{"_id":"6a889a4bc965668057073238","slug":"raja-ram-is-granting-darshan-while-seated-on-a-gold-and-silver-inlaid-swing-ayodhya-news-c-97-1-ayo1002-156892-2026-08-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: स्वर्ण-रजत जड़ित हिंडोले पर दर्शन दे रहे राजाराम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: स्वर्ण-रजत जड़ित हिंडोले पर दर्शन दे रहे राजाराम
Sat, 22 Aug 2026 12:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 22 Aug 2026 12:04 AM IST
विज्ञापन
राजगोपाल मंदिर में झूलन पर दर्शन दे रहे भगवान सीताराम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या। सावन के आगमन के साथ ही रामनगरी के मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव की छटा देखते ही बन रही है। शाम ढलते ही मंदिरों के जगमोहन भक्ति, संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों से जीवंत हो उठते हैं। भगवान के विग्रहों को आकर्षक हिंडोलों पर विराजमान कर श्रद्धालु झुला रहे हैं।
रामपथ स्थित राजगोपाल मंदिर में झूलनोत्सव की करीब 160 वर्ष पुरानी परंपरा आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। यहां स्वर्ण और रजत जड़ित करीब ढाई क्विंटल के भव्य हिंडोले पर भगवान राम, माता सीता और चारों भाइयों के विग्रह विराजमान होते हैं।
सुबह पांच बजे से रात करीब 11 बजे तक श्रद्धालु झूलन दर्शन कर पुण्य अर्जित करते हैं। मंदिर के व्यवस्थापक सर्वेश्वर दास शरद के अनुसार, भगवान के शृंगार से लेकर उन्हें हिंडोले पर विराजमान कराने तक पांच पुजारी सेवा में जुटते हैं। मंदिर में झूलनोत्सव की परंपरा पुरानी है, लेकिन वर्ष 1927 में पूर्वाचार्य रामदास महाराज ने स्वर्ण-रजत जड़ित भव्य हिंडोले का निर्माण कराकर इसे नया स्वरूप दिया। हिंडोले पर राम दरबार और शुभता के प्रतीकों की आकर्षक आकृतियां उकेरी गई हैं। राजगोपाल मंदिर में झूलनोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं।
विज्ञापन
नृत्य प्रस्तुतियां भी रिझा रहीं
रायबरेली निवासी राज्यपाल से पुरस्कृत लोक कलाकार शीतला प्रसाद मिश्र के पुत्र अयोध्या शरण अपनी टीम के साथ करीब एक पखवाड़े तक कथक नृत्य और झूलन के पदों की प्रस्तुतियां दे रहे हैं। भक्ति और शास्त्रीय कला के इस संगम से मंदिर परिसर का वातावरण और भी मनोहारी हो उठा है। रामनगरी के सैकड़ों अन्य मंदिरों और मठों में भी झूलनोत्सव चल रहा है। कहीं भजन-कीर्तन तो कहीं शास्त्रीय संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां हो रही हैं। इससे सावन में अयोध्या की धार्मिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक रंग भी गहरा हो गया है।
विज्ञापन
रामपथ स्थित राजगोपाल मंदिर में झूलनोत्सव की करीब 160 वर्ष पुरानी परंपरा आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। यहां स्वर्ण और रजत जड़ित करीब ढाई क्विंटल के भव्य हिंडोले पर भगवान राम, माता सीता और चारों भाइयों के विग्रह विराजमान होते हैं।
विज्ञापन
सुबह पांच बजे से रात करीब 11 बजे तक श्रद्धालु झूलन दर्शन कर पुण्य अर्जित करते हैं। मंदिर के व्यवस्थापक सर्वेश्वर दास शरद के अनुसार, भगवान के शृंगार से लेकर उन्हें हिंडोले पर विराजमान कराने तक पांच पुजारी सेवा में जुटते हैं। मंदिर में झूलनोत्सव की परंपरा पुरानी है, लेकिन वर्ष 1927 में पूर्वाचार्य रामदास महाराज ने स्वर्ण-रजत जड़ित भव्य हिंडोले का निर्माण कराकर इसे नया स्वरूप दिया। हिंडोले पर राम दरबार और शुभता के प्रतीकों की आकर्षक आकृतियां उकेरी गई हैं। राजगोपाल मंदिर में झूलनोत्सव के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं।
विज्ञापन
नृत्य प्रस्तुतियां भी रिझा रहीं
रायबरेली निवासी राज्यपाल से पुरस्कृत लोक कलाकार शीतला प्रसाद मिश्र के पुत्र अयोध्या शरण अपनी टीम के साथ करीब एक पखवाड़े तक कथक नृत्य और झूलन के पदों की प्रस्तुतियां दे रहे हैं। भक्ति और शास्त्रीय कला के इस संगम से मंदिर परिसर का वातावरण और भी मनोहारी हो उठा है। रामनगरी के सैकड़ों अन्य मंदिरों और मठों में भी झूलनोत्सव चल रहा है। कहीं भजन-कीर्तन तो कहीं शास्त्रीय संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियां हो रही हैं। इससे सावन में अयोध्या की धार्मिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक रंग भी गहरा हो गया है।