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ईरान की जमीन से कैसे निकल आया अमेरिकी पायलट: क्या होती है ट्रेनिंग, किस टीम को मिली थी बचाने की जिम्मेदारी?
Sat, 04 Apr 2026 04:50 PM IST
Kirtivardhan Mishra
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Sat, 04 Apr 2026 04:50 PM IST
ईरान की तरफ से अमेरिका के एयरक्राफ्ट्स को निशाना बनाए जाने का सिलसिला जारी है। इस बीच शुक्रवार को ईरानी सेना की तरफ से एक एफ-15ई फाइटर जेट को मार गिराया गया। इसके दोनों पायलट ईरान की धरती पर ही इजेक्ट हो गए। इन्हें पकड़ने के लिए ईरान की सेना ने अभियान शुरू किया। इसके बावजूद अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने एक पायलट को सुरक्षित निकाल लिया।
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अमेरिका ने ईरान से रेस्क्यू किया एक फाइटर पायलट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुए अब पांच हफ्ते पूरे हो चुके हैं। इस बीच जंग के जल्द खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में राष्ट्र के नाम संबोधन में साफ कर दिया कि अमेरिका अपने लक्ष्यों को पूरा करने के बाद ही ईरान से निकलेगा। उन्होंने इससे पहले ईरान में संघर्ष को खत्म करने के लिए कम से कम दो से तीन हफ्ते और लगने की बात कही थी।
इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर खबरें आईं कि ईरान ने अमेरिका के दो फाइटर जेट्स और एक हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया है। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि उसने एफ-35 फाइटर जेट, एफ-15 लड़ाकू विमान और एक अमेरिकी चॉपर को मार गिराया। इतना ही नहीं एक लड़ाकू विमान के दो क्रू सदस्यों के ईरान की धरती पर ही फंसने की खबरें सामने आईं। हालांकि, देर रात तक अमेरिका ने अपने एक पायलट को बाहर निकाल लिया। वहीं, दूसरे पायलट के अभी भी ईरान में ही कहीं फंसे होने की खबर है, जिसकी खोज की जा रही है।
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इस बीच शुक्रवार को एक बार फिर खबरें आईं कि ईरान ने अमेरिका के दो फाइटर जेट्स और एक हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया है। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि उसने एफ-35 फाइटर जेट, एफ-15 लड़ाकू विमान और एक अमेरिकी चॉपर को मार गिराया। इतना ही नहीं एक लड़ाकू विमान के दो क्रू सदस्यों के ईरान की धरती पर ही फंसने की खबरें सामने आईं। हालांकि, देर रात तक अमेरिका ने अपने एक पायलट को बाहर निकाल लिया। वहीं, दूसरे पायलट के अभी भी ईरान में ही कहीं फंसे होने की खबर है, जिसकी खोज की जा रही है।
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच दुनियाभर में कुछ बड़े सवाल उठ रहे हैं। आखिर कैसे ईरानी मिसाइल के हमले और इसमें लड़ाकू विमान के तबाह होने के बावजूद अमेरिकी फाइटर पायलट जिंदा बच गए? उनकी किस तरह की ट्रेनिंग हमले की स्थितियों में उनकी मदद करती है? किसी दुश्मन देश की धरती पर गिरने के बाद ये फाइटर पायलट अपना बचाव कैसे करते हैं? आखिर वह कौन सी रेस्क्यू टीम है, जो तमाम मुश्किलों और खतरों के बीच भी ईरान से एक फाइटर पायलट को बचा लाई? आइये जानते हैं...
किस खास तरह की ट्रेनिंग से तैयार होते हैं फाइटर पायलट?
अमेरिका में पायलटों को लड़ाकू विमान के ध्वस्त हो जाने और खतरे वाली जगहों पर गिरने के बाद बच निकलने की खास ट्रेनिंग दी जाती है। इसे सेरे (SERE) ट्रेनिंग भी कहा जाता है। इसका पूरा अर्थ है- 'सर्वाइवल, इवेजन, रेजिस्टेंस एंड एस्केप' ट्रेनिंग यानी पहले जिंदा बचने, फिर दुश्मन की नजर से बचने, जरूरत पड़ने पर लड़ाई करने और भाग निकलना। अमेरिकी मीडिया ग्रुप सीएनए से बातचीत में रिटायर्ड कर्नल सेड्रिक लेटन ने बताया कि पायलट की यह ट्रेनिंग उन्हें मुश्किल परिस्थितियों से बच निकलने में मदद करती है।ये भी पढ़ें: US-Iran Conflict: ईरान की मिसाइल शक्ति ने अमेरिकी हवाई दबदबा तोड़ा, F‑15 और A‑10 गिराए; एक पायलट अभी भी लापता
लड़ाकू विमान के तबाह होने के बाद कैसे जिंदा बचते हैं पायलट?
लड़ाकू विमान के पायलटों को दुश्मन के किसी भी हमले को भांपते हुए अपने एयरक्राफ्ट से ज्यादा अपनी जान को प्राथमिकता देने की ट्रेनिंग दी जाती है। ऐसे में विमान पर हमले से ठीक पहले पायलट लड़ाकू विमान से तुरंत अलग हो जाने वाली इजेक्शन सीट का इस्तेमाल कर के खुद को खतरे से बाहर निकाल सकते हैं। इस दौरान, पायलट के साथ इजेक्शन सीट के नीचे मौजूद उनकी सर्वाइवल किट और सर्वाइवल वेस्ट भी होती है, जो दुश्मन की जमीन पर उतरने के बाद छिपने और जिंदा रहने में काम आती है।
दुश्मन की धरती पर गिरने के बाद कैसे करते हैं अपना बचाव?
- पैराशूट से नीचे आते समय ही पायलट अपने आसपास के इलाके का जायजा लेते हैं और यह तय कर लेते हैं कि उन्हें कहां छिपना है और किन जगहों से बचना है।
- जमीन पर उतरते ही उनकी पहली प्राथमिकता अपनी चोटों की जांच करना, खुद के छिपने के इंतजाम करना, पानी खोजना और दुश्मन की कैद से बचना होता है।
- इसके बाद यह पायलट सुरक्षित निकासी स्थान तक पहुंचने की कोशिश शुरू करते हैं। इसके लिए वे अक्सर रात के अंधेरे में ही आगे बढ़ते हैं।
क्या हैं वह उपकरण-किट जिनसे मुश्किल स्थिति में भी होता है बचाव?
राहत और चिकित्सा सामग्री: लड़ाकू विमान से इजेक्शन के बाद अगर पायलट को चोट आती हैं तो इसमें उनकी सर्वाइवल किट सबसे कारगर होती है। चोट लगने की स्थिति के लिए किट में फर्स्ट-एड (पट्टियां, टूर्निकेट), पानी के पैकेट, दर्द भगाने की गोलियां और 3 से 7 दिनों तक जीवित रहने के लिए उच्च-ऊर्जा वाला खाना होता है।सिग्नलिंग उपकरण: पायलटों की किट में रेस्क्यू विमानों या हेलीकॉप्टर का ध्यान खींचने के लिए फ्लेयर्स, स्मोक बम, स्ट्रोब लाइट, रेडियो और ग्लो स्टिक मौजूद होते हैं।
मौसम से बचाव और आत्मरक्षा: मौसम की मार से बचने के लिए थर्मल ब्लैंकेट, बारिश से बचने के लिए पोंचो और आग जलाने के उपकरण होते हैं। अंतिम विकल्प के रूप में अपनी रक्षा करने के लिए पायलट पिस्तौल या एक छोटी राइफल भी रखते हैं।
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ब्लड चिट: पायलटों के पास स्थानीय भाषाओं में लिखा एक खास दस्तावेज होता है। यह नागरिकों से मदद मांगने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और पायलटों को सुरक्षित अमेरिकी बलों तक वापस पहुंचाने के बदले भारी इनाम की पेशकश करता है।
...और आखिर में, वह टीम जिसे मिलती है दुश्मनों से पायलटों को बचाने की जिम्मेदारी
शुक्रवार को जब यह खबर आई कि ईरान ने अमेरिकी फाइटर जेट को निशाना बनाया है, तो यह माना जाने लगा कि इसमें सवार फाइटर पायलट ईरानी सेना द्वारा बंधक बना लिए जाएंगे। हालांकि, देर रात सामने आया कि अमेरिका की एक खास रेस्क्यू टीम ने ईरान की जमीन में गिरे दो पायलटों में से एक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। बाद में सामने आया कि एक पायलट को बाहर निकालने और दूसरे की खोज जारी रखने का यह जौहर अमेरिकी वायुसेना की कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (सीएसएआर) टीम और उनके एलीट पैरारेस्क्यू जंपर्स ने दिखाया है। इन्हें अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज का हिस्सा माना जाता है।क्या हैं वह खूबियां, जो इस टीम को खतरनाक बनाती हैं?
- ये टीमें विशेष रूप से दुश्मन के इलाके और युद्ध क्षेत्रों में फंसे अपने सैनिकों और पायलटों को निकालने के लिए ही प्रशिक्षित होती हैं।
- पैरारेस्क्यू जंपर्स को वायुसेना की स्विस आर्मी नाइफ कहा जाता है, क्योंकि वे न सिर्फ बेहतरीन लड़ाके होते हैं, बल्कि जबरदस्त पैरामेडिक ट्रेनिंग भी हासिल करते हैं।
- ये जंपर्स जरूरत पड़ने पर हवाई जहाजों से छलांग लगाने और जमीन पर पहुंचकर घायल पायलट को तत्काल चिकित्सा सुविधा देने में माहिर होते हैं।
- इन जवानों का चयन और प्रशिक्षण अमेरिकी सेना के सबसे कठिन कोर्स में से एक माना जाता है, जिसमें लगभग दो साल का समय लगता है।
- इस दौरान जंपर्स को न सिर्फ पैराशूट से कूदने, बल्कि समुद्र में गोताखोरी, जिंदा बचने और युद्ध क्षेत्र की चिकित्सा का कड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है।
- जब भी अमेरिकी विमान दुश्मन के हवाई क्षेत्र में होते हैं, तो एक्सट्रैक्शन (बचाव) टीमें हमेशा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर रहती हैं।
- इन रेस्क्यू टीमों का एकमात्र लक्ष्य हर हाल में अपने जवानों को खोजना, दुश्मनों के हमलों से बचना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना होता है।
ईरान में इस टीम ने कैसे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में रक्षा मामलों से जुड़े एक अधिकारी ने सीबीएस न्यूज को बताया कि ईरान के खुजेस्तान प्रांत में चलाए गए इस ऑपरेशन में कम से कम 24 एलीट पैरारेस्क्यू जंपर्स शामिल थे। इस टीम ने ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर्स के जरिए इलाके की सघन तलाशी ली, जिन्हें आसमान में ही ईंधन देने के लिए रिफ्यूलिंग विमानों का भी सपोर्ट मिल रहा था।1. ईरान के पूरे इलाके में चलाया कॉम्बिंग ऑपरेशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पायलट की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए ह्यूमन इंटेलिजेंस, इमेजरी (तस्वीरों), ड्रोन्स और सिग्नल इंटेलिजेंस का व्यापक इस्तेमाल किया गया। रेस्क्यू टीम ने पायलट की अंतिम ज्ञात लोकेशन से शुरुआत की और यह अनुमान लगाते हुए कि वह मुश्किल इलाके में कितनी दूर जा सकता है, चारों तरफ फैलकर खोजबीन की।
2. हवा में ही रियल-टाइम योजना
पायलट का सुराग मिलते ही हेलीकॉप्टर के अंदर ही रियल-टाइम रेस्क्यू प्लान तैयार किया गया। बचाव के दौरान हेलीकॉप्टर के गनर आसमान से खतरों (दुश्मनों) पर नजर रख रहे थे और पायलट सुरक्षित लैंडिंग की जगह तलाश रहे थे। टीम जरूरत पड़ने पर विमान से सीधे पैराशूट के जरिए छलांग लगाने के लिए भी पूरी तरह तैयार थी।
3. जमीन पर कार्रवाई और तुरंत निर्णय
कुछ पूर्व सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऑपरेशन को नॉन-स्टैंडर्ड असिस्टेड रिकवरी मिशन के तौर पर चलाया गया। इसमें संकट के समय मदद के लिए पहले से ही संपर्क में रहे ईरान के स्थानीय समूहों की सहायता लिए जाने की संभावना जताई गई है। यह पूरा ऑपरेशन बेहद समय-संवेदनशील था, क्योंकि जिस इलाके में अमेरिकी टीम पायलट को खोज रही थी, वहीं ईरानी सैन्य बल भी उसे पकड़ने के लिए सक्रिय थे। इन तमाम खतरों के बीच, अंततः इस एलीट टीम ने एक क्रू मेंबर को सुरक्षित निकाल लिया। वहीं, दूसरा पायलट अभी भी ईरानी बलों की पहुंच से बाहर है और उसकी खोज भी जारी है।
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पायलट का सुराग मिलते ही हेलीकॉप्टर के अंदर ही रियल-टाइम रेस्क्यू प्लान तैयार किया गया। बचाव के दौरान हेलीकॉप्टर के गनर आसमान से खतरों (दुश्मनों) पर नजर रख रहे थे और पायलट सुरक्षित लैंडिंग की जगह तलाश रहे थे। टीम जरूरत पड़ने पर विमान से सीधे पैराशूट के जरिए छलांग लगाने के लिए भी पूरी तरह तैयार थी।
3. जमीन पर कार्रवाई और तुरंत निर्णय
कुछ पूर्व सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऑपरेशन को नॉन-स्टैंडर्ड असिस्टेड रिकवरी मिशन के तौर पर चलाया गया। इसमें संकट के समय मदद के लिए पहले से ही संपर्क में रहे ईरान के स्थानीय समूहों की सहायता लिए जाने की संभावना जताई गई है। यह पूरा ऑपरेशन बेहद समय-संवेदनशील था, क्योंकि जिस इलाके में अमेरिकी टीम पायलट को खोज रही थी, वहीं ईरानी सैन्य बल भी उसे पकड़ने के लिए सक्रिय थे। इन तमाम खतरों के बीच, अंततः इस एलीट टीम ने एक क्रू मेंबर को सुरक्षित निकाल लिया। वहीं, दूसरा पायलट अभी भी ईरानी बलों की पहुंच से बाहर है और उसकी खोज भी जारी है।
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