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आईआईटी बीएचयू की नई तकनीक: हरी रोशनी पड़ते ही खत्म होंगे बैक्टीरिया, अंतरराष्ट्रीय जर्नल में शोध को मिली जगह
Fri, 09 Oct 2026 11:36 AM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:36 AM IST
आईआईटी बीएचयू की नई तकनीक बैक्टीरिया और उसकी दीवार को तोड़ेगी। लाइट-एक्टिव टेक्नोलॉजी जो हरी रोशनी के संपर्क में आने पर बैक्टीरिया को नष्ट करेगी। इस शोधकार्य को नेचर पोर्टफोलियो जर्नल ‘कम्युनिकेशंस केमिस्ट्री’ में प्रकाशित किया गया है।
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डॉ. सुदीप मुखर्जी, डॉ. साम्या बैनर्जी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आईआईटी बीएचयू के दो शोध समूहों ने मिलकर बैक्टीरिया से लड़ने की नई तकनीक विकसित की है। इसे लाइट-एक्टिव टेक्नोलॉजी का नाम दिया गया है जो कि हरी रोशनी के संपर्क में आने पर बैक्टीरिया को नष्ट करने में प्रभावी है। हरी रोशनी से सक्रिय होकर ये तकनीक बैक्टीरिया और बायोफिल्म को नष्ट करती है। यह रिसर्च नेचर पोर्टफोलियो जर्नल ‘कम्युनिकेशंस केमिस्ट्री’ में प्रकाशित किया गया है।
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बैक्टीरिया से बनी बायोफिल्म संक्रमण के इलाज में बड़ी चुनौती होती है। यह एक तरह की सुरक्षात्मक परत होती है, जिसके भीतर बैक्टीरिया सुरक्षित रहते हैं और संक्रमण को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं।
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रसायन विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. साम्या बनर्जी और स्कूल ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के डॉ. सुदीप मुखर्जी के लैब में ये रिसर्च हुआ है। यहां बैक्टीरिया से संक्रमित घाव वाले चूहों पर अध्ययन किया गया। इलाज के 11वें दिन घाव करीब 99 फीसदी तक ठीक हो गए।
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ओएस-1 को हरी रोशनी के साथ इस्तेमाल करने पर ई. कोलाई और बैसिलस सब्टिलिस की बायोफिल्म में करीब 85 फीसदी तक कमी आई। इस शोध का शीर्षक ‘ग्रीन-लाइट-एक्टिवेटेड ओस्मियम, मेटालोफोटो एंटीबायोटिक्स फॉर एंटीबैक्टीरियल थेरेपी एंड इन्फेक्टेड वाउंड हीलिंग’ है।
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हरी रोशनी के संपर्क में आकर निकलते हैं ऑक्सीजन के अणु
शोधकर्ताओं ने ऑस्मियम आधारित तीन विशेष यौगिक विकसित किए हैं, जिन्हें मेटालो-फोटोएंटीबायोटिक्स कहा जाता है। इनकी खासियत यह है कि हरी रोशनी के संपर्क में आने पर ये सक्रिय होकर ऐसे प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन अणु उत्पन्न करते हैं, जो बैक्टीरिया की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और उनकी वृद्धि को रोकते हैं। शोध में इन यौगिकों का परीक्षण ई. कोलाई, स्टैफिलोकोकस ऑरियस और बैसिलस सब्टिलिस जैसे बैक्टीरिया पर किया गया। तीनों यौगिकों में ओएस-1 ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इस शोध दल में अपूर्व मंडल, देबायनी चक्रवर्ती, आरिफ अली मंडल, रोहित पांडेय, आशीष कुमार अग्रवाल, राशि गौतम और स्वीटी तिवारी भी शामिल हैं। शोध में फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों का योगदान रहा।
शोधकर्ताओं ने ऑस्मियम आधारित तीन विशेष यौगिक विकसित किए हैं, जिन्हें मेटालो-फोटोएंटीबायोटिक्स कहा जाता है। इनकी खासियत यह है कि हरी रोशनी के संपर्क में आने पर ये सक्रिय होकर ऐसे प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन अणु उत्पन्न करते हैं, जो बैक्टीरिया की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और उनकी वृद्धि को रोकते हैं। शोध में इन यौगिकों का परीक्षण ई. कोलाई, स्टैफिलोकोकस ऑरियस और बैसिलस सब्टिलिस जैसे बैक्टीरिया पर किया गया। तीनों यौगिकों में ओएस-1 ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इस शोध दल में अपूर्व मंडल, देबायनी चक्रवर्ती, आरिफ अली मंडल, रोहित पांडेय, आशीष कुमार अग्रवाल, राशि गौतम और स्वीटी तिवारी भी शामिल हैं। शोध में फार्मास्यूटिकल इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों का योगदान रहा।