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US: क्या डॉक्टरों को एच-1B वीजा आवेदन के लिए 88 लाख रुपये की फीस से छूट मिलेगी? ट्रंप की टीम ने दिया ये संकेत
Tue, 23 Sep 2025 10:25 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 23 Sep 2025 10:25 AM IST
US: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि विदेश से आने वाले डॉक्टरों को एच-1बी वीजा की 88 लाख रुपये (1 लाख डॉलर) की फीस से छूट मिल सकती है। यह छूट तब दी जाएगी जब अमेरिकी गृह सुरक्षा सचिव तय करें कि किसी व्यक्ति को काम पर रखना राष्ट्रीय हित में है। चिकित्सा संगठनों ने चेतावनी दी है कि ग्रामीण अमेरिका में डॉक्टरों की कमी का संकट बढ़ सकता है।
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एच-1बी वीजा
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन उच्च-कुशल पेशेवरों के लिए एच-1बी वीजा आवेदन पर बढ़ाए गए 1,00,000 डॉलर के शुल्क (फीस) से डॉक्टरों को छूट दे सकता है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता टलर रोजर्स ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर वाले कार्यकारी आदेश में संभावित छूट का प्रावधान है, जिसमें डॉक्टर और चिकित्सा कर्मचारी शामिल हो सकते हैं।
पिछले हफ्ते जारी हुए कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि अगर अमेरिका के गृह सुरक्षा सचिव तय करते हैं कि किसी व्यक्ति या विशेष कंपनी या उद्योग में काम पर रखना राष्ट्रीय हित में है, तो वीजा फीस माफ की जा सकती है। प्रवक्ता रोजर्स ने कहा, आखिरकार, प्रशासन राष्ट्रपति की ओर से जारी आदेश का पालन करेगा।
ये भी पढ़ें: ट्रंप से मिलेंगे अरब और इस्लामी देशों के नेता, क्या गाजा को लेकर तीन सूत्रीय प्लान पर कर पाएंगे राजी?
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व्हाइट हाइस की ओर से यह बयान तब आया है, जब अमेरिका की कई चिकित्सा संस्थाओं ने ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह भारी वीजा फीस विदेशी डॉक्टरों को अमेरिका में आने से रोक सकती है, जिससे पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे इलाकों में हालात और भी बिगड़ सकते हैं। व्हाइट हाउस ने हाल ही में घोषणा की है कि एच-1बी वीजा आवेदन के लिए 100,000 डॉलर (करीब 88 लाख भारतीय रुपये) की फीस ली जाएगी। अभी तक यह फीस केवल 215 डॉलर थी, जिसमें कुछ अन्य मामूली प्रक्रिा शुल्क भी शामिल थे।
शुक्रवार को फैसले की घोषणा के बाद व्हाइट हाउस ने कंपनियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि यह फीस पहले से मौजूद वीजा धारकों पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा, जो कर्मचारी विदेश यात्रा पर हैं, वे बिना फी दिए अमेरिका में वापस आ सकते हैं। यह नई नीति रविवार की सुबह 12:01 बजे से लागू हो गई है।
एच-1बी वीजा क्या है?
एच-1बी वीजा एक ऐसी पहल है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेश से विशेष कौशल रखने वाले पेशेवरों को नौकरी पर रखती हैं। इसके लिए उम्मीदवार को पास कम से कम स्नातक की डिग्री या उसके बराबर योग्यता होनी चाहिए। वीजा की अवधि तीन साल की होती है, जिसे तीन साल और बढ़ाया जा सकता है।
ये भी पढ़ें: ट्रंप बोले- गर्भावस्था में टायलनॉल से बच्चों में हो सकता है ऑटिज्म, विशेषज्ञों ने खारिज किया दावा
कैपिटन इकोनॉमिक्स के अर्थशास्त्री स्टीफन ब्राउन के मुताबिक, फिलहाल अमेरिका में करीब सात लाख एच-1बी वीजा धारक और करीब पांच लाख आश्रित (परिवार के सदस्य) रह रहे हैं। प्यू रिसर्च सेंटर से जुड़े कामों के लिए दिए गए हैं। हालांकि, अस्पताल, बैंक, विश्वविद्यालय और कई अन्य क्षेत्रों के नियोक्ता भी एच-1बी वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। हर साल नए एच-1बी वीजा की संख्या 65 हजार तक सीमित होती है और इसमें 20 हजार अतिरिक्त वीजा उन लोगों के लिए होते हैं, जिनके स्नातकोत्तर डिग्री या उससे ऊपर की डिग्री है। ये वीजा लॉटरी प्रणाली से दिए जाते हैं।
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पिछले हफ्ते जारी हुए कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि अगर अमेरिका के गृह सुरक्षा सचिव तय करते हैं कि किसी व्यक्ति या विशेष कंपनी या उद्योग में काम पर रखना राष्ट्रीय हित में है, तो वीजा फीस माफ की जा सकती है। प्रवक्ता रोजर्स ने कहा, आखिरकार, प्रशासन राष्ट्रपति की ओर से जारी आदेश का पालन करेगा।
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व्हाइट हाइस की ओर से यह बयान तब आया है, जब अमेरिका की कई चिकित्सा संस्थाओं ने ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह भारी वीजा फीस विदेशी डॉक्टरों को अमेरिका में आने से रोक सकती है, जिससे पहले से ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे इलाकों में हालात और भी बिगड़ सकते हैं। व्हाइट हाउस ने हाल ही में घोषणा की है कि एच-1बी वीजा आवेदन के लिए 100,000 डॉलर (करीब 88 लाख भारतीय रुपये) की फीस ली जाएगी। अभी तक यह फीस केवल 215 डॉलर थी, जिसमें कुछ अन्य मामूली प्रक्रिा शुल्क भी शामिल थे।
शुक्रवार को फैसले की घोषणा के बाद व्हाइट हाउस ने कंपनियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि यह फीस पहले से मौजूद वीजा धारकों पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा, जो कर्मचारी विदेश यात्रा पर हैं, वे बिना फी दिए अमेरिका में वापस आ सकते हैं। यह नई नीति रविवार की सुबह 12:01 बजे से लागू हो गई है।
एच-1बी वीजा क्या है?
एच-1बी वीजा एक ऐसी पहल है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेश से विशेष कौशल रखने वाले पेशेवरों को नौकरी पर रखती हैं। इसके लिए उम्मीदवार को पास कम से कम स्नातक की डिग्री या उसके बराबर योग्यता होनी चाहिए। वीजा की अवधि तीन साल की होती है, जिसे तीन साल और बढ़ाया जा सकता है।
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कैपिटन इकोनॉमिक्स के अर्थशास्त्री स्टीफन ब्राउन के मुताबिक, फिलहाल अमेरिका में करीब सात लाख एच-1बी वीजा धारक और करीब पांच लाख आश्रित (परिवार के सदस्य) रह रहे हैं। प्यू रिसर्च सेंटर से जुड़े कामों के लिए दिए गए हैं। हालांकि, अस्पताल, बैंक, विश्वविद्यालय और कई अन्य क्षेत्रों के नियोक्ता भी एच-1बी वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। हर साल नए एच-1बी वीजा की संख्या 65 हजार तक सीमित होती है और इसमें 20 हजार अतिरिक्त वीजा उन लोगों के लिए होते हैं, जिनके स्नातकोत्तर डिग्री या उससे ऊपर की डिग्री है। ये वीजा लॉटरी प्रणाली से दिए जाते हैं।
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