उपेंद्र कुशवाहा
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जन्म- 2 जून 1960
पार्टी- राष्ट्रीय लोक समता पार्टी
पिछले लोक सभा चुनावों में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) ने जितनी सीटों पर चुनाव लड़ा, सब पर जीत पाई। पहली बार चुनावों में उतरी रालोसपा की सफलता के आंकड़े ने ही उसके कार्यकताओं को ये साहस दिया कि उन्होंने अपने अध्यक्षउपेंद्र कुशवाहा के लिए भारतीय जनता पार्टी से मुख्यमंत्री पद मांग लिया। बिहार की राजनीति में जिन नेताओं को उभार धूमकेतु की तरह हुआ, उपेंद्र कुशवाहा उनमें से एक हैं।
लोक सभा चुनावों से मात्र एक साल पहले उन्होंने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का गठन किया। कुशवाहा की कोईरी वोट बैंक पर वैसी है पकड़ ही जैसे लालू प्रसाद यादव की यादव वोटबैंक और नीतीश कुमार की कुर्मी वोट बैंक पर। बिहार में तकरीबन 8 फीसदी कोईरी मतदाता हैं। लोक सभा चुनावों से पहले सामाजिक समीकरणों को साधने में जुटी भाजपा को कुशवाह की यही ताकत रास आई। कोईरी वोटों को लुभाने के लिए भाजपा ने कुशवाहा की बिल्कुल ही कच्ची रालोसपा से गठबंधन किया और उन्हें तीन सीटें दीं। ये सीटें थीं काराकाट, जहानाबाद और सीतामढ़ी। रालोसपा तीनों ही सीटों पर कामयाब रही। और उपेंद्र कुशवाहा केंद्र में मानव संसाधन विकास मंत्री बने। विधान सभा चुनावमें रालोसपा 25 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
55 वर्षीय कुशवाहा ने 1985 में राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वे लालू प्रसाद यादव की सामाजिक राजनीति के प्रशंसक थे और लंबे समय तक उनके सहयोगी रहे। कांग्रेस के वे पुरजोर विरोधी रहे हैं, इसलिए जैसे-जैसे लालू की कांग्रेस से नजदीकियां बढ़ीं, कुशवाहा की उनसे दूरी बढ़ती गई। 2000 से 2005 तक वे बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। 2004 में वे बिहार विधानसभा चुनाव में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। हालांकि 2005 में नीतीश कुमार के साथ संबंध ठीक न होने कारण उन्होंने जदयू छोड़ दिया।