सुविधा: पूर्वांचल में पहली बार एक कमरे से कंट्रोल होंगे 50 उपकेंद्र, शटडाउन के लिए यहां से लेनी होगी अनुमति
पूर्वांचल में पहली बार एक कमरे से 50 उपकेंद्र कंट्रोल होंगे। वहीं शटडाउन के लिए एमडी कार्यालय से अनुमति लेनी होगी। पूर्वांचल डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक कार्यालय परिसर में कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। यहां 12 इंजीनियर की टीम होगी।
विस्तार
आगामी गर्मी में वाराणसी जिले के उपभोक्ताओं को बिजली कटौती, ट्रिपिंग, ट्रांसफार्मर जलने और शटडाउन से छुटकारा मिल जाएगा। पूर्वांचल डिस्काॅम मुख्यालय पर स्काडा ऑटोमेशन के तहत कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। कंट्रोल रूम से 50 उपकेंद्रों की निगरानी की जाएगी। कंट्रोल रूम से ही किसी भी प्रकार की कमियों और फॉल्ट का पता चल जाएगा। जिसे तत्काल ठीक किया जा सकेगा। साथ ही कोई भी अभियंता क्षेत्र में अपनी मर्जी से शटडाउन नहीं ले सकेगा, पहले अनुमति लेनी होगी। लगातार निगरानी के लिए 12 विशेषज्ञों की टीम लगाई जाएगी।
जिले में हो रही अघोषित कटौती, ट्रांसफॉर्मर जलने, ट्रिपिंग, लो वोल्टेज से जल्द ही राहत मिलेगी। पूर्वांचल डिस्कॉम की ओर से वाराणसी में विशेष तौर पर स्काडा ऑटोमेशन तकनीक से भिखारीपुर हाइडिल कॉलाेनी में कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। निर्माण शुरू हो चुका है।
827 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इस कंट्रोल रूम से पहले चरण में जिले के 50 उपकेंद्र जोड़े जाएंगे। इसमें 44 शहरी और 6 ग्रामीण उपकेंद्र होंगे। इन सभी केंद्रों पर आरटीयू यानी रिमोट टर्मिनल यूनिट स्थापित किया जाएगा। इससे उपकेंद्रों पर कोई भी फॉल्ट होगा तो तुरंत पता चल जाएगा। इस कंट्रोल रूम के चालू होने के बाद इन उपकेंद्रों से जुड़े फीडरों पर शटडाउन नहीं मिल पाएगा।
शटडाउन लेने से पहले कंट्रोल रूम प्रभारी या तकनीकी टीम को जानकारी देनी होगी। ऑटोमेटिक निगरानी से फॉल्ट न के बराबर होंगे। पहले चरण में वाराणसी में इस तकनीक के तहत निगरानी होगी। इसके बाद पूर्वांचल डिस्कॉम में अन्य मंडल मुख्यालयों पर भी इसे स्थापित करने पर विचार किया जाएगा।
50 उपकेंद्रों से जुड़े सभी ट्रांसफार्मरों पर लगेंगे सेंसर
बिजली निगम की ओर से तैयार किए जा रहे हाईटेक निगरानी नेटवर्क के तहत ट्रांसफार्मरों में सेंसर लगाया जाएगा। पहले चरण में 50 उपकेंद्रों के 300 ट्रांसफॉर्मरों में सेंसर इंस्टॉल किए जाएंगे। ट्रांसफार्मरों के लोड बैलेंस करने, तेल मापन में सहूलियत होगी। इसके लगने से ट्रांसफार्मरों के जलने की संख्या में भारी कमी आएगी।
अब तक लगाए गए 750 नए ट्रांसफॉर्मर
निगम की ओर से मार्च से लेकर अब तक 750 नये ट्रांसफॉर्मर लगा दिए गए हैं। यह सभी ट्रांसफॉर्मर 63 और 100 केवीए के हैं। इन सभी को बदलने के साथ ही पुराने ट्रांसफॉर्मरों की मरम्मत, तेल डालने के काम भी किए गए हैं। जिससे आपात स्थिति में उनका प्रयोग कर तत्काल आपूर्ति बहाल की जा सके। ट्रॉली ट्रांसफॉर्मरों की संख्या भी बढ़ाई गई है।
शहर के 15 मार्गों पर अंडर ग्राउंड केबिलिंग का काम किया जा रहा है। इनमें से मैदागिन से गोदौलिया और मकबूल आलम रोड पर काम पूरा भी हो चुका है। शेष 13 मार्गों पर काम जारी है। इन मार्गों पर अंडर ग्राउंड केबलिंग होने के बाद खंभे और तारों के जंजाल नहीं दिखेंगे। इससे सड़कों का अतिक्रमण भी हटेगा।
तीन उपकेंद्रों पर लग रहा आरएमयू, अन्य पर भी लगेगा
शहर के तीन उपकेंद्रों श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन मंदिर और सर्किट हाउस में आरएमयू तकनीक से निर्बाध बिजली आपूर्ति की जाएगी। इन तीन उपकेंद्रों पर आरएमयू लगने के बाद, शहर के अन्य उपकेंद्रों पर भी इसे लगाया जाएगा। आरएमयू तकनीक से बिजली ट्रिपिंग और कटौती की समस्या से निजात मिलेगी।
इन 14 उपकेंद्रों का हो रहा निर्माण
33/11 केेवीए शंकरपुर, 33/11 केवीए ऐढ़े, 33/11 केेवीए सथवां, 33/11 केेवीए गणेशपुर, 33/11 केेवीए बसनी, 33/11 केेवीए करखियांव, 33/11 केेवीए पीएसी भुल्लनपुर, 33/11 केेवीए भगावनपुर, 33/11 केेवीए पीएचसी शिवपुर, 33/11 केेवीए ढेलवरियां, 33/11 केेवीए रेवड़ीतालाब, 33/11 केवीए चांदपुर और 33/11 केेवीए नियार डीह।
33/11 केवीए दीनापुर और संदहा में जमीन की तलाश
जिले में बन रहे 16 उपकेंद्रों में से दो के निर्माण में जमीन की उपलब्धता बाधक बनी है। दीनापुर और संदहां में 33/11 केवीए उपकेंद्र के निर्माण के लिए जमीन तलाशी जा रही है। बिजली निगम के अधिकारी लगातार राजस्व विभाग के कर्मचारियों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं। जमीन मिलते ही निर्माण शुरू होगा।
उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना निगम की प्राथमिकता है। निगम की ओर नए उपकेंद्रों के निर्माण के साथ फीडरों की क्षमतावृद्धि, नए ट्रांसफॉर्मर लगाने से तकनीकी काम कराए जा रहे हैं। सभी काम चरणवार किए जा रहे हैं। लगातार निगरानी की जा रही है। इस साल के अंत तक काम पूरा हो जाएगा। -संदीप कुमार, प्रबंध निदेशक, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड