डिजिटल फास्टिंग क्या है?

अमर उजाला

Tue, 13 January 2026

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डिजिटल फास्टिंग जिसे 'डिजिटल डिटॉक्स' भी कहा जाता है, एक निश्चित अवधि के लिए स्मार्टफोन, लैपटॉप, सोशल मीडिया और इंटरनेट जैसे सभी डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाने की प्रक्रिया है। 
 

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जैसे हम शरीर की शुद्धि के लिए भोजन का उपवास रखते हैं, वैसे ही मानसिक शांति और मस्तिष्क की 'सर्विसिंग' के लिए डिजिटल फास्टिंग जरूरी है।

 

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मानसिक शांति और एकाग्रता

हर समय नोटिफिकेशन और सूचनाओं के बोझ से मस्तिष्क थक जाता है। डिजिटल फास्टिंग से 'डोपामाइन' का स्तर संतुलित होता है, जिससे तनाव कम होता है और फोकस बढ़ता है।
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बेहतर नींद

मोबाइल से निकलने वाली 'ब्लू लाइट' नींद के हार्मोन मेलाटोनिन को रोकती है। सोने से पहले डिजिटल उपवास करने से नींद गहरी और अच्छी आती है।
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रिश्तों में सुधार

स्क्रीन से नजर हटती है तो हम अपने परिवार और दोस्तों को गुणवत्तापूर्ण समय दे पाते हैं, जिससे सामाजिक और भावनात्मक संबंध मजबूत होते हैं।
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क्रिएटिविटी में वृद्धि

जब दिमाग खाली और शांत होता है, तब नए और रचनात्मक विचार जन्म लेते हैं।

 
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