गोबी रेगिस्तान में परीक्षण: चीन में इसी महीने थोरियम संचालित परमाणु संयंत्र के परीक्षण की तैयारी
चीन के गान्सू प्रांत की सरकार के हवाले से जर्मन वेबसाइट खबर दी है कि वुवेई स्थित प्लांट का निर्माण कार्य इस महीने के आरंभ में पूरा हो गया। परीक्षण के तौर पर उसका संचालन इसी महीने शुरू किया जाएगा। थोरियम सिल्वर कलर का रेडियो एक्टिव धातु है, जो चट्टानों के बीच पाया जाता है। अभी इसका औद्योगिक स्तर पर बहुत कम उपयोग होता है...
विस्तार
चीन जल्द ही थोरियम से चलने वाले परमाणु संयंत्र का परीक्षण करने वाला है। ये परीक्षण गोबी रेगिस्तान में स्थित वुवेई नाम की जगह पर किया जाएगा। थोरियम को परमाणु ऊर्जा बनाने का सस्ता और अपेक्षाकृत सुरक्षित स्रोत समझा जाता है। इसके संयंत्र को ठंडा करने के लिए पानी की जरूरत नहीं होती, जैसा कि यूरेनियम के मामले में होता है। लेकिन अभी थोरियम से व्यापारिक स्तर की परमाणु ऊर्जा बनाने की क्षमता किसी देश के पास नहीं है।
जर्मनी की वेबसाइट स्पेक्ट्रम.डी में छपी एक खबर के मुताबिक थोरियम से व्यापारिक मकसद के लिए परमाणु संयंत्र संचालित करने का परीक्षण करने वाला चीन पहला देश होगा। इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन में तैयार किया गया रिएक्टर इस मामले में असामान्य है कि उसके अंदर पानी के बजाय पिघले हुए लवण परमाणु रॉड के चक्कर लगाएंगे। ये प्रयोग सफल रहा, तो उससे चीन ऐसा परमाणु संयंत्र बनाने में सफल हो जाएगा, जिससे लंबी अवधि तक रेडियो एक्टिव रहने वाला कचरा परंपरागत रिएक्टरों की तुलना में कम मात्रा में पैदा होगा।
बताया जाता है कि जिस संयंत्र का परीक्षण होने वाला है, उसका संचालन शंघाई इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड फीजिक्स के हाथ में है। इस रिएक्टर से सिर्फ दो मेगावट बिजली पैदा होगी, जो 1000 घरों की जरूरत को पूरी करने लायक होगी। लेकिन अगर प्रयोग सफल रहा, तो चीन 2030 तक 373 मेगावाट क्षमता का एक रिएक्टर लगाने की दिशा में आगे बढ़ेगा। उस संयंत्र से लाखों घरों की बिजली की जरूरत पूरी की जा सकेगी।
चीन के गान्सू प्रांत की सरकार के हवाले से जर्मन वेबसाइट खबर दी है कि वुवेई स्थित प्लांट का निर्माण कार्य इस महीने के आरंभ में पूरा हो गया। परीक्षण के तौर पर उसका संचालन इसी महीने शुरू किया जाएगा। वेबसाइट एशिया टाइम्स पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक थोरियम सिल्वर कलर का रेडियो एक्टिव धातु है, जो चट्टानों के बीच पाया जाता है। अभी इसका औद्योगिक स्तर पर बहुत कम उपयोग होता है। चीन में खनिज पदार्थ रेयर अर्थ के खनन के दौरान बाइ प्रोडक्ट के रूप में थोरियम काफी मात्रा में प्राप्त हो रहा है। इसलिए चीन को फिलहाल इसका आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सिडनी स्थित ऑस्ट्रेलियन न्यूक्लीयर साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑर्गेनाइजेश में परमाणु इंजीनियर लिंडन एडवर्ड्स ने एशिया टाइम्स से कहा- ‘थोरियम का भंडार यूरेनियम की तुलना में अधिक मात्रा में उपलब्ध है। इसलिए थोरियम से बिजली बनाने की तकनीक अगले 50 से 100 सालों तक के लिए उपयोगी होगी। उसके बाद अनुमान है कि थोरियम का भंडार खत्म हो जाएगा।’
बीजिंग स्थित एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल डेवलपमेंट में ऊर्जा मॉडल निर्माता जियांग किजुन ने एशिया टाइम्स से कहा- ‘जो रिएक्टर तैयार हुआ है, वह साल 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने के चीन के उद्देश्य के लिहाज से बिल्कुल सटीक तकनीक है।’ विशेषज्ञों के मुताबिक परमाणु संयंत्र में बतौर ईंधन थोरियम का इस्तेमाल करने के बारे में परीक्षण अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन और भारत में भी चल रहा है। लेकिन ऐसा लगता है कि इस धातु संचालित परमाणु सयंत्र तैयार करने में फिलहाल चीन ने बाजी मार ली है।