UK: 77 वर्षीय बुजुर्ग को सड़क तक पहुंचाने में लगे चार घंटे, ढाई किमी का दुर्गम रास्ता बना मुसीबत
सिंगरौं गांव में सरस्वती देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई, लेकिन 2.5 किलोमीटर के दुर्गम पैदल रास्ते के कारण परिजनों को उन्हें सड़क तक पहुंचाने में चार घंटे से अधिक लग गए।
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पहाड़ में सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी की तस्वीर सल्ट विकासखंड के राजस्व ग्राम सिंगरौं में सामने आई। गांव की 77 वर्षीय सरस्वती देवी की अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें उपचार के लिए सड़क तक पहुंचाने में परिजनों को चार घंटे से अधिक समय लग गया। ढाई किलोमीटर के दुर्गम पैदल रास्ते पर परिजनों ने पहले उन्हें कंधों के सहारे ले जाने का प्रयास किया, लेकिन बदहाल रास्ते के कारण आधा सफर तय करना भी मुश्किल हो गया।
बरसात के चलते पगडंडी घास और झाड़ियों से पूरी तरह ढक चुकी है। रास्ते में सांप, बिच्छू और तेंदुए का खतरा भी बना रहता है। ऐसे हालात में सरस्वती देवी को लेकर परिजन जगह-जगह रुकते और उन्हें बैठाते हुए आगे बढ़े। करीब तीन घंटे में जब आधा रास्ता भी पूरा नहीं हो सका तो मजबूर होकर रास्ते में नेपाली मजदूरों को बुलाया गया। मजदूरों ने बुजुर्ग महिला को अपनी पीठ के सहारे ढाई किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पार कर सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद परिजन निजी वाहन से उन्हें उपचार के लिए काशीपुर ले गए।
सरस्वती देवी के तीन बेटे दिनेश सिंह बोरा, पुष्कर सिंह बोरा और प्रताप सिंह बोरा रोजगार के लिए गांव से पलायन कर दिल्ली में परिवार के साथ रहते हैं। उनकी एक बेटी तराड़ और दूसरी काशीपुर में रहती है। गांव का घर पूरी तरह सूना न हो, इस उम्मीद में बुजुर्ग महिला गांव में ही रह रही थीं। तबीयत बिगड़ने की सूचना पर उनकी बेटी हेमा अपने पति के साथ तराड़ से पहुंचीं, जबकि तल्ली भ्याड़ी और काशीपुर से उनकी नातिनें भी गांव पहुंचीं और महिला को सड़क तक लाने के प्रयास में जुटीं।
सड़क के अभाव में खाली होता जा रहा गांव
ग्रामसभा तल्ली पोखरी का राजस्व ग्राम सिंगरौं आज सड़क और रोजगार के अभाव में पलायन की मार झेल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न तो डोली की व्यवस्था है और न ही रास्ता इतना चौड़ा है कि बीमार व्यक्ति को चारपाई पर सड़क तक लाया जा सके। ढाई किलोमीटर की पैदल पगडंडी भी बरसात में झाड़ियों और घास से ढक जाती है। ऐसे में किसी बुजुर्ग या गंभीर मरीज को सड़क तक पहुंचाना हर बार एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
हैरानी की बात यह है कि गांव के लिए कई बार सड़क का सर्वे होने के बावजूद अब तक सड़क धरातल पर नहीं उतर सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और रोजगार की कमी के कारण गांव से लगातार पलायन हुआ और अब यहां गिने-चुने परिवार ही रह गए हैं।
- बचपन से देख रही हूं गांव के हालात खराब होते जा रहे हैं, किसी तरह का बदलाव देखने को नहीं मिला, रोजगार के लिए सभी भाई शहरों में बस गये। गांव में सड़क नहीं होने से मां को सड़क तक पहुंचाने के लिए नेपाली मजदूरों को बुलाना पड़ा। हेमा अधिकारी, पुत्री-
- गांव जाने वाला एकमात्र पगडंडी वाला रास्ता है, जो बहुत सकरा है। सड़क नहीं होने से गांव में बीमार और गर्भवती महिलाओं को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। - भीम सिंह बोरा, ग्रामीण
- गांव तक संपर्क मार्ग के लिए क्षेत्रीय विधायक महेश जीना को प्रस्ताव दिया गया है। विधायक ने आश्वासन दिया गया है कि जल्द ही संपर्क मार्ग गांव में बनाया जाएगा। - भावना देवी, ग्राम प्रधान तल्ली पोखरी
हमारी सरकार हर गांव को सड़क से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। मेरे क्षेत्र में लगातार गांवों तक सड़कें पहुंचाई जा रही हैं। अगर कोई गांव छूट गया है तो वहां भी सड़क पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
- महेश जीना, विधायक सल्ट
मामला मेरे संज्ञान में अभी आया है। इसकी जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे। - रिंकू बिष्ट, उपजिलाधिकारी सल्ट