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माता सती में थी भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा : अवस्थी
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अमर उजाला....अन्नपूर्णा मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा में शामिल श्रद्धालु।
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- अन्न्पूर्णा मंदिर चल रही श्रीराम कथा में माता सती का प्रसंग सुनाया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बाबा औघड़नाथ मंदिर मार्ग पर अन्नपूर्णा मंदिर प्रांगण में चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथा व्यास मनोज शास्त्री ने भगवान शिव एवं माता सती से जुड़ी अद्भुत कथा का वर्णन किया। उन्होंने सती चरित्र के माध्यम से पिता और पुत्री के प्रेम, पारिवारिक संबंधों और भगवान शिव के प्रति माता सती की अटूट श्रद्धा का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा व्यास ने बताया कि प्रजापति दक्ष ने एक सभा में भगवान शिव का अपमान किया। विशाल यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया गया। माता सती जब यज्ञ में पहुंची तो उनकी माता के अलावा किसी ने उनका स्वागत नहीं किया। यज्ञशाला में भगवान शिव के लिए कोई स्थान न देखकर सती को अत्यंत पीड़ा हुई और उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।
माता सती के देह त्याग का समाचार भगवान शिव को मिला तो वे अत्यंत क्रोधित हुए। उन्होंने अपनी जटा पृथ्वी पर पटकी। इससे वीरभद्र की उत्पत्ति हुई। वीरभद्र ने दक्ष के यज्ञ को विध्वंस कर दिया और दक्ष का सिर हवन कुंड में डाल दिया। इसके बाद सभी देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की। भगवान शिव प्रसन्न हुए और दक्ष के धड़ पर बकरे का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवन प्रदान किया। दक्ष ने भगवान शिव की स्तुति कर क्षमा मांगी।
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मंदिर प्रांगण में भक्तिमय वातावरण बना रहा। मुख्य यजमान सीमा गर्ग और मुकेश गर्ग रहे। विशिष्ट अतिथि में योगेश मोहन गुप्ता रहे। अन्नपूर्णा मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष एवं संरक्षक बृजभूषण गुप्ता के साथ मंदिर कार्यकारिणी एवं ट्रस्ट के पदाधिकारियों राज केसरी, सुरेश चंद्र मिश्रा, सुभाष चंद्र गुप्ता, ललित, आनंद प्रकाश, अमित गुप्ता आदि रहे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बाबा औघड़नाथ मंदिर मार्ग पर अन्नपूर्णा मंदिर प्रांगण में चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथा व्यास मनोज शास्त्री ने भगवान शिव एवं माता सती से जुड़ी अद्भुत कथा का वर्णन किया। उन्होंने सती चरित्र के माध्यम से पिता और पुत्री के प्रेम, पारिवारिक संबंधों और भगवान शिव के प्रति माता सती की अटूट श्रद्धा का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथा व्यास ने बताया कि प्रजापति दक्ष ने एक सभा में भगवान शिव का अपमान किया। विशाल यज्ञ में सभी देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया गया। माता सती जब यज्ञ में पहुंची तो उनकी माता के अलावा किसी ने उनका स्वागत नहीं किया। यज्ञशाला में भगवान शिव के लिए कोई स्थान न देखकर सती को अत्यंत पीड़ा हुई और उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।
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माता सती के देह त्याग का समाचार भगवान शिव को मिला तो वे अत्यंत क्रोधित हुए। उन्होंने अपनी जटा पृथ्वी पर पटकी। इससे वीरभद्र की उत्पत्ति हुई। वीरभद्र ने दक्ष के यज्ञ को विध्वंस कर दिया और दक्ष का सिर हवन कुंड में डाल दिया। इसके बाद सभी देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की। भगवान शिव प्रसन्न हुए और दक्ष के धड़ पर बकरे का सिर लगाकर उन्हें पुनर्जीवन प्रदान किया। दक्ष ने भगवान शिव की स्तुति कर क्षमा मांगी।
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मंदिर प्रांगण में भक्तिमय वातावरण बना रहा। मुख्य यजमान सीमा गर्ग और मुकेश गर्ग रहे। विशिष्ट अतिथि में योगेश मोहन गुप्ता रहे। अन्नपूर्णा मंदिर के संस्थापक अध्यक्ष एवं संरक्षक बृजभूषण गुप्ता के साथ मंदिर कार्यकारिणी एवं ट्रस्ट के पदाधिकारियों राज केसरी, सुरेश चंद्र मिश्रा, सुभाष चंद्र गुप्ता, ललित, आनंद प्रकाश, अमित गुप्ता आदि रहे।

अमर उजाला....अन्नपूर्णा मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा में शामिल श्रद्धालु।