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इस्राइल को हथियार सप्लाई पर भड़का ईरान: फ्रांस और ब्रिटेन को दी दोटूक चेतावनी, बोला- ‘यह अपराधों में भागीदारी'

Sun, 23 Aug 2026 07:58 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 23 Aug 2026 07:58 AM IST
सार
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ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने शनिवार को पश्चिमी देशों पर इस्राइल का समर्थन करने का जानबूझकर फैसला लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस्राइल को लगातार हथियारों की आपूर्ति और अन्य तरह की मदद देना, उसके कथित अपराधों में शामिल होने के बराबर है।

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Iran lashes out over arms supplies to Israel issues blunt warning to France and Britain stating
 काजेम गरीबाबादी, उप विदेश मंत्री,  ईरान  - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने इस्राइल को हथियार और अन्य समर्थन देने को लेकर फ्रांस और UK की आलोचना की है। उनकी टिप्पणी 102 पूर्व ब्रिटिश और फ्रांसीसी राजनयिकों की उस अपील के बाद आई, जिसमें दोनों देशों से इस्राइल पर ठोस दबाव बनाने, हथियारों की आपूर्ति और सैन्य सहयोग रोकने, बस्तियों से जुड़े व्यापार पर प्रतिबंध लगाने तथा अंतरराष्ट्रीय अदालतों के फैसलों को लागू करने की मांग की गई है। राजनयिकों ने वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार, घरों को गिराए जाने और बसने वालों की हिंसा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

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लंदन और पेरिस को ‘चिंता’ के पीछे नहीं छिपना चाहिए
ब्रिटिश और फ्रांसीसी पूर्व राजनयिकों की उस अपील के जवाब में, जिसमें उन्होंने अपनी सरकारों से 'फलस्तीन में अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने' का आग्रह किया था, गरीबाबादी ने  एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'लंदन और पेरिस को इस स्थिति में सिर्फ 'चिंता व्यक्त करने' की बात कहकर पीछे नहीं छिपना चाहिए।' उस शासन को हथियार भेजना और किसी भी तरह का समर्थन देना, जायोनी शासन द्वारा किए जा रहे अपराधों में सहयोग और भागीदारी का जानबूझकर किया गया फैसला है। 
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100 से अधिक पूर्व राजनयिकों ने उठाई आवाज़
गरीबाबादी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब 100 से अधिक अनुभवी ब्रिटिश और फ्रांसीसी राजनयिकों ने अपनी-अपनी सरकारों को चेतावनी दी है कि इस्राइल की नीतियां 'जातीय सफाए' और 'फलस्तीन को खत्म करने' की दिशा में बढ़ रही हैं। उन्होंने लंदन और पेरिस से ठोस कदम उठाने की मांग की है। इनमें हथियारों की आपूर्ति रोकना, इस्राइली बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाना और हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालतों के फैसलों को लागू करना शामिल है।
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गरीबाबादी ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में लिखा,'100 से अधिक अनुभवी ब्रिटिश और फ्रांसीसी राजनयिकों ने अपनी सरकारों को चेतावनी दी कि जायोनी शासन की नीति ‘जातीय सफाए’ और ‘फिलिस्तीन को खत्म करने’ की ओर बढ़ रही है। उन्होंने लंदन और पेरिस से हथियारों की आपूर्ति रोकने, बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाने और हेग अदालतों के फैसलों को लागू करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।'

102 पूर्व राजनयिकों ने इस्राइल पर प्रतिबंध लगाने की मांग की
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, गरीबाबादी की यह टिप्पणी 102 पूर्व फ्रांसीसी और ब्रिटिश राजनयिकों के एक समूह द्वारा अपनी सरकारों से संयुक्त रूप से इस्राइल पर प्रतिबंध लगाने की मांग किए जाने के बाद आई है। इन राजनयिकों ने चेतावनी दी कि कब्जे वाले फलस्तीनी इलाकों में इस्राइल की नीतियां भविष्य में फलस्तीनी राज्य के गठन की संभावना के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।

‘अंतरराष्ट्रीय कानून और समान अधिकारों’ की पैरवी
अल जजीरा के अनुसार, फ्रांसीसी अखबार ‘ले मोंडे’ में प्रकाशित एक खुले पत्र में पूर्व राजनयिकों ने फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम से 'फलस्तीन में अंतरराष्ट्रीय कानून को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने' और 'इस्राइलियों तथा फलस्तीनियों के लिए समान अधिकारों' की वकालत करने का आग्रह किया। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत जेरेमी ग्रीनस्टॉक और एमीर जोन्स पैरी के साथ-साथ मध्य पूर्व के लिए फ्रांस के पूर्व निदेशक यवेस औबिन डी ला मेसुज़िएर और डेनिस बाउचार्ड भी शामिल हैं।

व्यापार और सैन्य सहयोग रोकने की मांग
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व राजनयिकों ने फ्रांस और UK से इस्राइल के साथ व्यापार समझौतों को निलंबित करने, हथियारों की आपूर्ति और सैन्य सहयोग रोकने, इस्राइली बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाने तथा नागरिकों को कब्जे वाली फलस्तीनी जमीन पर संपत्ति खरीदने से रोकने का आग्रह किया है।

गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाने पर जोर
पत्र में दोनों सरकारों से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया गया है कि UNRWA सहित संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों के माध्यम से गाजा तक मानवीय सहायता पहुंचती रहे। इसके साथ ही पत्रकारों, राजनयिकों और सांसदों की क्षेत्र तक पहुंच सुरक्षित रखने की मांग की गई है। कानून तोड़ने पर सजा देने वाली ये कार्रवाइयां कानून के शासन की रक्षा करती हैं और दिखाती हैं कि हिंसा का एक विकल्प भी मौजूद है।


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भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य को लेकर भी अपील
अल जजीरा के अनुसार, पत्र में फिलिस्तीनी नेतृत्व से यह सुनिश्चित करने का भी आह्वान किया गया है कि भविष्य का फलस्तीनी राज्य 'लोकतांत्रिक और कानून का पालन करने वाला' बना रहे। साथ ही, आगामी चुनावों को राजनीतिक बदलाव के एक अवसर के रूप में रेखांकित किया गया है।

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