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आपबीती: हाथ-पैर बांधे, बेड़ियों में कसा पेट..अमेरिका से लाइबेरिया-गिनी भेजे गए प्रवासियों की खौफनाक दास्तान
Tue, 01 Sep 2026 07:24 AM IST
निर्मल कांत
इमैनुएल अकिनवोटु/प्रणव भास्कर, द न्यूयॉर्क टाइम्स, मोनरोविया (लाइबेरिया)।
इमैनुएल अकिनवोटु/प्रणव भास्कर, द न्यूयॉर्क टाइम्स, मोनरोविया (लाइबेरिया)।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 01 Sep 2026 07:24 AM IST
अमेरिका की नई थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन नीति के तहत कई प्रवासियों को लाइबेरिया और इक्वेटोरियल गिनी भेजा गया। प्रवासियों ने हिरासत और 14 घंटे की उड़ान के दौरान बेड़ियों में रखने, इलाज न मिलने और अमानवीय बर्ताव के आरोप लगाए हैं। वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने क्या दावा किया है। पढ़िए रिपोर्ट
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डिपोर्ट किए गए प्रवासी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
लुइसियाना से पश्चिमी अफ्रीका जा रही एक चार्टर्ड फ्लाइट में क्यूबाई नागरिक लियोनार्डो सांचेज (49) दर्द से तड़पते हुए घंटों तक छोटे बच्चे की तरह रोते रहे। उनके हाथ-पैर भारी लोहे की हथकड़ियों में जकड़े थे, और कमर में बंधी सख्त लोहे की बेड़ी उनके पेट में धंस रही थी, जिससे पुरानी सर्जरी और गोलियों के घावों के चलते उन्हें बेतहाशा दर्द हो रहा था।
सांचेज ने प्लेन में तैनात अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) के अधिकारियों से हाथ जोड़कर मेडिकल मदद और टॉयलेट जाने की गुहार लगाई। लेकिन अधिकारियों ने बेड़ियां खोलने से साफ इन्कार कर दिया। दर्द और बेबसी के बीच सांचेज की पैंट में ही पेशाब छूट गया। यह दास्तान अकेले सांचेज की नहीं, बल्कि अमेरिका से 14 घंटे की उड़ान भरकर अफ्रीकी देश लाइबेरिया और इक्वेटोरियल गिनी पहुंचे उन दर्जनों प्रवासियों की है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन की नई थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन नीति के तहत ऐसे अनजान देशों में फेंक दिया गया है, जहां से उनका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।
जानवरों जैसा बर्ताव किया
वेनेजुएला के कार्लोस टेलेज-सांचेज डलास में कार डीलरशिप पर काम करते थे। कोर्ट का स्टे था। वर्क परमिट रिन्यू कराने गए तो गिरफ्तार कर लिया। आठ महीनों तक जेल में रखा गया और फिर लाइबेरिया भेज दिया गया। कार्लोस ने कहा, वे हमारे साथ इंसानों जैसा, इंसानों जैसा बर्ताव नहीं कर रहे थे। वे आपको कुछ भी कह सकते हैं और आपके साथ कुछ भी कर सकते हैं।
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ये भी पढ़ें: पाक में मदरसा की जमीन के लिए ढहाया सदी पुराना मंदिर: अल्पसंख्यकों ने किया विरोध; अधिकारियों ने क्या सफाई दी?
ठंडे कमरे में बंद रखा
ब्राजील की 21 वर्षीय पाओला डॉस सैंटोस बताती हैं कि डिपोर्टेशन से पहले उन्हें 15 महीने तक अमेरिकी हिरासत केंद्रों में रखा गया। उन्हें बिना बिस्तर वाले बेहद ठंडे कमरों में बंद रखा जाता था, जिसे कैदी फ्रीजर कहते थे। यहां 50 लोगों के लिए सिर्फ एक टॉयलेट था। पाओला के मुताबिक, अपने बच्चे से अलग होने के बाद रोने वाली एक महिला के हाथ-पैर मवेशियों की तरह बांध दिए गए थे।
अदालती आदेश पर भी सुरक्षा नहीं मिल रही
हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के पास अदालतों से अपने मूल देश न भेजे जाने के स्टे-ऑर्डर थे, उन्हें भी वर्क परमिट रिन्यू कराने के दौरान गिरफ्तार कर तीसरे देशों में धकेला जा रहा है।
अमेरिकी गृह मंत्रालय की सफाई-दे रहे सुविधाएं
विवाद गहराने पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय और होमलैंड सिक्योरिटी ने बयान जारी कर कहा है कि जिन लोगों को उनके देश नहीं भेजा जा सकता, केवल उन्हें ही तीसरे देशों में भेजा जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि कैदियों को उचित मेडिकल सुविधाएं दी जा रही हैं।
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सांचेज ने प्लेन में तैनात अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) के अधिकारियों से हाथ जोड़कर मेडिकल मदद और टॉयलेट जाने की गुहार लगाई। लेकिन अधिकारियों ने बेड़ियां खोलने से साफ इन्कार कर दिया। दर्द और बेबसी के बीच सांचेज की पैंट में ही पेशाब छूट गया। यह दास्तान अकेले सांचेज की नहीं, बल्कि अमेरिका से 14 घंटे की उड़ान भरकर अफ्रीकी देश लाइबेरिया और इक्वेटोरियल गिनी पहुंचे उन दर्जनों प्रवासियों की है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन की नई थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन नीति के तहत ऐसे अनजान देशों में फेंक दिया गया है, जहां से उनका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।
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जानवरों जैसा बर्ताव किया
वेनेजुएला के कार्लोस टेलेज-सांचेज डलास में कार डीलरशिप पर काम करते थे। कोर्ट का स्टे था। वर्क परमिट रिन्यू कराने गए तो गिरफ्तार कर लिया। आठ महीनों तक जेल में रखा गया और फिर लाइबेरिया भेज दिया गया। कार्लोस ने कहा, वे हमारे साथ इंसानों जैसा, इंसानों जैसा बर्ताव नहीं कर रहे थे। वे आपको कुछ भी कह सकते हैं और आपके साथ कुछ भी कर सकते हैं।
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ठंडे कमरे में बंद रखा
ब्राजील की 21 वर्षीय पाओला डॉस सैंटोस बताती हैं कि डिपोर्टेशन से पहले उन्हें 15 महीने तक अमेरिकी हिरासत केंद्रों में रखा गया। उन्हें बिना बिस्तर वाले बेहद ठंडे कमरों में बंद रखा जाता था, जिसे कैदी फ्रीजर कहते थे। यहां 50 लोगों के लिए सिर्फ एक टॉयलेट था। पाओला के मुताबिक, अपने बच्चे से अलग होने के बाद रोने वाली एक महिला के हाथ-पैर मवेशियों की तरह बांध दिए गए थे।
अदालती आदेश पर भी सुरक्षा नहीं मिल रही
हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के पास अदालतों से अपने मूल देश न भेजे जाने के स्टे-ऑर्डर थे, उन्हें भी वर्क परमिट रिन्यू कराने के दौरान गिरफ्तार कर तीसरे देशों में धकेला जा रहा है।
अमेरिकी गृह मंत्रालय की सफाई-दे रहे सुविधाएं
विवाद गहराने पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय और होमलैंड सिक्योरिटी ने बयान जारी कर कहा है कि जिन लोगों को उनके देश नहीं भेजा जा सकता, केवल उन्हें ही तीसरे देशों में भेजा जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि कैदियों को उचित मेडिकल सुविधाएं दी जा रही हैं।