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यूएन में भारत की दो टूक: कहा- आतंकियों तक न पहुंचे संवेदनशील हथियार तकनीक; परमाणु निरस्त्रीकरण का उठाया मुद्दा
Tue, 20 Oct 2026 08:37 AM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, न्यूयॉर्क
एएनआई, न्यूयॉर्क
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 20 Oct 2026 08:37 AM IST
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में परमाणु हथियारों के पूर्ण निरस्त्रीकरण के लिए समान नियमों और सत्यापन वाली कानूनी व्यवस्था बनाने की मांग की है। मनीष तिवारी ने कहा कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का फैसला इंसानों के हाथ में रहना चाहिए और परमाणु हथियार रहित देशों को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।
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यूएन की आर्थिक स्थिति पर भारत ने जताई चिंता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवादियों के हाथों में सामूहिक विनाश के हथियार पहुंचने के खतरे पर गंभीर चिंता जताई है। भारत ने वैश्विक समुदाय से दोहरे उपयोग वाली और संवेदनशील तकनीक के हस्तांतरण पर सतर्कता बरतने की अपील की। साथ ही परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए सार्वभौमिक, गैर-भेदभावपूर्ण और सत्यापन योग्य कानूनी ढांचा बनाने, परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का फैसला इंसानों के हाथ में रखने और संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिति सुधारने की जरूरत पर जोर दिया।
निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत की ओर से लोकसभा सांसद आलोक कुमार सुमन ने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने सदस्य देशों से विशेष रूप से उन पक्षों को संवेदनशील तकनीक देने के मामले में सतर्क रहने को कहा, जिनका अतीत में प्रसार गतिविधियों का रिकॉर्ड रहा है या जिनके आतंकवाद से संबंध हैं। इन टिप्पणियों को पाकिस्तान और परमाणु तकनीक के प्रसार से जुड़े नेटवर्क की ओर परोक्ष संकेत माना जा रहा है।
सुमन ने कहा कि भारत 2002 से आतंकवादियों को सामूहिक विनाश के हथियार हासिल करने से रोकने के उपायों पर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश करता रहा है। भारत ने रासायनिक और जैविक हथियार सम्मेलनों को पूर्ण, प्रभावी और गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
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'परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का फैसला इंसान करें'
संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत की ओर से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने परमाणु हथियारों से जुड़े जोखिमों और निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर देश का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि परमाणु कमान और नियंत्रण प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई तकनीकों के इस्तेमाल से गंभीर सवाल उठते हैं। भारत इस सिद्धांत का समर्थन करता है कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का निर्णय मनुष्यों को ही लेना चाहिए।
तिवारी ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु प्रतिरोध की नीति अपनाता है। भारत पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करने और परमाणु हथियार रहित देशों के खिलाफ इनका इस्तेमाल नहीं करने की नीति पर कायम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की रक्षा क्षमताएं उसकी विशिष्ट सुरक्षा परिस्थितियों के अनुरूप हैं और किसी एक देश को निशाना बनाकर तैयार नहीं की गई हैं।
भारत ने परमाणु परीक्षणों पर स्वैच्छिक एकतरफा रोक जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही परमाणु हथियार रहित देशों को परमाणु हमले या हमले की धमकी से सुरक्षा देने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी आश्वासन देने की वकालत की।
वैश्विक कानूनी ढांचे की मांग
भारत ने परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए ऐसी बहुपक्षीय व्यवस्था बनाने पर जोर दिया, जो सभी देशों पर समान रूप से लागू हो और जिसके पालन की पुष्टि की जा सके। तिवारी ने परमाणु हथियारों को तत्काल इस्तेमाल के लिए तैयार रखने से जुड़े जोखिम घटाने और इनके इस्तेमाल या इस्तेमाल की धमकी पर रोक लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय संधि पर बातचीत की मांग भी दोहराई।
उन्होंने कहा कि ऐसा सार्वभौमिक और कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता परमाणु हथियारों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए जरूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति तैयार करने में मदद कर सकता है। भारत ने आतंकवादियों और गैर-सरकारी तत्वों को परमाणु हथियारों, सामग्री और तकनीक तक पहुंचने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत भी बताई।
संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिति पर चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासभा की पांचवीं समिति में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर सुरेंद्र अधाना ने संगठन की वित्तीय स्थिति पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत अपने निर्धारित वित्तीय योगदान का पूरा भुगतान समय पर करता रहा है और सदस्य देशों से भी अपने दायित्व पूरे करने की अपील की। उन्होंने कहा कि निर्धारित योगदान का पूरा, समय पर और बिना शर्त भुगतान करना प्रत्येक सदस्य देश का दायित्व है।
अधाना के मुताबिक, 2026 में संयुक्त राष्ट्र की नकदी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। 30 सितंबर तक अपने निर्धारित योगदान का पूरा भुगतान करने वाले देशों की संख्या बढ़कर 141 हो गई, जबकि पिछले साल यह 136 थी। संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट का बकाया घटकर 1.46 अरब डॉलर रह गया, लेकिन यह अब भी काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि इसका 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा एक ही सदस्य देश पर बकाया है।
शांति अभियानों के लिए बकाया राशि भी पिछले साल के 3.7 अरब डॉलर से बढ़कर 4.1 अरब डॉलर हो गई है। इसका लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा दो सदस्य देशों पर बकाया है। संयुक्त राष्ट्र के न्यायाधिकरणों से जुड़ा बकाया भी बढ़कर 8.7 करोड़ डॉलर हो गया है।
भारत ने बंद हो चुके शांति अभियानों के लिए सैनिकों और उनके उपकरणों से जुड़े लंबित दावों के करीब तीन करोड़ डॉलर का भुगतान जल्द करने की मांग की। अधाना ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभाने के लिए समय पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है।
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निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत की ओर से लोकसभा सांसद आलोक कुमार सुमन ने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है। उन्होंने सदस्य देशों से विशेष रूप से उन पक्षों को संवेदनशील तकनीक देने के मामले में सतर्क रहने को कहा, जिनका अतीत में प्रसार गतिविधियों का रिकॉर्ड रहा है या जिनके आतंकवाद से संबंध हैं। इन टिप्पणियों को पाकिस्तान और परमाणु तकनीक के प्रसार से जुड़े नेटवर्क की ओर परोक्ष संकेत माना जा रहा है।
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सुमन ने कहा कि भारत 2002 से आतंकवादियों को सामूहिक विनाश के हथियार हासिल करने से रोकने के उपायों पर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश करता रहा है। भारत ने रासायनिक और जैविक हथियार सम्मेलनों को पूर्ण, प्रभावी और गैर-भेदभावपूर्ण तरीके से लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
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'परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का फैसला इंसान करें'
संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत की ओर से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने परमाणु हथियारों से जुड़े जोखिमों और निरस्त्रीकरण के मुद्दे पर देश का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि परमाणु कमान और नियंत्रण प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी नई तकनीकों के इस्तेमाल से गंभीर सवाल उठते हैं। भारत इस सिद्धांत का समर्थन करता है कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का निर्णय मनुष्यों को ही लेना चाहिए।
तिवारी ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार परमाणु हथियार संपन्न देश के रूप में विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु प्रतिरोध की नीति अपनाता है। भारत पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करने और परमाणु हथियार रहित देशों के खिलाफ इनका इस्तेमाल नहीं करने की नीति पर कायम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की रक्षा क्षमताएं उसकी विशिष्ट सुरक्षा परिस्थितियों के अनुरूप हैं और किसी एक देश को निशाना बनाकर तैयार नहीं की गई हैं।
भारत ने परमाणु परीक्षणों पर स्वैच्छिक एकतरफा रोक जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही परमाणु हथियार रहित देशों को परमाणु हमले या हमले की धमकी से सुरक्षा देने के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी आश्वासन देने की वकालत की।
वैश्विक कानूनी ढांचे की मांग
भारत ने परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए ऐसी बहुपक्षीय व्यवस्था बनाने पर जोर दिया, जो सभी देशों पर समान रूप से लागू हो और जिसके पालन की पुष्टि की जा सके। तिवारी ने परमाणु हथियारों को तत्काल इस्तेमाल के लिए तैयार रखने से जुड़े जोखिम घटाने और इनके इस्तेमाल या इस्तेमाल की धमकी पर रोक लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय संधि पर बातचीत की मांग भी दोहराई।
उन्होंने कहा कि ऐसा सार्वभौमिक और कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता परमाणु हथियारों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए जरूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति तैयार करने में मदद कर सकता है। भारत ने आतंकवादियों और गैर-सरकारी तत्वों को परमाणु हथियारों, सामग्री और तकनीक तक पहुंचने से रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत भी बताई।
संयुक्त राष्ट्र की वित्तीय स्थिति पर चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासभा की पांचवीं समिति में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर सुरेंद्र अधाना ने संगठन की वित्तीय स्थिति पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत अपने निर्धारित वित्तीय योगदान का पूरा भुगतान समय पर करता रहा है और सदस्य देशों से भी अपने दायित्व पूरे करने की अपील की। उन्होंने कहा कि निर्धारित योगदान का पूरा, समय पर और बिना शर्त भुगतान करना प्रत्येक सदस्य देश का दायित्व है।
अधाना के मुताबिक, 2026 में संयुक्त राष्ट्र की नकदी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। 30 सितंबर तक अपने निर्धारित योगदान का पूरा भुगतान करने वाले देशों की संख्या बढ़कर 141 हो गई, जबकि पिछले साल यह 136 थी। संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट का बकाया घटकर 1.46 अरब डॉलर रह गया, लेकिन यह अब भी काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि इसका 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा एक ही सदस्य देश पर बकाया है।
शांति अभियानों के लिए बकाया राशि भी पिछले साल के 3.7 अरब डॉलर से बढ़कर 4.1 अरब डॉलर हो गई है। इसका लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा दो सदस्य देशों पर बकाया है। संयुक्त राष्ट्र के न्यायाधिकरणों से जुड़ा बकाया भी बढ़कर 8.7 करोड़ डॉलर हो गया है।
भारत ने बंद हो चुके शांति अभियानों के लिए सैनिकों और उनके उपकरणों से जुड़े लंबित दावों के करीब तीन करोड़ डॉलर का भुगतान जल्द करने की मांग की। अधाना ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभाने के लिए समय पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है।