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मुजफ्फरनगर दंगा: कपिल देव, हरेंद्र मलिक, संजीव बालियान, सुरेश राणा समेत 25 आरोपियों से केस वापस; ये था मामला

Wed, 12 Aug 2026 07:45 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: Mohd Mustakim Updated Wed, 12 Aug 2026 07:45 PM IST
सार
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Muzaffarnagar News: नंगला मंदौड़ में मुजफ्फरनगर दंगे के वक्त पंचायत की गई थी। नेताओं पर सरकारी कार्य में बाधा डालने समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। अब विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने बुधवार को केस वापस करने के आदेश जारी कर दिए। 

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Muzaffarnagar Riots: Case withdrawn against 25 accused, including Kapil Dev, Harendra Malik, Balyan,
मुजफ्फरनगर दंगा। फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान नंगला मंदौड़ पंचायत में सरकारी कार्य में बाधा डालने और निषेधाज्ञा उल्लंघन के केस में कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, सपा सांसद हरेंद्र मलिक, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, पूर्व मंत्री सुरेश राणा समेत 25 आरोपियों से शासन के आदेश पर केस वापस हो गया है। विशेष एमपी एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह फौजदार ने आदेश जारी किए।
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नंगला मंदौड़ इंटर कॉलेज के मैदान पर 31 जुलाई 2013 को हुई पंचायत में सरकारी कार्य में बाधा डालने, रास्ता रोकने और 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की धारा में तत्कालीन एसओ सिखेड़ा चरण सिंह यादव ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। 
 
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पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, पूर्व विधायक उमेश मलिक, मोघपुर निवासी कल्लू, योगेश, नंगला कबीर निवासी सचिन, अंतवाड़ा निवासी रविंद्र, तेजपुरा निवासी मिंटू के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। दूसरा आरोपपत्र श्यामपाल चेयरमैन, साध्वी प्राची और बिट्टू सिखेड़ा के खिलाफ दाखिल हुआ। जीवना के शिव कुमार की पत्रावली अलग कर दी गई थी, जबकि पूर्व ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र कुतुबपुर की मौत हो चुकी है।
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तत्कालीन एडीएम प्रशासन की ओर से निषेधाज्ञा उल्लंघन में वर्तमान सपा सांसद हरेंद्र मलिक, कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व सांसद सोहनवीर सिंह, पूर्व विधायक अशोक कंसल, पूर्व विधायक उमेश मलिक, एमएलसी अशोक कटारिया,  नृसिंहानंद उर्फ दीपक त्यागी समेत 21 आरोपियों के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया गया था, जिनमें से 16 के खिलाफ आरोपपत्र आया।
 

बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्यामवीर सिंह, बिजेंद्र सिंह मलिक, विनोद गुप्ता और आयुष बालियान ने बताया कि शासन की ओर से आदेश पहले ही जारी हो चुके थे। उत्तर प्रदेश शासन न्याय अनुभाग-5 (फौजदारी) के विशेष सचिव के पत्र का हवाला देते हुए डीजीसी को प्रशासन की ओर से पत्र लिखा गया था। अभियोजन की ओर से दिए पत्र के बाद अदालत ने केस वापस लेने के आदेश जारी कर दिए हैं।

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