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17 करोड़ के नकली नोट: कई महीने से चल रहा था जाली नोटों का खेल, आरोपियों ने छापे 3.40 लाख; एक और नया खुलासा

Thu, 03 Sep 2026 10:22 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर Published by: Sharukh Khan Updated Thu, 03 Sep 2026 10:22 AM IST
सार
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सहारनपुर में पीएनबी की करेंसी चेस्ट में जाली नोट रखने की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे खुलासे होते जा रहे हैं। अब सामने आया है कि कई महीनों से जाली नोटों का खेल चल रहा था। आरोपियों ने 3.40 लाख जाली नोट तैयार किए। करेंसी चेस्ट में जाली नोट के मिलने का मामला सामने आने पर हर कोई हैरान है। 

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counterfeit currency racket had been operating for several months accused printed notes worth ₹3.40 lakh
fake currency notes - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सहारनपुर में पीएनबी की करेंसी चेस्ट में जाली नोट रखने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। चेस्ट में जाली नोट रखे जाने का खेल कई माह से चल रहा था। प्राथमिक जांच में आया कि एक-दूसरे के साथ मिलीभगत कर आरोपी पिछले कई माह से जाली नोटों की अदला-बदली में लगे हुए थे। 
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अभी तक 17 करोड़ के जाली नोट मिले हैं, जो 500-500 के नोट हैं। यानी कि आरोपियों ने 3.40 लाख जाली नोट तैयार किए। करेंसी चेस्ट में जाली नोट के मिलने का मामला सामने आने पर हर कोई हैरान है। 
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साथ ही सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी पर भी तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। जांच में अभी तक 17 करोड़ रुपये के जाली नोट पकड़े गए हैं। खास बात है कि पकड़े गए सभी नोट 500 रुपये मूल्य के हैं। 17 करोड़ रुपये के नोट छापने के लिए कुल 3,40,000 नोट छापे गए।
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इतनी बड़ी संख्या में नोट छापना और उन्हें असली नोट के बदले करेंसी चेस्ट में रखना सप्ताह या दस दिनों की बात नहीं है। माना जा रहा है कि यह खेल कई महीनों से चल रहा था, जिसकी भनक तक भी किसी अधिकारी को नहीं लग सकी।

 

बताया जा रहा है कि करेंसी चेस्ट में जमा नोट सर्कुलेशन में नहीं आए थे। यदि नोट सर्कुलेशन में आते तो इसकी जानकारी पहले ही लग जाती। आरोपियों ने बड़ी सफाई से इस पूरे खेल को अंजाम दिया। करेंसी चेस्ट में जो भी बंडल आए, उन्हें बड़ी सफाई से चेस्ट में व्यवस्थित किया गया।

आरोपियों ने इस बात का भी ध्यान रखा कि यदि चेस्ट से बंडलों को बैंक, एटीएम में जमा कराने के लिए भेजना भी पड़े तो एकदम से ही फर्जी नोटों वाले बंडल न चले जाएं। अभी तक की जांच में यह सामने भी आ चुका है कि स्ट्रांग रूम में रखी शुरुआती रैक में कोई भी जाली नोट नहीं मिला था। बाद वाली रैक में ही जाली नोटों की गड्डियां रखी गई थीं। आरोपियों के इतने शातिराना अंदाज से माना जा रहा है कि इस खेल की फूल प्रूफ प्लानिंग की गई थी।

प्रयोगशाला भी भेजे जा सकते हैं कुछ नोट
फर्जी पाए गए नोटों के आगे की जांच के लिए उन्हें विधि प्रयोगशाला भी जा सकता है। प्रयोगशाला में विशेषज्ञों द्वारा नोटों में इस्तेमाल कागज, स्याही, वॉटरमार्क और सुरक्षा धागे आदि की बारीकी से जांच की जाती है। माना जा रहा है कि मिले जाली नोट में से कुछ को प्रयोगशाला में भेजा जा सकता है। इससे स्थिति और भी स्पष्ट हो सकेगी।
 

यह था मामला
करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ के जाली नोट मिलने के मामले में नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की तरफ से अलग-अलग दो मामलों में सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोपियों में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक शर्मा, करेंसी चेस्ट खरा बाजार जगाधरी के प्रबंधक अमित कुमार और पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल शामिल है।

जाली नोट गलती से आ जाए तो न घबराएं...
करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने की खबर से हर कोई हैरान है। ऐसे में यदि अपने पास गलती से जाली नोट आ जाता है तो उस जाली नोट से लेनदेन बिल्कुल न करें और न ही घबराएं।

असली जैसे दिखने वाले नोट कई बार एक्सपर्ट आंखों को भी धोखा दे देते हैं। कई बार बड़े लेनदेन के दौरान ऐसा नोट जेब में आ सकता है, जिसका कोई मूल्य नहीं। मतलब की वह जाली हो सकता है। बैंकिंग एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि आपके पास जाली नोट आ गया है तो यह ध्यान रखें कि उसे आगे लेनदेन में कतई भी प्रयोग न करें। यह एक अपराध है।

जाली नोट मिलने पर सबसे पहले पुलिस को जानकारी दें। साथ ही सीरियल नंबर, राशि और जिससे आपको नोट प्राप्त हुआ है उसके विषय में सही जानकारी उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही जाली नोट को लेने के बाद उसी मूल्य का नया नोट नहीं दिया जाता है।

इस तरह आपकी जेब तक पहुंचता है नोट
आरबीआई की प्रिंटिंग प्रेस में नोट प्रिंट होने के बाद उन्हें कड़ी सुरक्षा में संबंधित चेस्ट में भेजा जाता है। इसके बाद चेस्ट से रुपयों के बंडल बनाकर उन्हें बक्सों में रखा जाता है। बैंक अधिकारी बताते हैं कि जिस बैंक की जितनी मांग और उसका कारोबार होता है। उसी हिसाब से आरबीआई उन बैंकों को नकदी आवंटित करता है। बैंकों और एटीएम के जरिये ही नई करेंसी आम आदमी तक पहुंचती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा की कई परतें रहती हैं।
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