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Mathura News: बांकेबिहारी को राखी भेजी
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बांके_बिहारी मंदिर कार्यालय में रखी ठाकुरजी के लिए भेजी गई राखियां।
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वृंदावन। ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के प्रति भक्तों की आस्था और विश्वास का रिश्ता अनूठा है। कोई उन्हें अपना आराध्य मानता है तो कोई सखा, कोई पुत्र और कोई भाई। इसी भाव के साथ पंजाब की रहने वाली स्नेहलता पिछले करीब 20 वर्षों से ठाकुर श्रीबांकेबिहारी को राखी भेज रही हैं। दो वर्ष पहले उन्होंने राखी के साथ भेजी पाती में अपने परिवार की सुख-शांति की कामना के साथ बेटे की सरकारी नौकरी लगने की मनोकामना मांगी थी।
स्नेहलता बताती हैं कि इसके बाद उनके बेटे की सरकारी नौकरी लग गई। अब उनका विश्वास और भी गहरा हो गया है और हर साल वह अपने बांकेभैया के लिए राखी और स्नेह से भरी पाती भेजती हैं। स्नेहलता जैसी देश-विदेश की हजारों धर्म बहनों के लिए ठाकुर श्रीबांकेबिहारी सिर्फ आराध्य नहीं, बल्कि उनके भाई हैं। रक्षाबंधन पर इन बहनों की ओर से बांकेभैया के लिए राखी, उपहार और स्नेहपत्र भेजे जा रहे हैं। डाक और कोरियर के माध्यम से मंदिर के सेवायतों तथा प्रबंध कार्यालय तक लगातार राखियां पहुंच रही हैं।
श्रीहरिदासपीठाधीश्वर एवं इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि ब्रज की उत्सव संस्कृति आराध्यदेवों की उपासना परंपरा पर आधारित है। यहां भक्त अपने ठाकुरजी को भगवान के साथ-साथ सखा, पिता, पुत्र, भाई और मित्र के रूप में भी स्वीकार करते हैं। इसी भाव से देश-विदेश की अनेक महिलाएं और बच्चियां ठाकुर श्रीबांकेबिहारी को अपना धर्म भाई मानकर रक्षाबंधन पर राखी भेजती हैं। उसके साथ ही बहनों की पाती हैं जिन्हें ठाकुर जी को सुनाया जाता है। उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और बंगाल समेत देश के विभिन्न हिस्सों से राखियां आती हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, दुबई और कनाडा में रहने वाले भक्त परिवार भी अपने बांकेभैया के लिए राखी भेजते हैं।
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स्नेहलता बताती हैं कि इसके बाद उनके बेटे की सरकारी नौकरी लग गई। अब उनका विश्वास और भी गहरा हो गया है और हर साल वह अपने बांकेभैया के लिए राखी और स्नेह से भरी पाती भेजती हैं। स्नेहलता जैसी देश-विदेश की हजारों धर्म बहनों के लिए ठाकुर श्रीबांकेबिहारी सिर्फ आराध्य नहीं, बल्कि उनके भाई हैं। रक्षाबंधन पर इन बहनों की ओर से बांकेभैया के लिए राखी, उपहार और स्नेहपत्र भेजे जा रहे हैं। डाक और कोरियर के माध्यम से मंदिर के सेवायतों तथा प्रबंध कार्यालय तक लगातार राखियां पहुंच रही हैं।
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श्रीहरिदासपीठाधीश्वर एवं इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि ब्रज की उत्सव संस्कृति आराध्यदेवों की उपासना परंपरा पर आधारित है। यहां भक्त अपने ठाकुरजी को भगवान के साथ-साथ सखा, पिता, पुत्र, भाई और मित्र के रूप में भी स्वीकार करते हैं। इसी भाव से देश-विदेश की अनेक महिलाएं और बच्चियां ठाकुर श्रीबांकेबिहारी को अपना धर्म भाई मानकर रक्षाबंधन पर राखी भेजती हैं। उसके साथ ही बहनों की पाती हैं जिन्हें ठाकुर जी को सुनाया जाता है। उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और बंगाल समेत देश के विभिन्न हिस्सों से राखियां आती हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, दुबई और कनाडा में रहने वाले भक्त परिवार भी अपने बांकेभैया के लिए राखी भेजते हैं।
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