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सदियों पुराने रिश्ते, नई साझेदारी की तलाश: अजरबैजान के राष्ट्रपति से मिले भारतीय राजदूत अभय, क्या हुई बात?
Sat, 17 Oct 2026 07:43 PM IST
राकेश कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 17 Oct 2026 07:43 PM IST
भारत के राजदूत अभय कुमार ने 16 अक्तूबर को अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव को अपना परिचय पत्र सौंपा। मुलाकात में दोनों देशों के सदियों पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों के साथ भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सितंबर में बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति अलीयेव की मुलाकात का भी जिक्र किया गया। हालांकि, इस बैठक में किसी नए समझौते या परियोजना की घोषणा नहीं हुई।
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भारत-अजरबैजान संबंध
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत और अजरबैजान के रिश्ते सदियों पुराने हैं। अब दोनों देश इन संबंधों को आगे बढ़ाने के नए रास्ते तलाश रहे हैं। अजरबैजान में भारत के राजदूत अभय कुमार ने 16 अक्तूबर को राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से मुलाकात की और उन्हें अपना परिचय पत्र सौंपा। इस दौरान दोनों देशों के पुराने संबंधों, आपसी दोस्ती और भविष्य में साथ मिलकर काम करने की संभावनाओं पर बातचीत हुई।
पुराने रिश्तों को नए दौर से जोड़ने की कोशिश
राष्ट्रपति अलीयेव के साथ मुलाकात में राजदूत अभय कुमार ने भारत और अजरबैजान के संबंधों को और मजबूत बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच नजदीकी बढ़ाने और लोगों के आपसी जुड़ाव को गहरा करने के लिए वह हरसंभव प्रयास करेंगे। बातचीत का एक अहम पहलू यह रहा कि दोनों देश अपनी पुरानी दोस्ती को आगे के सहयोग का आधार बनाना चाहते हैं।
इतिहास और संस्कृति से जुड़ी है दोनों देशों की दोस्ती
भारत और अजरबैजान के संबंध केवल आज की कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव लंबे समय से रहा है। बैठक में भी इन पुराने संबंधों का जिक्र हुआ। दोनों पक्षों ने माना कि सदियों से चला आ रहा यह जुड़ाव आज भी दोनों देशों को करीब लाने में अहम भूमिका निभाता है। बातचीत में उन क्षेत्रों में साथ काम करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया, जहां दोनों देशों के हित जुड़े हैं। हालांकि, बैठक में किसी खास परियोजना, नए समझौते या निवेश योजना की घोषणा नहीं की गई। चर्चा का मुख्य विषय मौजूदा संबंधों को आगे बढ़ाना और सहयोग के नए अवसर तलाशना रहा।
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पीएम मोदी और अलीयेव की मुलाकात पर भी हुई चर्चा
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की सितंबर 2026 में हुई मुलाकात का भी जिक्र किया गया। दोनों नेता किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर मिले थे।
दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर हुई इस बातचीत को आपसी समझ बढ़ाने और संबंधों को आगे ले जाने के लिहाज से अहम माना गया। राजदूत अभय कुमार और राष्ट्रपति अलीयेव की मुलाकात में भी उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने के महत्व पर चर्चा हुई। ऐसे संवाद से दोनों देशों को एक-दूसरे की प्राथमिकताओं को समझने और आपसी हितों के मुद्दों पर आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
यह भी पढ़ें: नेपाल-चीन सीमा आपदा: तबाही से 48 दिन पहले ही उपग्रहों ने दिए थे संकेत, आईसीआईएमओडी की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
अब सहयोग के नए रास्तों पर नजर
भारत और अजरबैजान के बीच आगे की बातचीत का एक अहम पहलू यह है कि पुराने ऐतिहासिक संबंधों को मौजूदा जरूरतों के साथ कैसे जोड़ा जाए। दोनों पक्षों ने आपसी हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया। साथ ही, दोस्ती और आपसी सद्भाव के आधार पर दोनों देशों के बीच संपर्क और साझेदारी को आगे ले जाने की बात हुई। फिलहाल इस मुलाकात में किसी नई पहल या ठोस समझौते का एलान नहीं हुआ है। लेकिन बातचीत से यह साफ है कि भारत और अजरबैजान अपने पुराने संबंधों को बनाए रखते हुए उन्हें और व्यापक बनाने के इच्छुक हैं।
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पुराने रिश्तों को नए दौर से जोड़ने की कोशिश
राष्ट्रपति अलीयेव के साथ मुलाकात में राजदूत अभय कुमार ने भारत और अजरबैजान के संबंधों को और मजबूत बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच नजदीकी बढ़ाने और लोगों के आपसी जुड़ाव को गहरा करने के लिए वह हरसंभव प्रयास करेंगे। बातचीत का एक अहम पहलू यह रहा कि दोनों देश अपनी पुरानी दोस्ती को आगे के सहयोग का आधार बनाना चाहते हैं।
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इतिहास और संस्कृति से जुड़ी है दोनों देशों की दोस्ती
भारत और अजरबैजान के संबंध केवल आज की कूटनीति तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव लंबे समय से रहा है। बैठक में भी इन पुराने संबंधों का जिक्र हुआ। दोनों पक्षों ने माना कि सदियों से चला आ रहा यह जुड़ाव आज भी दोनों देशों को करीब लाने में अहम भूमिका निभाता है। बातचीत में उन क्षेत्रों में साथ काम करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया, जहां दोनों देशों के हित जुड़े हैं। हालांकि, बैठक में किसी खास परियोजना, नए समझौते या निवेश योजना की घोषणा नहीं की गई। चर्चा का मुख्य विषय मौजूदा संबंधों को आगे बढ़ाना और सहयोग के नए अवसर तलाशना रहा।
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पीएम मोदी और अलीयेव की मुलाकात पर भी हुई चर्चा
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की सितंबर 2026 में हुई मुलाकात का भी जिक्र किया गया। दोनों नेता किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर मिले थे।
दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर हुई इस बातचीत को आपसी समझ बढ़ाने और संबंधों को आगे ले जाने के लिहाज से अहम माना गया। राजदूत अभय कुमार और राष्ट्रपति अलीयेव की मुलाकात में भी उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने के महत्व पर चर्चा हुई। ऐसे संवाद से दोनों देशों को एक-दूसरे की प्राथमिकताओं को समझने और आपसी हितों के मुद्दों पर आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
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अब सहयोग के नए रास्तों पर नजर
भारत और अजरबैजान के बीच आगे की बातचीत का एक अहम पहलू यह है कि पुराने ऐतिहासिक संबंधों को मौजूदा जरूरतों के साथ कैसे जोड़ा जाए। दोनों पक्षों ने आपसी हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया। साथ ही, दोस्ती और आपसी सद्भाव के आधार पर दोनों देशों के बीच संपर्क और साझेदारी को आगे ले जाने की बात हुई। फिलहाल इस मुलाकात में किसी नई पहल या ठोस समझौते का एलान नहीं हुआ है। लेकिन बातचीत से यह साफ है कि भारत और अजरबैजान अपने पुराने संबंधों को बनाए रखते हुए उन्हें और व्यापक बनाने के इच्छुक हैं।