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हाथरस: खुद कचरा बन गए निस्तारण केंद्र, 40 करोड़ से ज्यादा खर्च, फिर भी गांवों में सड़ रहे कूड़े के ढेर

Mon, 31 Aug 2026 11:02 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 31 Aug 2026 11:02 AM IST
सार
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विभाग शासन को रिपोर्ट भेजकर दावा कर रहा है कि इनमें से 316 केंद्र पूरी तरह क्रियाशील हैं, लेकिन जमीनी पड़ताल में बमुश्किल 15 से 20 केंद्र ही ऐसे मिले, जो वास्तव में काम कर रहे हैं।

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kachra nistaran kendra in Hathras
देवी नगर ग्राम पंचायत में बदहाल स्थिति में पड़ा कचरा निस्तारण केंद्र - फोटो : संवाद

विस्तार

गांवों को कचरा मुक्त बनाने के लिए बनाए गए कचरा निस्तारण केंद्र (आरसीसी) देखरेख के अभाव में खुद कचरा बन चुके हैं। हाथरस जिले की 462 ग्राम पंचायतों में से 445 में लगभग 40 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यह केंद्र बनाए गए थे। एक केंद्र के निर्माण पर औसतन नौ लाख रुपये की लागत आई है। 

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विभाग शासन को रिपोर्ट भेजकर दावा कर रहा है कि इनमें से 316 केंद्र पूरी तरह क्रियाशील हैं, लेकिन जमीनी पड़ताल में बमुश्किल 15 से 20 केंद्र ही ऐसे मिले, जो वास्तव में काम कर रहे हैं। कहीं इन केंद्रों पर ताले लटके हैं तो कहीं कचरा निस्तारण का कोई इंतजाम ही नहीं है। उम्मीद थी कि इन केंद्रों संचालन से गांव कचरे से मुक्त हो जाएंगे, लेकिन हकीकत में आज भी गांवों में कचरे के ढेर सड़ रहे हैं और लोग प्रदूषण और बीमारियों से जूझ रहे हैं।

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जिले में सभी कचरा निस्तारण केंद्रों को क्रियाशील कराया जा रहा है। कई केंद्र बेहतर स्थिति में हैं और संचालित भी हो रहे हैं।-राकेशबाबू, जिला पंचायतराज अधिकारी

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kachra nistaran kendra in Hathras
पीहुरा के कचरा निस्तारण केंद्र में लगा गोबर का ढेर - फोटो : संवाद
केस-1
पीहुरा में गोबर व घास से घिरा आरसीसी

ग्राम पंचायत पीहुरा के एकीकृत ठोस कचरा प्रबंधन केंद्र के बाहर चारों ओर लंबी-लंबी घास उगी है। मुख्य द्वार पर ही गोबर व गंदगी पड़ी हुई है। अंदर के हालात गवाही दे रहे हैं कि यह केंद्र महीनों से खुला ही नहीं है। यहां तक पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ता तक नहीं है।
केस-2
ममौता कलां में केंद्र पर लटका ताला

सासनी क्षेत्र की ग्राम पंचायत ममौता कलां के ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के बाद से कचरा निस्तारण केंद्र चालू ही नहीं हुआ है और इस पर हमेशा ताला लटका रहता है। दरवाजे पर और अंदर घास उग चुकी है। कचरा पृथक्करण के लिए बनीं हौदियां पूरी तरह खाली पड़ी हैं।
केस-3
मीरपुर में केंद्र के अंदर ही गंदगी का ढेर

सादाबाद के गांव मीरपुर में लाखों की लागत से तैयार केंद्र के परिसर के अंदर ही साफ-सफाई न होने से गंदगी का ढेर लगा हुआ है। चारों तरफ लंबी-लंबी घास उगी है। नियमित संचालन न होने से ग्रामीण जगह-जगह कचरा फेंकने के लिए मजबूर हैं।
केस-4
लढ़ौता में जर्जर हुआ भवन

सासनी के गांव लढौता में जब से कचरा निस्तारण केंद्र का निर्माण हुआ है, तब से इसका कोई उपयोग नहीं हुआ। देखरेख के अभाव में अब इसकी लाखों की लागत से बनी बिल्डिंग खंडहर हो रही है, लेकिन विभागीय अधिकारी इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है।

एक नजर में आंकड़े
  • जिले में कुल ग्राम पंचायतें- 462
  • बनाए गए कुल कचरा निस्तारण केंद्र- 445
  • प्रति केंद्र निर्माण की औसत लागत- लगभग नौ लाख रुपये
  • प्रोजेक्ट पर खर्च हुआ कुल बजट - लगभग 40.05 करोड़ रुपये
  • कागजों/फाइलों में दर्ज चालू केंद्रों की संख्या- 316
  • हकीकत में चालू केंद्रों की संख्या बमुश्किल - 15 से 20
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