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'लादेन को दी थी पनाह': यूएन में शहबाज के फर्जी दावों की भारत ने खोली पोल, कश्मीर राग अलापने पर सुनाई खरी-खरी
Sat, 26 Sep 2026 07:58 AM IST
देवेश त्रिपाठी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sat, 26 Sep 2026 07:58 AM IST
संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर भारत ने पाकिस्तान की ओर से उठाए गए कश्मीर और सिंधु जल संधि से जुड़े मुद्दों पर राइट टू रिप्लाई के जरिए जवाब दिया। भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के बयानों को खारिज करते हुए आतंकवाद, अल्पसंख्यकों की स्थिति और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया।
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यूएन में भारतीय मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र में भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर से सिंधु जल संधि पर दी गई गीदड़भभकी और कश्मीर राग छेड़ने को लेकर कड़ा जवाब दिया।
संयुक्त राष्ट्र में राइट टू रिप्लाई देते हुए भारतीय मिशन की प्रथम सचिव यानी फर्स्ट सेकेट्री पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का भाषण “बेतुकी बयानबाजी” से भरा था। उन्होंने कहा, ''आज दोपहर महासभा ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की ओर से कुछ बेहद अजीब टिप्पणियां सुनीं। यह उस समय हुआ है, जब न्यूयॉर्क शहर और पूरी दुनिया ने महज दो सप्ताह पहले 9/11 के भयावह आतंकी हमले की 25वीं बरसी मनाई है।''
लादेन को पनाह देने पर पाकिस्तान हुआ बेनकाब
पेटल गहलोत ने शहबाज शरीफ की बखिया उधेड़ते हुए कहा, ''9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रतिष्ठित अकादमी के ठीक पास रह रहा था। आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने जिस संस्था की हमारे सामने इतनी गहरी प्रशंसा और चापलूसी की, उसी से जुड़ा यह तथ्य है। पाकिस्तान के लोग खुद जिस सरकार को फॉर्म 47 की सरकार कहते हैं, उससे ऐसी बातें सुनना कोई आश्चर्य की बात नहीं है।''
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भारतीय राजनयिक ने आगे कहा, ''हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानव मूल्यों पर ऐसे शासन से पाखंडी उपदेश सुने, जिसकी राजधानी इस समय अपने ही लोगों से बचाने के लिए किले में तब्दील की जा रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए चलने वाली सरकार है। उनके कठपुतली शासक आते-जाते रह सकते हैं, लेकिन हमें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि असली फैसले कौन लेता है।''
'दिन में शांति की बात, रात में आतंकवाद'
उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान की वास्तविकता उसके 27वें संशोधन और उसके वास्तविक शासक को दी गई आजीवन छूट से सामने आती है। हमने जिन विचारों को सुना, वे ऐसे लोगों की ओर से आए हैं जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा रिकॉर्ड रहा है। वे दिन में सुरक्षा और शांति की बात करते हैं, लेकिन रात में वास्तव में आतंकवाद को अंजाम देते हैं।''
पेटल गहलोत ने कहा, ''इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता को लेकर उस शासन की ओर से टिप्पणियां की गईं, जिसकी बुनियाद ही ईशनिंदा कानूनों पर टिकी है। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी धार्मिक या नैतिक उपदेश दुनिया को गुमराह नहीं कर सकता।''
पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर में अपने ही लोगों पर अत्याचार
उन्होंने कहा, ''भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का भी जिक्र किया गया। यह मेरे देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा। अगर हमें कश्मीर की बात करनी ही है, तो हमारा ध्यान पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की ओर होना चाहिए। रावलकोट के लोगों से पूछिए कि वे लंबे समय से मनमानी हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का सामना कैसे कर रहे हैं। इस पूरे मुद्दे के केंद्र में पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद को लंबे समय से जारी रखने की नीति है।''
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर क्या बोलीं पेटल गहलोत?
गहलोत ने कहा, ''हमने पिछले साल दिखा दिया था कि आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की। आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का हम इस्तेमाल करेंगे और पाकिस्तान की ओर से जारी आतंकवाद के परिणाम होंगे। इससे स्वाभाविक रूप से उन संबंधों पर भी सवाल उठेंगे, जो मित्रता और सद्भावना की भावना पर आधारित माने जाते थे।''
उन्होंने कहा, ''हमें विश्वास है कि यह महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उसी रूप में देखेगी, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि उस रूप में, जैसा पाकिस्तान का प्रतिनिधि झूठे तरीके से उन्हें पेश करता है। साल-दर-साल झूठ दोहराने से वे सच नहीं हो जाते। पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए किसी लाभ का कारण बनेगा।''
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संयुक्त राष्ट्र में राइट टू रिप्लाई देते हुए भारतीय मिशन की प्रथम सचिव यानी फर्स्ट सेकेट्री पेटल गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का भाषण “बेतुकी बयानबाजी” से भरा था। उन्होंने कहा, ''आज दोपहर महासभा ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की ओर से कुछ बेहद अजीब टिप्पणियां सुनीं। यह उस समय हुआ है, जब न्यूयॉर्क शहर और पूरी दुनिया ने महज दो सप्ताह पहले 9/11 के भयावह आतंकी हमले की 25वीं बरसी मनाई है।''
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लादेन को पनाह देने पर पाकिस्तान हुआ बेनकाब
पेटल गहलोत ने शहबाज शरीफ की बखिया उधेड़ते हुए कहा, ''9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की सेना की प्रतिष्ठित अकादमी के ठीक पास रह रहा था। आज पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने जिस संस्था की हमारे सामने इतनी गहरी प्रशंसा और चापलूसी की, उसी से जुड़ा यह तथ्य है। पाकिस्तान के लोग खुद जिस सरकार को फॉर्म 47 की सरकार कहते हैं, उससे ऐसी बातें सुनना कोई आश्चर्य की बात नहीं है।''
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Watch: First Secretary @petal_gahlot exercises 🇮🇳’s Right of Reply at #UNGA81. @MEAIndia @IndianDiplomacy @UN @PMOIndia @DDNewslive @airnewsalerts pic.twitter.com/MEW1n7WIJW— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) September 26, 2026
भारतीय राजनयिक ने आगे कहा, ''हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानव मूल्यों पर ऐसे शासन से पाखंडी उपदेश सुने, जिसकी राजधानी इस समय अपने ही लोगों से बचाने के लिए किले में तब्दील की जा रही है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि यह सेना की, सेना द्वारा और सेना के लिए चलने वाली सरकार है। उनके कठपुतली शासक आते-जाते रह सकते हैं, लेकिन हमें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि असली फैसले कौन लेता है।''
'दिन में शांति की बात, रात में आतंकवाद'
उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान की वास्तविकता उसके 27वें संशोधन और उसके वास्तविक शासक को दी गई आजीवन छूट से सामने आती है। हमने जिन विचारों को सुना, वे ऐसे लोगों की ओर से आए हैं जिनका कट्टरता और नफरत का लंबा रिकॉर्ड रहा है। वे दिन में सुरक्षा और शांति की बात करते हैं, लेकिन रात में वास्तव में आतंकवाद को अंजाम देते हैं।''
पेटल गहलोत ने कहा, ''इस महासभा में धार्मिक असहिष्णुता को लेकर उस शासन की ओर से टिप्पणियां की गईं, जिसकी बुनियाद ही ईशनिंदा कानूनों पर टिकी है। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी धार्मिक या नैतिक उपदेश दुनिया को गुमराह नहीं कर सकता।''
पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर में अपने ही लोगों पर अत्याचार
उन्होंने कहा, ''भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का भी जिक्र किया गया। यह मेरे देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा। अगर हमें कश्मीर की बात करनी ही है, तो हमारा ध्यान पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की ओर होना चाहिए। रावलकोट के लोगों से पूछिए कि वे लंबे समय से मनमानी हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का सामना कैसे कर रहे हैं। इस पूरे मुद्दे के केंद्र में पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद को लंबे समय से जारी रखने की नीति है।''
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर क्या बोलीं पेटल गहलोत?
गहलोत ने कहा, ''हमने पिछले साल दिखा दिया था कि आतंकवादियों के पास न भागने की जगह होगी और न छिपने की। आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का हम इस्तेमाल करेंगे और पाकिस्तान की ओर से जारी आतंकवाद के परिणाम होंगे। इससे स्वाभाविक रूप से उन संबंधों पर भी सवाल उठेंगे, जो मित्रता और सद्भावना की भावना पर आधारित माने जाते थे।''
उन्होंने कहा, ''हमें विश्वास है कि यह महासभा पाकिस्तान और उसकी नीतियों को उसी रूप में देखेगी, जैसी वे वास्तव में हैं, न कि उस रूप में, जैसा पाकिस्तान का प्रतिनिधि झूठे तरीके से उन्हें पेश करता है। साल-दर-साल झूठ दोहराने से वे सच नहीं हो जाते। पाकिस्तान का आतंकवाद, छल और दोहरा रवैया न तो उसके लिए और न ही दुनिया के लिए किसी लाभ का कारण बनेगा।''