{"_id":"6a8754751fa37917660b292d","slug":"tulsidas-was-a-hero-of-his-era-who-propagated-indian-culture-through-the-story-of-rama-dr-bharat-bhushan-varanasi-news-c-20-vns1022-1513495-2026-08-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"तुलसीदास युग नायक, रामकथा से भारतीय संस्कृति का किया निर्यात: डॉ. भारत भूषण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तुलसीदास युग नायक, रामकथा से भारतीय संस्कृति का किया निर्यात: डॉ. भारत भूषण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। तुलसी जयंती पर अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास की ओर से आयोजित दो दिवसीय तुलसी जयंती समारोह के दूसरे व अंतिम दिन बृहस्पतिवार को तुलसी घाट पर मानस व्यास सम्मेलन हुआ। अखाड़ा के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र के सानिध्य में देशभर से आए मानस वक्ताओं ने कहा कि तुलसीदास ने जन-जन तक प्रभु श्रीराम के जीवन दर्शन को पहुंचाया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज में जब मानवीय मूल्य, सामाजिक समरसता और नैतिक आदर्श कमजोर हो रहे हैं, तब तुलसीदास के विचार और उनका साहित्य हमें नई दशा और दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से विभिन्न वर्गों, विचारों और संस्कृतियों के बीच अद्भुत समन्वय स्थापित किया। प्रो. नलिन श्याम कामिल ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने मानस की रचना से लोकमंगल और लोक कल्याण का कार्य किया है। हमसे कहीं ज्यादा विदेशी विद्वानों ने इस ग्रंथ का लाभ उठाया और पाश्चात्य की दिशा बदलने का काम किया।
डॉ. भारत भूषण पांडेय ने कहा कि तुलसीदास युग नायक हैं। उन्होंने रामकथा के माध्यम से भारतीय संस्कृति का बेहतर निर्यात किया। पं. रामचीज उपाध्याय, पं. यज्ञेश मिश्र, डॉ. धर्म प्रकाश मिश्रा, पारस पांडेय, पं. रामकृष्ण त्रिपाठी, सच्चिदानंद त्रिपाठी, रमेश चंद्र पाठक, चंद्रकांत चतुर्वेदी, रितुराज कात्यायन सहित अनेक विद्वानों ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से परिवार और समाज में माता-पिता, भाई और पति-पत्नी के कर्तव्यों, मर्यादा और आचरण के लिए जो सीख दी है, वह आज भी प्रासंगिक है। उनका साहित्य जातिगत, क्षेत्रीय और वैचारिक भेदभाव से ग्रस्त समाज को दिशा देने के लिए बहुत उपयोगी है। प्रारंभ में तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। संचालन पं. राघवेंद्र पाण्डेय ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आधुनिक समाज में जब मानवीय मूल्य, सामाजिक समरसता और नैतिक आदर्श कमजोर हो रहे हैं, तब तुलसीदास के विचार और उनका साहित्य हमें नई दशा और दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने अपने काव्य के माध्यम से विभिन्न वर्गों, विचारों और संस्कृतियों के बीच अद्भुत समन्वय स्थापित किया। प्रो. नलिन श्याम कामिल ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने मानस की रचना से लोकमंगल और लोक कल्याण का कार्य किया है। हमसे कहीं ज्यादा विदेशी विद्वानों ने इस ग्रंथ का लाभ उठाया और पाश्चात्य की दिशा बदलने का काम किया।
विज्ञापन
डॉ. भारत भूषण पांडेय ने कहा कि तुलसीदास युग नायक हैं। उन्होंने रामकथा के माध्यम से भारतीय संस्कृति का बेहतर निर्यात किया। पं. रामचीज उपाध्याय, पं. यज्ञेश मिश्र, डॉ. धर्म प्रकाश मिश्रा, पारस पांडेय, पं. रामकृष्ण त्रिपाठी, सच्चिदानंद त्रिपाठी, रमेश चंद्र पाठक, चंद्रकांत चतुर्वेदी, रितुराज कात्यायन सहित अनेक विद्वानों ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के माध्यम से परिवार और समाज में माता-पिता, भाई और पति-पत्नी के कर्तव्यों, मर्यादा और आचरण के लिए जो सीख दी है, वह आज भी प्रासंगिक है। उनका साहित्य जातिगत, क्षेत्रीय और वैचारिक भेदभाव से ग्रस्त समाज को दिशा देने के लिए बहुत उपयोगी है। प्रारंभ में तुलसीदास के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। संचालन पं. राघवेंद्र पाण्डेय ने किया।
विज्ञापन