है, तो सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और सख्त रुख वाले न्यायपालिका प्रमुख घोलामहुसैन मोसेनी एजई इस परिषद में शामिल होंगे।
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संभावित उत्तराधिकारी के दावेदार
- मोजतबा खामनेई: ईरान इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अगले सर्वोच्च नेता के लिए मोजतबा खामनेई की दावेदारी सबसे मजबूत है। मोजतबा मौजूदा सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के दूसरे बेटे हैं और राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा सक्रिय हैं। मोजतबा खामनेई का जन्म साल 1969 में ईरान के मशहद में हुआ था। ईरान की सरकार में मोजतबा खामेनेई का गहरा प्रभाव है और कहा जाता है कि ईरान की खुफिया और सशस्त्र सेनाओं में भी मोजतबा खामनेई के करीबी शामिल हैं। मोजतबा ईरान-इराक में हुए युद्ध में भी भाग ले चुके हैं। उन्होंने धार्मिक शिक्षा हासिल की है और वे इस्लामिक मामलों के जानकार हैं, लेकिन उनकी गिनती शीर्ष स्तर के धर्मगुरुओं में नहीं होती है। मोजतबा साल 1990 से ईरान की राजनीति में पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं। 2005 तक लोगों की नजर से दूर रहे मोजतबा की मोहम्मद अहमदिनेजाद को ईरान का राष्ट्रपति बनाने में अहम भूमिका रही थी। हालांकि, बाद में दोनों में विवाद हो गया और अहमदीनेजाद ने मोजतबा पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
- अलीरेजा अराफी: सुप्रीम लीडर पद के दूसरे बड़े दावेदार अलीरेजा अराफी हैं। अराफी लंबे समय से अयातुल्ला खामनेई के करीबी रहे हैं। वे खुद सर्वोच्च नेता चुनने वाली विशेषज्ञ सभा का हिस्सा रहे हैं। वे उम्मीदवारों की छंटनी करने वाली गार्डियन काउंसिल में भी उन्होंने लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं। बताया जाता है कि अराफी तकनीकी तौर पर भी काफी आगे हैं और धर्मगुरुओं से नई तकनीक को अपनाने की वकालत करते रहे हैं। अराफी का तर्क है कि इसके जरिए ही धार्मिक संस्थानों को सदियों पुराने अलग-थलग हो चुके रिवाजों से बाहर निकाला जा सकेगा। हालांकि, वे खामनेई की इस्लामिक विचारधारा के पैरोकार रहे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई जहां काले रंग का साफा सिर पर बांधते हैं वहीं, अराफी सफेद साफा बांधते हैं। माना जाता है कि काला साफा मुख्यतः सैयद पहनते हैं, जो कि खुद को पैगंबर मोहम्मद और शियाओं के पहले इमाम- इमाम अली का वंशज मानते हैं। ऐसे में अराफी के सुप्रीम लीडर बनने की राह में यह एक बड़ा अवरोध है।
- अली असगर हेजाजी: अली असगर हेजाजी इस वक्त अयातुल्ला अली खामनेई के अंतर्गत राजनीतिक सुरक्षा मामलों के मंत्रालय को संभाल रहे हैं। उनके पास ईरानी खुफिया विभाग की जिम्मेदारी है। उनके आईआरजीसी और शीर्ष धर्मगुरुओं के साथ अच्छे संबंध हैं। हेजाजी अक्सर ईरान के रक्षा और कूटनीतिक मामलों पर फैसले में शामिल होते हैं। हालांकि, उन्हें अब तक अयातुल्ला की पदवी नहीं मिली है, जो कि सुप्रीम लीडर बनने के लिए अनिवार्य है।
- हासिम हुसैनी बुशहरी: ईरान में हासिम अली बुशहरी को भी सुप्रीम लीडर पद का अहम दावेदार माना जा रहा है। बुशहरी ईरान में प्रमुख धर्मगुरु के साथ-साथ कई और भूमिकाओं में रह चुके हैं। इनमें विशेषज्ञ सभा के पहले उप-प्रधान के अलावा धार्मिक मामलों से जुड़ी कई समितियों और प्रार्थना सभाओं की जिम्मेदारियां शामिल हैं। बुशहरी के सुप्रीम लीडर खामनेई से भी अच्छे संबंध हैं, जो कि सर्वोच्च पद के लिए उन्हें अहम दावेदार बनाती है।
- अली अकबर वेलायती: ईरान में कभी विदेश मंत्री की भूमिका निभाग चुके अली अकबर विदेश मामलों में खामनेई के करीबी सलाहकार हैं। वे लंबे समय तक राजनयिक की भूमिका में भी रह चुके हैं और परमाणु समझौते के लिए बातचीत में भी शामिल रहे हैं। वे ईरानी नेतृत्व के काफी करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।
अमेरिका की भारी और सटीक बमबारी लगातार जारी
गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि अमेरिकी और इस्राइली हवाई हमलों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ट्रंप ने इसे ईरानी जनता के लिए अपने देश पर नियंत्रण लौटाने का सबसे बड़ा अवसर बताया। ट्रंप ने खामेनेई को इतिहास के सबसे दुष्ट नेताओं में से एक करार देते हुए कहा कि वे अमेरिकी खुफिया और अत्याधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं सके। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका की भारी और सटीक बमबारी लगातार जारी रहेगी। वहीं, दो इस्राइली अधिकारियों ने पुष्टि की कि तेहरान में खामेनेई के कार्यालय परिसर के पास हुए हमलों के बाद इस्राइल ने उनकी मृत्यु की पुष्टि कर दी है। इस घटनाक्रम ने न केवल ईरान में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ा दी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर तनाव भी बढ़ा दिया है।
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