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Ballia News: गैंगस्टर एक्ट में दोषी को दो साल की सजा
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बलिया। गैंगस्टर एक्ट के करीब 25 साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी प्रथम/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) हरीश कुमार द्वितीय की अदालत ने अभियुक्त रामेश्वर तुरहा को दोषी करार देते हुए दो वर्ष कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहतवार थाना में वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। मामले में सहतवार थाना क्षेत्र के कुम्हैला निवासी रामेश्वर तुरहा पुत्र दहारी तुरहा आरोपित था। यह मामला विशेष आपराधिक के रूप में न्यायालय में विचाराधीन रहा। पुलिस की मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन शाखा की प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप सुनवाई पूरी हुई। अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और मामले के तथ्यों के आधार पर अभियुक्त को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषसिद्ध पाया।
सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्त और उसके अधिवक्ता ने अदालत से कम से कम दंड देने की मांग की। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अभियुक्त को फर्जी एवं गलत तरीके से मुकदमे में फंसाया गया है तथा पत्रावली वर्ष 2012 से विचाराधीन है। वहीं, विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट) ने अभियुक्त द्वारा समाज के विरुद्ध गंभीर अपराध किए जाने का हवाला देते हुए कठोर दंड दिए जाने की मांग की।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मामले के समस्त तथ्यों, परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए कहा कि अभियुक्त को दो वर्ष का साधारण कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड देना न्याय के उद्देश्य की पूर्ति के लिए उचित एवं पर्याप्त है।
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सहतवार थाना में वर्ष 2001 में उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। मामले में सहतवार थाना क्षेत्र के कुम्हैला निवासी रामेश्वर तुरहा पुत्र दहारी तुरहा आरोपित था। यह मामला विशेष आपराधिक के रूप में न्यायालय में विचाराधीन रहा। पुलिस की मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन शाखा की प्रभावी पैरवी के फलस्वरूप सुनवाई पूरी हुई। अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और मामले के तथ्यों के आधार पर अभियुक्त को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषसिद्ध पाया।
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सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्त और उसके अधिवक्ता ने अदालत से कम से कम दंड देने की मांग की। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अभियुक्त को फर्जी एवं गलत तरीके से मुकदमे में फंसाया गया है तथा पत्रावली वर्ष 2012 से विचाराधीन है। वहीं, विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट) ने अभियुक्त द्वारा समाज के विरुद्ध गंभीर अपराध किए जाने का हवाला देते हुए कठोर दंड दिए जाने की मांग की।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने मामले के समस्त तथ्यों, परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए कहा कि अभियुक्त को दो वर्ष का साधारण कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड देना न्याय के उद्देश्य की पूर्ति के लिए उचित एवं पर्याप्त है।