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Bareilly News: विद्युत निगम का लाइन कुली घूस लेते गिरफ्तार, जेई के कहने पर लिए थे 18 हजार रुपये

Wed, 13 May 2026 11:26 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Wed, 13 May 2026 11:26 PM IST
सार
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बरेली में एंटी करप्शन की टीम ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। एक शिकायत पर टीम ने विद्युत निगम के लाइन कुली को रिश्वत लेते रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया। 

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Electricity Department Lineman Arrested for Accepting Bribe in Bareilly
आरोपी - फोटो : संवाद

विस्तार

बरेली में एंटी करप्शन टीम ने बुधवार को बिजली बिल समायोजन के नाम पर उपभोक्ता से 18 हजार रुपये घूस लेते हुए विद्युत निगम के लाइन कुली अनस कादरी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। वह जेई जितेंद्र केसरवानी के कहने पर रिश्वत ले रहा था। एंटी करप्शन टीम ने जेई को भी नामजद किया है। तकनीकी कर्मचारी रतन लाल की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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इंस्पेक्टर प्रवीन सान्याल ने बताया कि मॉडल टाउन निवासी नितिन आनंद ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बिजली के बिल के समायोजन के लिए 18 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई है। डीडीपुरम उपकेंद्र के जेई जितेंद्र केसरवानी ने उनको बुधवार को रुपये लेकर बुलाया है। 
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बुधवार दोपहर बाद नितिन रिश्वत देने पहुंचा। जेई के कहने पर संविदा पर तैनात लाइन कुली अनस कादरी बैकबेल कैफे के पास रिश्वत लेने आया। वहां पहले से तैनात एंटी करप्शन टीम ने उसे घूस लेते दबोच लिया। आरोपी अनस को बृहस्पतिवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।

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बिजली बिल समायोजन में 67 लाख के गबन की जांच अधूरी
बिजली बिलों के समायोजन के नाम पर भ्रष्टाचार का मामला नया नहीं। लाइन कुली के घूस लेते पकड़े जाने से पहले भी बिल समयोजन के नाम पर यहां 67 लाख रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया था। अब तक इसकी जांच भी पूरी नहीं हो सकी है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की एमडी रिया केजरीवाल के आदेश पर मामले की जांच के लिए जनवरी में ने चार सदस्यों की कमेटी गठित की गई थी। 

इस मामले में तत्कालीन अधिशासी अभियंता सुरेंद्र गौतम और अनुज गुप्ता को चार्जशीट दी जा चुकी है। शहर में वर्टिकल व्यवस्था शुरू होने से बिजली बिलों में संशोधन के नाम पर घपलेबाजी की गई थी। तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ब्रह्मपाल ने मामले को पकड़ा था। जांच की गई तो पता लगा कि तत्कालीन अधिशासी अभियंता अनुज गुप्ता के कार्यकाल के नौ मामलों में 17.34 लाख रुपये और अधिशासी अभियंता सुरेंद्र गौतम के कार्यकाल में 135 बिलों के संशोधन में 49.67 रुपये समायोजित कर खेल कर दिया गया। 
इससे बिजली निगम को राजस्व की क्षति हुई। दोनों अधिकारियों ने औद्योगिक इकाइयों के बिलों का समायोजन किया था। इस मामले में लेखा विभाग के एक अधिकारी, दो लिपिक और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ भी जांच चल रही है।

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