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Varanasi News: महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तराखंड और ओडिशा के लोकनृत्य से सजी केंद्रीय विद्यालय की शाम
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बीएचयू के पं. ओंकरनाथ ठाकुर ऑडिटोरियम में केंद्रीय विद्यालय संगठन वाराणसी संभाग की ओर से कला उ
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वाराणसी। एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल लोगों के मन में देश की विविधता में एकता के भाव जगाना है। साथ ही देश की विभिन्न संस्कृतियों से परिचय कराना भी है। यह बातें बृहस्पतिवार को बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने केंद्रीय विद्यालय बीएचयू में आयोजित एक भारत श्रेष्ठ भारत एवं कला उत्सव के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कहीं। इस उत्सव में 260 छात्रों की हिस्सेदारी है।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तराखंड और ओडिशा के लोकनृत्य की प्रस्तुति कर सबका मनमोह लिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्यालय संस्थान पूरे भारत को जोड़ने का कार्य करते हैं। जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक इनमें पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति में एकरूपता है। किसी भी केंद्रीय विद्यालय में जाने पर हम भारत में हैं... का भाव उत्पन्न होता है। कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने भारत की विविधता की तुलना इंद्रधनुष और विभिन्न रंगों के फूलों से की। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न संस्कृतियों, कलाओं और नृत्य परंपराओं को समेटे हुए एक अद्भुत देश है। केंद्रीय विद्यालय संगठन वाराणसी संभाग की उपायुक्त डॉ. सुकृति रैवानी ने इसे राष्ट्रीय एकता पर्व बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् और स्वागत गीत के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तराखंड और ओडिशा के लोकनृत्य प्रस्तुत किए। भरतनाट्यम और कथक सहित अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं। दो दिवसीय आयोजन के दौरान विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से देश की विविध लोक कलाओं, संस्कृति और भाषाओं का परिचय दिया जाएगा। प्रधानाचार्य एके सिंह ने बताया कि इस जोनल स्तर की प्रतियोगिता में कुल 260 विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। चयनित प्रतिभागी आगे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। इसके बाद एनसीईआरटी द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के अंत में सहायक आयुक्त विजय कुमार सोलंकी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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कार्यक्रम में महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तराखंड और ओडिशा के लोकनृत्य की प्रस्तुति कर सबका मनमोह लिया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्यालय संस्थान पूरे भारत को जोड़ने का कार्य करते हैं। जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक इनमें पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति में एकरूपता है। किसी भी केंद्रीय विद्यालय में जाने पर हम भारत में हैं... का भाव उत्पन्न होता है। कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने भारत की विविधता की तुलना इंद्रधनुष और विभिन्न रंगों के फूलों से की। उन्होंने कहा कि भारत विभिन्न संस्कृतियों, कलाओं और नृत्य परंपराओं को समेटे हुए एक अद्भुत देश है। केंद्रीय विद्यालय संगठन वाराणसी संभाग की उपायुक्त डॉ. सुकृति रैवानी ने इसे राष्ट्रीय एकता पर्व बताया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् और स्वागत गीत के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तराखंड और ओडिशा के लोकनृत्य प्रस्तुत किए। भरतनाट्यम और कथक सहित अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं। दो दिवसीय आयोजन के दौरान विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से देश की विविध लोक कलाओं, संस्कृति और भाषाओं का परिचय दिया जाएगा। प्रधानाचार्य एके सिंह ने बताया कि इस जोनल स्तर की प्रतियोगिता में कुल 260 विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। चयनित प्रतिभागी आगे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे। इसके बाद एनसीईआरटी द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के अंत में सहायक आयुक्त विजय कुमार सोलंकी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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