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Balrampur News: पूर्व विधायक के भाई पर एनबीडब्ल्यू की तैयारी, नेपाल तक तलाश
Fri, 21 Aug 2026 10:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 21 Aug 2026 10:26 PM IST
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बलरामपुर। देवीपाटन मंडल के चर्चित स्वास्थ्य घोटाले की जांच में विजिलेंस ने शिकंजा और कस दिया है। घोटाले के मुख्य आरोपी पयागपुर, बहराइच के पूर्व सपा विधायक मुकेश श्रीवास्तव के भाई और बलरामपुर में लंबे समय तक लिपिक रहे अजय श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के लिए विजिलेंस ने गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) की कार्रवाई शुरू कर दी है।
अजय की गिरफ्तारी के लिए विजिलेंस ने पिछले बुधवार को लखनऊ, गोंडा, बाराबंकी और बहराइच में एक साथ छापेमारी की थी। टीम ने कई ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन अजय का पता नहीं चला। इसके बाद गोंडा स्थित उसके मकान को सील कर दिया गया। अब उसकी तलाश के साथ ही उससे जुड़ी संपत्तियों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।
विजिलेंस की शुरुआती जांच में अजय से जुड़ी करीब 28 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों का पता चलने की बात सामने आई है। बलरामपुर में खरीदी गई जमीनों के बैनामे और रजिस्ट्री से जुड़े अभिलेखों की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल धन का स्रोत क्या था और वह अजय की घोषित आय से कितना मेल खाता है।
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जमीनों के दस्तावेजों के साथ बैंक खातों में हुए लेनदेन का भी मिलान किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संपत्तियां वैध आय से खरीदी गईं या घोटाले से कथित तौर पर हासिल रकम का इस्तेमाल किया गया।
नेपाल में छिपे होने के इनपुट की भी पड़ताल
मुकेश श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद से अजय के लगातार सामने नहीं आने पर विजिलेंस उसकी तलाश में जुटी है। सूत्रों के अनुसार, अजय के नेपाल में शरण लेने की आशंका से जुड़े इनपुट भी जांच एजेंसी को मिले हैं। भारत-नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर में इस पहलू को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि, अजय के नेपाल में होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विजिलेंस यह भी जांच कर रही है कि कहीं दोनों भाइयों ने कंपनियों के माध्यम से कथित घोटाले की रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर उसे वैध धन के रूप में दिखाने का प्रयास तो नहीं किया।
पत्नियों के बाद बैंककर्मी भी जांच के घेरे में
मुकेश और अजय की पत्नियों पूजा श्रीवास्तव और सविता श्रीवास्तव की भूमिका भी जांच के दायरे में है। संपत्तियों और फर्मों से जुड़े दस्तावेजों में उनके नाम सामने आने के बाद विजिलेंस उनके वित्तीय लेनदेन और भूमिका की पड़ताल कर रही है।
इसके साथ ही उन बैंककर्मियों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं, जिन्होंने संबंधित लोगों या उनकी कंपनियों के खाते खुलवाने में मदद की थी। जांच में किसी बैंककर्मी की मिलीभगत या नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
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अजय की गिरफ्तारी के लिए विजिलेंस ने पिछले बुधवार को लखनऊ, गोंडा, बाराबंकी और बहराइच में एक साथ छापेमारी की थी। टीम ने कई ठिकानों पर दबिश दी, लेकिन अजय का पता नहीं चला। इसके बाद गोंडा स्थित उसके मकान को सील कर दिया गया। अब उसकी तलाश के साथ ही उससे जुड़ी संपत्तियों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।
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विजिलेंस की शुरुआती जांच में अजय से जुड़ी करीब 28 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों का पता चलने की बात सामने आई है। बलरामपुर में खरीदी गई जमीनों के बैनामे और रजिस्ट्री से जुड़े अभिलेखों की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल धन का स्रोत क्या था और वह अजय की घोषित आय से कितना मेल खाता है।
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जमीनों के दस्तावेजों के साथ बैंक खातों में हुए लेनदेन का भी मिलान किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संपत्तियां वैध आय से खरीदी गईं या घोटाले से कथित तौर पर हासिल रकम का इस्तेमाल किया गया।
नेपाल में छिपे होने के इनपुट की भी पड़ताल
मुकेश श्रीवास्तव की गिरफ्तारी के बाद से अजय के लगातार सामने नहीं आने पर विजिलेंस उसकी तलाश में जुटी है। सूत्रों के अनुसार, अजय के नेपाल में शरण लेने की आशंका से जुड़े इनपुट भी जांच एजेंसी को मिले हैं। भारत-नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर में इस पहलू को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि, अजय के नेपाल में होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विजिलेंस यह भी जांच कर रही है कि कहीं दोनों भाइयों ने कंपनियों के माध्यम से कथित घोटाले की रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर उसे वैध धन के रूप में दिखाने का प्रयास तो नहीं किया।
पत्नियों के बाद बैंककर्मी भी जांच के घेरे में
मुकेश और अजय की पत्नियों पूजा श्रीवास्तव और सविता श्रीवास्तव की भूमिका भी जांच के दायरे में है। संपत्तियों और फर्मों से जुड़े दस्तावेजों में उनके नाम सामने आने के बाद विजिलेंस उनके वित्तीय लेनदेन और भूमिका की पड़ताल कर रही है।
इसके साथ ही उन बैंककर्मियों के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं, जिन्होंने संबंधित लोगों या उनकी कंपनियों के खाते खुलवाने में मदद की थी। जांच में किसी बैंककर्मी की मिलीभगत या नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।