US: 'ईरान अब बातचीत के लिए मजबूर', पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच ट्रंप का बड़ा दावा; होर्मुज को लेकर भी चेताया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य और राजनीतिक ताकत को कमजोर कर दिया है। उनके अनुसार, अब ईरान डर के कारण पीछे हट रहा है और अमेरिका की शर्तों पर बातचीत करने के लिए मजबूर है।
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब अपने 29वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि ईरान बातचीत के लिए मजबूर है।
उनका कहना था कि ईरान को पहले होर्मुज खोलना होगा। उन्होंने मजाक में कहा कि गलती से उन्होंने इसे ट्रंप जलडमरूमध्य कह दिया, लेकिन उनका कहना था कि उनके लिए कोई गलती बड़ी बात नहीं है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अब ईरान अमेरिका की शर्तों को मानने के लिए तैयार है और कोई और विकल्प उनके पास नहीं बचा है।
अमेरिकी हथियार और सेना को लेकर भी बोले ट्रंप
ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका ने पश्चिम एशिया में ईरान के खतरे को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की सेना दुनिया की सबसे शक्तिशाली है। हमारे पास ऐसे हथियार हैं जिन्हें दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा। ट्रंप ने जोर देते हुए कहा कि ईरान पिछले 47 वर्षों से पश्चिम एशिया में दबंग देश था, लेकिन अब वह डर के कारण पीछे हट रहा है। ट्रंप ने कहा कि हमने ईरान को इतना कमजोर कर दिया है कि अब किसी को भी उनके साथ सौदा करना आसान लग रहा है। वे हमारे सामने झुक रहे हैं।
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मिसाइल हमले और सुरक्षा पर क्या बोले ट्रंप?
ट्रंप ने आगे बताया कि कुछ दिन पहले अमेरिका के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर पर 101 मिसाइलों का हमला हुआ। उन्होंने कहा कि सभी 101 मिसाइलें रोक दी गईं और समुद्र में गिर गईं। अमेरिकीर राष्ट्रपति ने बताया कि अब अमेरिका केवल तय किए गए लक्ष्यों पर हमला कर रहा है। उनका कहना था कि दुश्मन के पास कोई एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम नहीं है, इसलिए अमेरिकी जहाज आसानी से ऊपर से उड़कर लक्ष्य पर निशाना लगा सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि अब भी 3,554 लक्ष्यों को निशाना बनाने का काम बाकी है और यह जल्दी पूरा हो जाएगा।
कासिम सुलेमानी की हत्या का भी किया जिक्र
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने बताया कि उन्होंने अपने पहले ही कार्यकाल में ईरानी जनरल कासिम सुलैमानी को मारने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि सुलैमानी बहुत शक्तिशाली और खतरनाक था।ट्रंप ने बताया कि इस कदम से ईरान के नेतृत्व के लिए बड़ा झटका था। उनका कहना था कि अब सुलैमानी की वजह से कोई खतरा नहीं है, क्योंकि वह अब नहीं हैं। ट्रंप ने इसे ईरान की ताकत को कमजोर करने का एक अहम कदम बताया।
किएर स्टार्मर से हुई बातचीत पर भी दिया जोर
ट्रंप ने इस दौरान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर से बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से कहा था कि अमेरिका को दो छोटे एयरक्राफ्ट कैरियर्स चाहिए। उन्होंने बताया कि ये छोटे हैं, ज्यादा तेज नहीं चलते और पूरी तरह काम नहीं करते, लेकिन हेलीकॉप्टर के लिए काम आ सकते हैं। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या आप हमारी मदद करेंगे? ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने जवाब दिया कि हां, हां, हम आपकी मदद करेंगे जब युद्ध खत्म हो जाएगा।
ट्रंप ने कहा कि यह नाटो का हिस्सा है और अमेरिका हमेशा नाटो की मदद करता है। लेकिन उनका कहना था कि नाटो कभी अमेरिका की मदद सही समय पर नहीं करेगा। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर कोई बहुत बड़ा युद्ध हुआ, तो नाटो वहां मदद के लिए मौजूद नहीं होगा।
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सऊदी-इस्राइल संबंध पर भी बयान, क्राउन प्रिंस सलमान पर ट्रंप की अमर्यादित टिप्पणी
ट्रंप ने इस दौरान सऊदी अरब और इस्राइल के रिश्ते को सुधारने को लेकर भी अपना पुराना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान में युद्ध खत्म होने के बाद सऊदी अरब और इस्राइल के बीच संबंधों को सामान्य करने का समय आ गया है। ट्रंप ने कहा कि अब समय आ गया है। हमने ईरान को बहुत कमजोर कर दिया है। अब हमें अब्राहम समझौते की दिशा में बढ़ना होगा। ट्रंप ने सऊदी के प्रिंस के बारे में टिप्पणी करते समय अपने बड़बोलेपन का एक बार फिर परिचय दिया। अमर्यादित टिप्पणी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ईरान में हो रही जंग के बीच उन्हें ऐसा कोई कारण नहीं दिखता जिसके कारण क्राउन प्रिंस सलमान उनके सामने नतमस्तक होंगे।
गौरतलब है कि ट्रंप कई वर्षों से पश्चिम एशिया की दो बड़ी ताकतों, इस्राइल और सऊदी अरब, से रिश्ते सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं। यह उनकी अब्राहम समझौते की योजना का हिस्सा है। हालांकि, अभी कुछ बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। सऊदी अरब का कहना है कि वे इस्राइल के साथ व्यापार और कूटनीतिक संबंध तभी सामान्य करेंगे, जब फलस्तीनी राज्य बनाने का एक विश्वसनीय रास्ता मौजूद होगा।