{"_id":"6a8898b21021deec5b0be7b8","slug":"multi-crore-shovel-submerged-at-nigahi-coal-mine-sonbhadra-news-c-194-1-son1002-151787-2026-08-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: निगाही कोयला खदान में करोड़ों की शॉवेल डूबी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: निगाही कोयला खदान में करोड़ों की शॉवेल डूबी
विज्ञापन
एनसीएल की निगाही कोयला खदान में भरे पानी में डूबी शावेल मशीन। स्रोत जागरूक पाठक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनसीएल की निगाही कोयला खदान में पानी भरने से करोड़ों रुपये की शॉवेल मशीन डूब गई। घटना से कोल प्रबंधन में खलबली मच गई है। घटना के कारणों की जांच के साथ मशीन को निकालने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। यह मशीन उच्च क्षमता वाले डंपरों में कोयला भरने का काम करती है।
घटना का सही समय स्पष्ट नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि रविवार से बुधवार तक हुई लगातार बारिश के दौरान खदान के तुर्रा फेस में पानी भर गया। इसी जलभराव में 20 क्यूबिक मीटर क्षमता वाली पीएंडएच शॉवेल मशीन डूब गई। कर्मचारियों के अनुसार, मशीन के डूबने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं, प्रबंधन के अधिकारियों का कहना है कि मशीन पहले से ब्रेकडाउन थी।
बताया जा रहा है कि मशीन एक बार में करीब 20 क्यूबिक मीटर कोयला उठाकर डंपरों में लादने में सक्षम है। कर्मचारियों के मुताबिक, मशीन को बाहर निकालकर दोबारा परिचालन में लाने में कई महीने लग सकते हैं। फिलहाल कोल प्रबंधन ने खदान के मुख्य संप में हैवी इलेक्ट्रिक मोटरों के जरिये पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
प्रबंधन घटना के पीछे अत्यधिक बारिश को वजह बता रहा है। वहीं, कर्मचारियों और जानकारों का कहना है कि मानसून से पहले जलनिकासी की व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद इस तरह की घटना होना चिंता का विषय है।
विज्ञापन
घटना का सही समय स्पष्ट नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि रविवार से बुधवार तक हुई लगातार बारिश के दौरान खदान के तुर्रा फेस में पानी भर गया। इसी जलभराव में 20 क्यूबिक मीटर क्षमता वाली पीएंडएच शॉवेल मशीन डूब गई। कर्मचारियों के अनुसार, मशीन के डूबने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं, प्रबंधन के अधिकारियों का कहना है कि मशीन पहले से ब्रेकडाउन थी।
विज्ञापन
बताया जा रहा है कि मशीन एक बार में करीब 20 क्यूबिक मीटर कोयला उठाकर डंपरों में लादने में सक्षम है। कर्मचारियों के मुताबिक, मशीन को बाहर निकालकर दोबारा परिचालन में लाने में कई महीने लग सकते हैं। फिलहाल कोल प्रबंधन ने खदान के मुख्य संप में हैवी इलेक्ट्रिक मोटरों के जरिये पानी निकालने का काम शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
प्रबंधन घटना के पीछे अत्यधिक बारिश को वजह बता रहा है। वहीं, कर्मचारियों और जानकारों का कहना है कि मानसून से पहले जलनिकासी की व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद इस तरह की घटना होना चिंता का विषय है।