Urdu Poetry: हर सू बहार पेश-ए-नज़र है बसंत की

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

Image Credit :

साक़ी कुछ आज तुझ को ख़बर है बसंत की
हर सू बहार पेश-ए-नज़र है बसंत की
- उफ़ुक़ लखनवी   

Image Credit :

दिल को बहुत अज़ीज़ है आना बसंत का
'रहबर' की ज़िंदगी में समाना बसंत का
- जितेन्द्र मोहन सिन्हा रहबर 

Image Credit :

जोबन पर इन दिनों है बहार-ए-नशात-ए-बाग़
लेता है फूल भर के यहाँ झोलियाँ बसंत
- मुनीर शिकोहाबादी

Image Credit :

हर सम्त सब्ज़ा-ज़ार बिछाना बसंत का
फूलों में रंग-ओ-बू को लुटाना बसंत का
- जितेन्द्र मोहन सिन्हा रहबर

Image Credit :

या तेरे अलावा भी किसी शय की तलब है
या अपनी मोहब्बत पे भरोसा नहीं हम को
- शहरयार

Image Credit :

'नज़ीर' लोग तो चेहरे बदलते रहते हैं
तू इतना सादा न बन मुस्कुराहटें पहचान
- नज़ीर तबस्सुम 

Image Credit :

Dagh Dehalvi Shayari: मोहब्बतों के शायर दाग़ देहलवी के अशआर

social media
Read Now